रोहतक। शहर के रामनगर निवासी मोहित सिक्का से साइबर ठगों ने फर्जी विज्ञापन फेसबुक पर डालकर दिल्ली तकनीकी विवि (डीटीयू) में बीटेक में दाखिले के नाम पर 1.80 लाख रुपये ठग लिए। बाद में पता चला कि फर्जी वेबसाइट व पत्र तैयार करके ठगी की गई है।
इस संबंध में साइबर क्राइम थाने में शुक्रवार को एफआईआर दर्ज की गई है। साइबर क्राइम में इसे फिशिंग कहा जाता है। सावधानी बरतते हुए आम लोग इस तरह की ठगी से बच सकते हैं।
रामनगर निवासी मोहित सिक्का ने बताया कि उन्हें बेटे रिशित का बीटेक में दाखिल कराया था। 23 जून 2026 को उन्होंने फेसबुक पर दाखिला का सिद्धांत कंसल्टेंसी के नाम से विज्ञापन देखा था। इस पर दिए नंबर पर व्हाट्स एप कॉल की तो अज्ञात व्यक्ति ने कहा कि दाखिले के लिए 6 लाख रुपये डोनेशन देना होगा। इसमें 30 प्रतिशत दाखिले के लिए ऑफर लेटर आने के बाद देना है। बाकी दाखिले के बाद राशि ली जाएगी।
उन्होंने सलाहकार की बात पर विश्वास कर लिया। उन्हें दिल्ली तकनीकी विवि में दाखिल का ऑफर लेटर दिया गया। इसके बाद उन्होंने यकीन करके 1.80 लाख रुपये भेज दिए। ऑनलाइन चैटिंग करके उन्हें 23 जुलाई को दिल्ली में मिलने के लिए बुलाया गया।
बाद में कहा कि दिल्ली में प्रदर्शन के कारण अभी दाखिला नहीं हो पा रहा है। इसके बाद संतोषजनक जवाब देना बंद कर दिया तो उन्हें शक हुआ। डीटीयू में जाकर जांच करवाई तो पता चला कि दाखिले का ऑफर लेटर फर्जी है।
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क्या है साइबर फिशिंग
एक ऐसी तकनीक है जिसमें अपराधी खुद को किसी विश्वसनीय संस्था जैसे बैंक, सरकारी एजेंसी या जानी-मानी कंपनी के प्रतिनिधि के रूप में प्रस्तुत करते हैं। वे अक्सर ई-मेल, टेक्स्ट संदेश या फर्जी वेबसाइटों का सहारा लेते हैं। इन संदेशों में वे उपभोक्ताओं को तत्काल कार्रवाई करने के लिए प्रेरित करते हैं। जैसे कि किसी लिंक पर क्लिक करना, कोई फॉर्म भरना या व्यक्तिगत जानकारी साझा करना।
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यूं की जाती है फिशिंग
फिशिंग एक साइबर अपराध है जिसमें धोखेबाज व्यक्तिगत जानकारी चुराते हैं। अपराधी विभिन्न तरीकों से लोगों को निशाना बनाते हैं। वे लुभावने ऑफर या समस्याओं के समाधान का लालच देते हैं। फिशिंग में त्योहारों पर आकर्षक ऑफर वाले संदेश भेजे जाते हैं। इन संदेशों के लिंक पर क्लिक करने से डिवाइस पर मालवेयर इंस्टॉल हो सकता है। उपभोक्ता नकली वेबसाइट पर पहुंच जाते हैं जहां लॉगिन आईडी, पासवर्ड या बैंक विवरण मांगे जाते हैं। अपराधी खुद को ग्राहक सेवा प्रतिनिधि बताकर व्यक्तिगत जानकारी प्राप्त करते हैं। ई-मेल स्पूफिंग में बड़ी कंपनियों या बैंकों जैसे फर्जी ई-मेल बनाए जाते हैं। नौकरी या दाखिले के नाम पर भी धोखाधड़ी होती है। इसमें रजिस्ट्रेशन फीस के बहाने पैसे ऐंठे जाते हैं और निजी जानकारी चुराई जाती है।
फिशिंग से बचाव के उपाय
संदिग्ध ई-मेल और लिंक पर भरोसा न करें। अनजान लिंक पर क्लिक करने से बचें। वेबसाइट की प्रामाणिकता जांचें और सुनिश्चित करें कि वह सुरक्षित (एचटीटीपीएस) हो। बैंक खाता नंबर, क्रेडिट/डेबिट कार्ड विवरण, सीवीवी, पासवर्ड या ओटीपी किसी से साझा न करें। बैंक या विश्वसनीय संस्था ऐसी जानकारी कभी नहीं मांगती। अपने कंप्यूटर और मोबाइल डिवाइस पर एंटी-वायरस सॉफ्टवेयर इंस्टॉल कर उसे अपडेट रखें। मजबूत और अद्वितीय पासवर्ड का प्रयोग करें तथा टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन सक्षम करें। ऑपरेटिंग सिस्टम, ब्राउजर और अन्य सॉफ्टवेयर को नवीनतम संस्करण में अपडेट रखें। जल्दबाजी में कोई भी जानकारी देने से बचें।
वर्जन
फिशिंग साइबर क्राइम का एक गंभीर खतरा है जो किसी को भी अपनी चपेट में ले सकता है। थोड़ी सी सावधानी और जागरूकता से इससे बचा जा सकता है। सुरक्षित रहने के लिए हमेशा सतर्क रहें, किसी भी अनजान स्रोत से आने वाले संदेशों पर आंख मूंदकर भरोसा न करें। डिजिटल साक्षरता और डिजिटल सुरक्षा आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
- गौरव राजपुरोहित, पुलिस अधीक्षक रोहतक