सोनीपत। प्रदेश में पराली जलाने के मामले लगातार सामने आ रहे हैं, लेकिन सोनीपत में किसानों की जागरूकता का असर दिख रहा है। प्रदेश में वीरवार को 11 जिलों में पराली जलाने के 129 मामले सामने आए, जिसमें सोनीपत का नाम नहीं है। जिससे अधिकारियों ने राहत की सांस ली है। सोनीपत से फसल अवशेष जलाने का एक भी मामला सामने नहीं आया है।
फसल अवशेष जलने की घटनाओं पर कृषि विभाग सेटेलाइट के माध्यम से नजर रख रहा है। सेटेलाइट से प्राप्त आंकड़ों से सोनीपत के किसानों को राहत है। इस साल खरीफ सीजन में अब तक सोनीपत जिले से सिर्फ एक ही मामला सामने आया है।
सेटेलाइट रिकॉर्ड के हिसाब से वीरवार को कैथल और करनाल में सबसे ज्यादा पराली जलाने की घटनाएं सामने आई हैं। कैथल में जहां 43 मामले सामने आए, वहीं करनाल में 26 स्थानों पर फसल अवशेष जलाने की जानकारी मिली। इसके अतिरिक्त कुरुक्षेत्र में 19, अंबाला में 15 और जींद में भी फसल अवशेष जलाने की 8 घटनाएं सामने आई हैं। वहीं फरीदाबाद में 7, यमुनानगर में 4, पलवल में 3 घटनाएं सेटेलाइट के माध्यम से पकड़ी गईं।
सोनीपत में लगातार चलाया जा रहा जागरूकता अभियान
किसानों को पराली जलने से रोकने के लिए कृषि विभाग लगातार जागरूक कर रहा है। किसानों को पराली जलाने से होने वाले दुष्प्रभाव, फसल अवशेष प्रबंधन आदि के प्रति जागरूक किया गया। कृषि विज्ञान केंद्र ने जौली और रोहट गांव को गोद भी लिया है। जहां किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के लिए विशेष ट्रेनिंग दी जाएगी।
सोनीपत में चल रहा जागरूकता अभियान
सोनीपत जिले में पराली जलने की घटनाओं को रोकने के लिए लगातार जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। जिसके चलते अब तक सोनीपत में आगजनी की घटनाएं सामने नहीं आई हैं।
डॉ. अनिल सहरावत, कृषि उपनिदेशक, सोनीपत।