वैश्य संस्था में जिस हंगामे के साथ कर्मचारियों को निकाला गया और हड़ताल शुरू हुई, उससे कहीं ज्यादा बवाल के साथ शुक्रवार को हड़ताल खत्म हुई। 26वें दिन हड़ताल खत्म हुई तो दो जगह मारपीट हुई। विधायक के जनता दरबार में कर्मी और कार्यकर्ता भिड़े तो कॉलेज कैंपस में एक प्रोफेसर और कर्मचारी में मारपीट हो गई।
विधायक के आश्वासन पर आश्वासन से नाराज कर्मचारी इंजीनियरिंग कॉलेज में लौटे ही रहे थे कि कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर के साथ भिड़ गए।
दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर मारपीट का आरोप लगाया। विवाद के बाद हड़ताल में समर्थन कर रहा टीचिंग और नॉन टीचिंग स्टाफ अलग-अलग खेमों में बंट गया और आखिरकार हड़ताल बिना समाधान ही खत्म हो गई।
वैश्य संस्था से निकाले गए कर्मचारियों ने 12 दिसंबर को इंजीनियरिंग कॉलेज परिसर में हड़ताल शुरू की थी। समाधान के लिए तभी से आश्वासन मिल रहे थे। शुक्रवार को कुछ कर्मचारियों का प्रतिनिधिमंडल कॉलेजियम सदस्य अजय गुप्ता के नेतृत्व में विधायक मनीष ग्रोवर से मिलने गेस्ट हाउस पहुंचा।
विधायक के नहीं मिलने पर प्रतिनिधिमंडल जनता कॉलोनी में लगे जनता दरबार में पहुंच गया। विधायक ने जल्दी ही समाधान का आश्वासन दिया। प्रतिनिधि मंडल के साथ मौजूद कर्मचारी आश्वासन पर संतुष्ट नहीं हुए और नारेबाजी करते हुए वापस हड़ताल स्थल पर पहुंच रहे थे।
इंजीनियरिंग कॉलेज कैंपस में घुसते ही चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी सीताराम की असिस्टेंट प्रोफेसर सतेंद्रबल के साथ कहासुनी हो गई। आरोप है कि असिस्टेंट प्रोफेसर ने सीताराम को थप्पड़ मार दिया, जबकि असिस्टेंट प्रोफेसर का कहना है कि कर्मचारियों ने मिलकर उनके साथ मारपीट की।
घटना के बाद टीचिंग और नॉन टीचिंग स्टाफ अलग-अलग खेमे में बंट गए। दोनों पक्षों के बीच विवाद बढ़ गया। पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। टीचिंग स्टाफ प्रधान पंकज गुप्ता और नॉन टीचिंग प्रधान सज्जन कुमार ने कॉलेजियम सदस्य अजय गुप्ता से बातचीत की।
आखिर में निर्णय हुआ कि जो टीचिंग स्टाफ अभी निकाला नहीं गया है वह अपनी ड्यूटी ज्वाइन करेगा, जबकि नॉन टीचिंग अगर हड़ताल जारी रखना चाहता है तो रख सकता है। काफी देर तक चली इस जद्दोजहद के बाद सर्वसम्मति से घोषणा कर हड़ताल खत्म कर दी गई।
कॉलेजियम सदस्य और कर्मचारियों का कहना है कि विधायक की तरफ से उन्हें गुमराह किया गया है। आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला। इस मामले को लेकर अब वे कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।