रोहतक। सरकारी स्कूलों की अब घंटी सिर्फ पढ़ाई के लिए नहीं कहानियों के लिए भी बजेगी। जिला मौलिक शिक्षा विभाग जल्द ही जिले के 211 राजकीय प्राथमिक विद्यालयों में रोजाना 15 मिनट का पुस्तकालय पठन कार्यक्रम शुरू करेगा। इसका उद्देश्य बच्चों में पढ़ने की आदत विकसित करना और स्वयं पठन क्षमता को बढ़ावा देना है।
जिला मौलिक शिक्षा विभाग बच्चों को किताबों से जोड़ने के लिए यह नई पहल शुरू करने जा रहा है। कार्यक्रम के तहत प्राथमिक विद्यालयों में प्रतिदिन 15 मिनट का विशेष पठन सत्र आयोजित किया जाएगा। इस दौरान विद्यार्थी अपनी पसंद की पुस्तकें पढ़ सकेंगे। इसमें किसी प्रकार की परीक्षा या मूल्यांकन नहीं होगा।
जिला एफएलएन समन्वयक रुपांशी हुड्डा ने बताया कि बच्चों को उनकी रुचि के अनुरूप पुस्तकें उपलब्ध कराई जाएंगी। इससे उनमें पढ़ने के प्रति स्वाभाविक रुचि विकसित होगी। इसके लिए सभी 211 विद्यालयों के पुस्तकालयों को सक्रिय किया जाएगा। जिन स्कूलों में पुस्तकालय नहीं हैं वहां कक्षाओं में ही विद्यार्थियों की संख्या के अनुसार पुस्तकें उपलब्ध कराई जाएंगी।
उन्होंने बताया कि कार्यक्रम लागू करने से पहले सेक्टर-2, सेक्टर-3, सेक्टर-4, बोहर, खरावड़ और लाखनमाजरा के राजकीय प्राथमिक विद्यालयों में इसका परीक्षण किया गया था। परीक्षण के सकारात्मक परिणाम मिलने के बाद इसे जिले के सभी प्राथमिक विद्यालयों में लागू करने का निर्णय लिया गया है।
बाक्स
भाषा, समझ और कल्पनाशक्ति बढ़ेगी :
समन्वयक रुपांशी हुड्डा ने बताया कि सभी विद्यालयों में 40 मिनट का जीरो पीरियड लागू किया गया है। इसमें बच्चों की समझ को विकसित और उनकी कमियों को दूर किया जा पीरियड लगाया जा रहा है। 15 मिनट के पठन कार्यक्रम में प्रयास बच्चों की भाषा, समझ और कल्पनाशक्ति को मजबूत करेगा। इस दौरान अक्षर पहचान, शब्द पठन, वाक्य पठन व पढ़कर समझने की क्षमता मजबूत करेंगे।
-
वर्जन :
पुस्तकालय पठन कार्यक्रम में विद्यार्थी प्रतिदिन अपने पाठ्यक्रम के अलावा पसंदीदा किताबें पढ़ेंगे। शिक्षक का मुख्य कार्य बच्चों को पढ़ने के लिए प्रोत्साहित करना है। पढ़ते समय बच्चों को जो शब्द या बातें कठिन लगेगा उन्हें समझाने में टीचर मदद करेंगे। शिक्षक बच्चों को कुछ किताबों या समाचार पत्रों का विकल्प देंगे ताकि वह अपनी ही पसंद से पढ़ने व समझने में सक्षम हो सकें।
- बिजेंद्र हुड्डा, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी।