देश के सबसे बड़े धावक मिल्खा सिंह का रिकॉर्ड तोड़ने वाले अजायब के धर्मबीर का रियो ओलंपिक का सपना अब खेतों में टूट रहा है। इसी साल चीन में हुई एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में मिल्खा सिंह का रिकार्ड तोड़ा तो रियो ओलंपिक के टिकट की उम्मीद जगी। उस समय कर्ज लेकर चीन तक तो पहुंच गया, लेकिन अब हालात ज्यादा खराब हो गए हैं और रियो ओलंपिक क्वालीफाई के लिए विदेश जाना दूर अब तो प्रैक्टिस तक के लिए रुपये नहीं हैं।
अजायब गांव निवासी श्रद्धानंद पेशे से किसान हैं। जमीन इतनी कि परिवार का पेट-पेट भर सकता है। मुश्किल हालातों में श्रद्धानंद के बेटे धर्मबीर सिंह ने 2001 में दौड़ना शुरू किया और दौड़ता चला गया। धर्मबीर 100 व 200 मीटर दौड़ में अभी तक नेशनल गेम्स में छह गोल्ड, एक सिल्वर और एक कांस्य पदक जीत चुका है।
वहीं कॉमनवेल्थ यूथ गेम्स में गोल्ड जीतने के अलावा स्टाफ चैंपियनशिप श्रीलंका में गोल्ड, जूनियर एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप इंडोनेशिया में सिलवर, एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप चीन में कांस्य जीत चुका है। इस एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में धर्मबीर सिंह ने मिल्खा सिंह का 21.6 सेकेंड का 200 मीटर का रिकॉर्ड 20.7 सेकेंड में तोड़ा था। उसी समय धर्मबीर को रियो ओलंपिक का टिकट मिलने की आस जगी। लेकिन धर्मबीर सिंह का सपना अब खेतों में टूटता दिख रहा है, क्योंकि एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप के लिए लिया गया कर्ज अब प्रैक्टिस के लिए कर्ज लेने की इजाजत नहीं दे रहा है।
धर्मबीर अभी 20.6 सेकेंड में 200 मीटर दौड़ रहा है और उसे क्वालीफाई करने के लिए 20.5 सेकेंड में दौड़ पूरी करनी होगी। लेकिन उसके लिए प्रैक्टिस जरूरी है तो क्वालीफाई मुकाबले में जाना भी होगा। इस सब में गरीबी आड़े आ रही है। धावक का कहना है कि अगर आर्थिक तंगी दूर हो जाए तो वह रियो ओलंपिक का टिकट लेकर देश को मेडल दिलाने का पूरा प्रयास करेगा।