कोरोना के कारण लगे लॉकडाउन के दौरान की छात्रावास फीस वापस देने की मांग को लेकर पंडित नेकीराम शर्मा राजकीय महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने तीन घंटे तक प्राचार्य डॉ. पूनम मलिक के कार्यालय में धरना दिया। डॉ. मलिक अंदर के कमरे में चली गईं। तीनों वार्डन काफी देर तक विद्यार्थियों को समझाते रहे। आखिरकार कॉलेज प्रशासन एचसीएफ को छोड़कर अन्य दो माह की सभी फीस लौटाने पर राजी हुआ। लेकिन डॉ. मलिक ने 22 जुलाई को इस संबंध में नोटिस जारी करने का आश्वासन दिया, तब धरना खत्म हुआ।
छात्र एकता मंच की अगुवाई में विद्यार्थी नई बिल्डिंग के सामने पार्क में इकट्ठे हुए और रोष प्रदर्शन करते हुए सीधे डॉ. मलिक के कार्यालय में पहुंच गए। इस रवैये से नाराज प्राचार्य ने कहा कि यह क्या तरीका है बात रखने का, वह कोई बात नहीं करेंगी और अंदर वाले कमरे में चली गईं। विद्यार्थी वहीं जमीन पर बैठ गए। इस दौरान लड़कों के छात्रावास के वार्डन वजीत सिंह व प्रवीण दलाल और लड़कियों के छात्रावास की वार्डन सुमित्रा ने उन्हें समझाने की बहुत कोशिश की। विद्यार्थी इस बात पर अड़े रहे कि कोरोना काल में लॉकडाउन के दौरान जिन माह में वे छात्रावास में रहे ही नहीं, तो उस दौरान की सारी फीस लौटाई जाए। वार्डन अपनी दलीलें देते रहें, पर दोनों पक्ष किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाए। आखिरकार कॉलेज प्रशासन को विद्यार्थियों की बात माननी पड़ी। उन्होंने एचसीएफ को छोड़ कर दो माह की सभी फीस लौटाने पर सहमति जताई। लेकिन विद्यार्थी फिर अड़े रहे कि प्राचार्या खुद आकर यह घोषणा करें। तब डॉ. मलिक आईं और उन्होंने आश्वासन दिया कि 22 जुलाई को इस बारे में नोटिस जारी कर दिया जाएगा। मंच के जिलाध्यक्ष अमनप्रीत विद्यार्थी ने कहा कि हॉस्टल में ठेके पर स्टाफ नियुक्त किया है, जिनका वेतन विद्यार्थियों से वसूला जाता है। इसके स्थान पर पक्की नियुक्ति की जाए और वेतन कॉलेज प्रबंधन दे। मंच की प्रदेश महासचिव मनीषा आजाद ने कहा कि अगर 22 को नोटिस जारी नहीं हुआ तो विद्यार्थी फिर आंदोलन करेंगे। इस अवसर पर प्रिया, सिमरन, आंचल, रवि, भीम, नीतीश, निखिल, राहुल, नरेश, मनीषा भी मौजूद थे।
एचसीएफ को छोड़ सारी फीस वापस होगी
छात्र एकता मंच की राज्य महासचिव मनीषा आजाद ने बताया कि विद्यार्थी तीन माह की सभी तरह की फीस लौटाने की मांग कर रहे थे। जिसमें बिजली, पानी, कमरे की सिक्योरिटी, एचसीएफ समेत कई छोटी-छोटी फीस हैं। लेकिन कॉलेज प्रशासन ने कहा कि हॉस्टल सिर्फ मई और जून में ही बंद रहे हैं। एचसीएफ वे नहीं लौटा सकते क्योंकि उससे हॉस्टल स्टाफ का वेतन जाता है। बाकी दो माह की सभी फीस लौटा दी जाएंगी।
यह है मामला
मनीषा आजाद ने बताया कि महाविद्यालय में लड़कों के दो और लड़कियों का एक हॉस्टल है। फरवरी 2021 में छात्र-छात्राओं को कमरे अलॉट किए गए थे। हर विद्यार्थी ने सात माह की फीस 15660 रुपये जमा करवाई थी। लेकिन कोरोना लॉकडाउन के बाद राज्य सरकार के आदेश पर अप्रैल में हॉस्टल बंद कर दिए गए। विद्यार्थी अधिकतम चार माह ही हॉस्टल में रहे थे, इसलिए तीन माह की फीस वापस की जाने की मांग थी। पहले भी कई बार प्राचार्या से मांग की गई थी, लेकिन अब तक कुछ नहीं हुआ था।