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पढ़ने की चाहत को जुनून बनाकर लक्ष्य की तरफ बढ़ें छात्र

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रोहतक। मन की जिज्ञासा से उत्पन्न सवालों का समाधान विशेष तौर से किशोरावस्था के दौरान किया जाए तो बच्चों को सही दिशा प्रदान की जा सकती है। विभिन्न तरह की मनोवैज्ञानिक समस्याओं के समाधान के लिए हरियाणा राज्य बाल कल्याण परिषद की राज्य स्तरीय परियोजना बाल सलाह, परामर्श एवं कल्याण केंद्रों की स्थापना की गई। मंगलवार को बंदा वीर बहादुर हाई स्कूल विद्यालय के विद्यार्थियों, अभिभावकों व शिक्षकों के लिए ऑनलाइन मनोवैज्ञानिक परामर्श कार्यक्रम आयोजित हुआ। मंडलीय बाल कल्याण अधिकारी एवं राज्य नोडल अधिकारी अनिल मलिक ने मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण से सवालों के जवाब दिए। उनका कहना है कि विद्यार्थी पढ़ने की चाहत को जुनून बनाकर लक्ष्य की तरफ बढ़ें। वेबिनार की अध्यक्षता जिला बाल कल्याण अधिकारी, सोमदत्त खुंडिया व प्रधानाचार्या रितु अहलावत ने की।
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बच्चों के सवाल, एक्सपर्ट के जवाब
सवाल : क्या लड़के-लड़कियां दोस्ती रख सकते हैं?
जवाब : सभी तरह के बंधन एवं संकीर्णताओं को तोड़कर प्रेम, सम्मान, परस्पर सोहद्रता बढ़ाने का संदेश ही असली मित्रता है। लड़के लड़की का भेद मिटाने के लिए सबसे पहले मानसिकता बदलनी होगी, तत्पश्चात आपसी भरोसा बढ़ाना होगा। शुरुआत घर से करनी होगी।
सवाल : लड़के अगर लड़कियों को परेशान करते हैं तो क्या बातें माता-पिता के साथ साझा करनी चाहिए?
जवाब : परवरिश के तौर-तरीके बहुत ही महत्वपूर्ण होते हैं, नजरिया, सोच ,आपसी व्यवहार, शब्दावली, परिवार की प्रथाएं। परिवार में बच्चों व माता-पिता के परस्पर विश्वास होना बहुत जरूरी है।
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सवाल : पढ़ाई के प्रति आदत निर्माण का महत्व कैसे करें?
जवाब : मनोविज्ञान की शाखा पैरासाइकोलॉजी के क्षेत्र से संबंधित है। इच्छा शक्ति बढ़ाने की आवश्यकता है, साथ ही आत्म चेतना, आत्मविश्वास, रिश्तों के प्रति भरोसा होना जरूरी है। अगर बच्चे का पढ़ाई में मन नहीं है तो उसका सबसे बड़ा कारण है मन का विचलित होना। आज के समय में सबसे ज्यादा विचलित करती है बच्चे को सोशल नेटवर्किंग, दोस्त या फिर परिवार का वातावरण।
सवाल : क्या भूत-प्रेत होते हैं?
जवाब : भूत-प्रेत कुछ नहीं होता, इंसान की कमजोर इच्छाशक्ति जिसकी वजह से भ्रम की स्थिति महसूस होती है, जिसकी वजह से किसी की बात पर भी जल्दी भरोसा कर लेते हैं।
सवाल : पढ़ाई में ध्यान कैसे लगाएं?
जवाब : चाहे शिक्षा का क्षेत्र या जीवन का कोई भी क्षेत्र है कामयाबी के लिए मन में एक चाहत का होना आवश्यक है जो जुनून बन जाए। आत्म- अनुशासन सीखना होगा, समय-समय पर प्रगति का ध्यान भी करना होगा।
सवाल : नकारात्मक माहौल में खुद को प्रेरणा कैसे दे सकते हैं?
जवाब : किसी भी इंसान के लिए सबसे जरूरी है थॉट प्रोसेस को बदलना यानी नकारात्मक सोच के अंधेरे से खुद को निकालने के लिए सकारात्मकता का दीपक जलाना होगा और उसके लिए मस्तिष्क में बने हुए अपने दृष्टिकोण और उसकी शब्दावली में थोड़ा सा हेरफेर करना होगा। नकारात्मक विचारों को रोकने के लिए मस्तिष्क को प्रशिक्षित करना होता है।
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