आखिरकार
एमडीयू को स्थायी वीसी मिल गया। बृहस्पतिवार शाम को प्रोफेसर बीके पूनिया
ने विवि के 13वें कुलपति के तौर पर पदभार संभाल लिया। वे शाम साढ़े छह बजे
एमडीयू पहुंचे और औपचारिक स्वागत के बाद चार्ज ले लिया।
गुरु जंभेश्वर
यूनिवर्सिटी, हिसार के हरियाणा स्कूल ऑफ बिजनेस के डीन और एकेडमिक कॉलेज
स्टाफ के डायरेक्टर प्रोफेसर पूनिया के वीसी बनने संबंधित आदेश बृहस्पतिवार
को राजभवन से जारी किए गए।
हालांकि बुधवार को ही उनके नाम पर मुहर लगा दी
गई थी। आदेश मिलने के साथ ही प्रोफेसर पूनिया हिसार से रिलीव हो गए और
एमडीयू पहुंच गए। दिलचस्प बात यह रही कि ज्वाइनिंग करने आए वीसी प्रोफेसर
पूनिया के आगे पीछे करीब एक दर्जन गाड़ियों का काफिला भी था। गाड़ियों का
काफिला दिल्ली बाईपास से उन्हें लेकर एमडीयू के वीसी सचिवालय पहुंचा। यहां
विवि अधिकारियों, शिक्षकों और कर्मचारियों ने उनका स्वागत किया।
पत्नी ने खिलाया लड्डू, फिर किए हस्ताक्षर
प्रोफेसर
पूनिया अपने पूरे परिवार के साथ एमडीयू पहुंचे। उनके साथ उनकी पत्नी
जीजेयू में असोसिएट प्रोफेसर वंदना पूनिया, दो बेटे वैभव और वत्सल भी थे।
कुलपति की कुर्सी पर बैठने से पहले उन्हें उनकी पत्नी ने लड्डू खिलाया।
उन्होंने सभी से कहा कि मुझे आपका साथ चाहिए। दूर-दूर मत खड़े रहो। हमें
मिलकर काम करना है।
यह है पूनिया की उपलब्धि
जीजेयू में 2009 में पद
ग्रहण करने के बाद एकेडमिक कॉलेज स्टाफ के फाउंडर डायरेक्टर रहे। उनके
कार्यकाल के दौरान बैंगलोर की नेशनल असेसमेंट एंड एक्रीडिएशन काउंसिल
द्वारा एकेडमिक कॉलेज स्टाफ को प्रथम रैंक प्राप्त हुआ।
दिसंबर 2010 से
दिसंबर 2013 के दौरान उन्होंने हरियाणा स्कूल ऑफ बिजनेस के डीन के पद पर भी
काम किया। वे विश्वविद्यालय के कई बॉडीज के मैंबर भी रहे। 2003 में बैंकाक
में हुए ग्लोबल बिजनेस एंड इकोनॉमिक विकास सेमीनार में भी भारत का
प्रतिनिधित्व किया। इनके अतिरिक्त मैक्सिको व सियोल में हुए अंतरराष्ट्रीय
सेमिनार में भी भाग लिया।
13वें कुलपति हैं प्रोफेसर पूनिया
एमडीयू
में अब तक 12 स्थायी कुलपति रहे हैं। इससे पहले एम. एल. बतरा, हरद्वारी
लाल, हरद्वारी लाल, प्रोफेसर रामगोपाल, रिटायर लेफ्टिनेंट जनरल जीसी
अग्रवाल, रिटायर ब्रिगेडियर ओपी चौधरी, विवेक चंद शर्मा, रिटायर लेफ्टिनेंट
जनरल ओपी कौशिक, रिटायर मेजर जनरल भीम सिंह सुहाग, प्रोफेसर आर. एस.
धनखड़, प्रोफेसर आर. पी. हुड्डा, इंजीनियर आर. एस. चहल कुलपति के पद पर
रहे। 28 अप्रैल 2015 के बाद से ही यहां स्थायी कुलपति की नियुक्ति की मांग
की जा रही थी।
चहल के इस्तीफे के बाद से आईएएस सुधीर राजपाल बतौर अस्थायी
कुलपति कार्यभार देख रहे थे।