माई सिटी रिपोर्टर
रोहतक। अतिरिक्त एवं जिला सत्र न्यायाधीश (एएसजे) अनिल कौशिक की कोर्ट ने कहा है कि कोई यह कहकर अदालत में दिया बयान वापस नहीं ले सकता कि वह दबाव में था। इसके लिए उसे साबित करना होगा कि वह किस तरह के दबाव में था। इसी के साथ कोर्ट ने किरायेदार को मकान खाली करने का आदेश दिया।
बचाव पक्ष के वकील ने कोर्ट को बताया कि चिन्योट कॉलोनी निवासी नीलम कोचर ने हनुमान कॉलोनी स्थित 281 वर्ग गज का मकान खरीदा था। इसके आधे हिस्से की रजिस्ट्री 2019 और शेष की 2021 में कराई गई। एक माह बाद नीलम ने उस मकान को मानसिंह को किराये पर दे दिया।
आठ हजार रुपये प्रति माह की दर से 11 माह का किराया देना तय हुआ। आरोप लगा कि 11 माह किराया तो दिया ही नहीं गया, मनमर्जी मकान में बदलाव भी कर दिया गया। 2022 में नीलम ने मकान खाली कराने के लिए अदालत में अर्जी दायर की।
कोर्ट में मानसिंह ने कहा कि वह 31 दिसंबर 2022 तक मकान खाली कर देगा। मकान खाली तब भी नहीं किया तो नीलम ने फिर कोर्ट में अर्जी दायर की। यहां मानसिंह ने दलील दी कि उसके ऊपर उस समय दबाव था। अब वह केस लड़ना चाहता है।
निचली कोर्ट ने मानसिंह की अर्जी खारिज कर दी। इसके खिलाफ उसने सेशन कोर्ट में अपील की। कहा, पूर्व में उसने अदालत में जो बयान दिया था, उस समय वह दबाव में था। पहली रजिस्ट्री कराते वक्त उसने लोन लिया था। यह लोन चुकाकर वह मकान छुड़ाना था।
नीलम कोचर के वकील ने तर्क किया कि पहली रजिस्ट्री के समय लोन था तो दूसरी रजिस्ट्री क्यों करवाई। दूसरा, जो अतिरिक्त कागजात अदालत में पेश किया गया है, उस पर नीलम कोचर के हस्ताक्षर नहीं हैं। ऐसा दस्तावेज मान्य नहीं है। दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने अपील खारिज कर दी।