रेवाड़ी। सत्र न्यायालय जीएस वाधवा ने आरोपी दयानंद की ओर से दायर दूसरी जमानत याचिका को खारिज कर दिया। जमानत आवेदन में आरोपी के वकील ने तर्क दिया कि उसने कोई अपराध नहीं किया और मुकदमे की सुनवाई में समय लगने के कारण उसे हिरासत में रखना अब कोई विशेष उपयोग नहीं है। साथ ही यह भी कहा गया कि आरोपी कभी शिकायतकर्ता के वाहन का चालक नहीं था और शिकायतकर्ता के बयान में पैसे की अदायगी को लेकर विरोधाभास है।
शिकायतकर्ता के वकील ने याचिका का विरोध किया। उनका कहना था कि आरोपी ने अपने सह-अभियुक्त रमेश कुमार के साथ मिलकर शिकायतकर्ता से 16 लाख रुपये की धोखाधड़ी किया। रमेश कुमार ने शिकायतकर्ता के परिचित का रूप धारण कर आरोपी के साथ ठगी में भाग लिया।
फाइल से पता चला कि दयानंद की पहली जमानत याचिका पहले ही अदालत द्वारा खारिज की जा चुकी है। अदालत ने कहा कि आरोपी ने अपराध में सक्रिय भाग लिया और शिकायतकर्ता के साथ मिलीभगत से ठगी की।
अदालत ने स्पष्ट किया कि आरोपी की हिरासत जारी रखना आवश्यक है ताकि न्याय प्रक्रिया पर असर न पड़े और मामले में न्याय सुनिश्चित हो।