जिले के गांवों में मनरेगा के तहत वाकई काम हुए हैं या नहीं, ग्रामीण विकास विभाग इसकी पड़ताल करवाएगा। इसके लिए जिले की 86 ग्राम पंचायतों का सोशल ऑडिट हाल ही में शुरू किया गया है। मुख्यालय की ओर से भेजे गए शेड्यूल के तहत ही रिसोर्स पर्सन सोशल ऑडिट करेंगे।
ग्रामीण विकास विभाग ने जिले के सभी ब्लॉक में रिसोर्स पर्सन चुने थे। इसके लिए गांवों के ही शिक्षित लोगों का चयन किया गया, जिनमें रिटायर्ड अधिकारी, पूर्व फौजी, समाजसेवी या शिक्षित युवा आदि शामिल हैं। इन्हें दो दिन तक विडियो कांफ्रेंस के जरिये प्रशिक्षण दिया गया था। दो-दो लोगों की टीमें बनाई गई हैं, जो शेड्यूल के तहत गांवों में जाएंगी। उससे पहले ये टीमें सभी संबंधित विभागों से रिकॉर्ड लेंगी कि उन्होंने मनरेगा के तहत गांव में कितनी लागत से कौन-कौन से काम करवाए। उसे पूरा करने में कितने मजदूर लगाए गए। रिकॉर्ड लेने के बाद टीमें गांवों में जाकर लोगों को इकट्ठा करेंगी। उन्हें पढ़कर सुनाया जाएगा कि किस विभाग ने गांव में कौन सा काम करवाया। फिर टीमें गांववासियों के साथ मौके पर जाकर मुआयना करेंगी कि काम हुआ है भी या नहीं। इसके बाद गांववासियों के बयान भी दर्ज किए जाएंगे। सभी गांवों का सोशल ऑडिट पूरा होने के बाद ये टीमें अपनी रिपोर्ट मुख्यालय को भेज देंगी, जिले को भी एक प्रति दी जाएगी। लेकिन सोशल ऑडिट की पूरी प्रक्रिया में स्थानीय अधिकारियों और कर्मचारियों का कोई रोल नहीं रहेगा। अगर कोई विभाग रिसोर्स पर्सन को रिकॉर्ड नहीं देता है तो स्थानीय अधिकारी मदद करेंगे।
ब्लॉक -------- ग्राम पंचायतें --- रिसोर्स पर्सन
कलानौर -------- 14 ---------- 4
लाखनमाजरा ------ 8 ----------- 2
महम ------------ 22 ---------- 4
रोहतक ---------- 33 ---------- 6
सांपला ----------- 9 ----------- 2
हाजिरी लगते ही पता लगेगी श्रमिक की लोकेशन
मनरेगा में फर्जीवाड़ा रोकने के मकसद से ग्रामीण विकास ने एक एप तैयार करवाया है। उस एप से अब मजदूरों की हाजिरी लगवाने की प्रक्रिया शुरू की है। इसके लिए सभी सुपरवाइजर और सहायक ब्लॉक पंचायत अधिकारियों को बाकायदा प्रशिक्षण दिया गया है। सुपरवाइजर के मोबाइल में एप डाउनलोड किया गया है। इसमें खास बात यह है कि हाजिरी लगाते ही मजदूर की लोकेशन पता चल जाएगी। मनरेगा के तहत जो विकास कार्य करवाया जा रहा है, उसकी लोकेशन पहले से ही वेबसाइट पर अपलोड है। अब विभाग के चंडीगढ़ मुख्यालय में बैठे अधिकारियों को पता चल सकेगा कि हाजिरी किस जगह से लगाई गई है। अगर वह कार्य की साइट से मैच नहीं करेगा तो फर्जीवाड़ा पकड़ा जा सकेगा।
जिले की 86 ग्राम पंचायतों का सोशल ऑडिट शुरू किया गया है। अगर रिसोर्स पर्सन को किसी विभाग से रिकॉर्ड लेने में दिक्कत आती है तो उनकी मदद की जाएगी। सोशल ऑडिट में अगर कुछ गलत मिलता है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- ब्रह्मप्रकाश अहलावत, सीईओ, जिला परिषद