रोहतक। तीन कृषि विधेयकों के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन के तहत किसानों और अन्य संगठनों ने जिले से गुजरने वाले छह हाईवे करीब छह से सात घंटे तक ठप रखे। इस दौरान मामूली झड़पों के अलावा शांति रही। छह हाईवे पर प्रतिदिन गुजरने वाले लाखों लोगों का आवागमन प्रभावित रहा। कहीं से भी प्रदर्शनकारियों की राहगीरों या पुलिस से टकराव की खबर नहीं है। झज्जर रोड पर मायना, भिवानी रोड पर भाली आनंदपुर, हिसार रोड पर बहु अकबरपुर, जींद रोड पर टिटौली, पानीपत रोड पर ब्राह्मणवास और रोहतक-जींद, भिवानी-गोहाना सड़कों के चौक पर लाखनमाजरा में जाम लगा गया। मोखरा में भी चक्का जाम हुआ, कई जगह लिंक सड़कें भी बंद की गईं। लेकिन दिल्ली और सोनीपत रोड पर चक्का जाम नहीं हुआ, इसलिए दिन भर वाहनों की आवाजाही बहाल रही। सभी जगह जाम की अगुवाई किसान सभा ने की। निर्देश के मुताबिक सभी जगह एंबुलेंस को दूर से देखते ही रास्ता बनाया गया। कोविड वाहनों और मरीजों को भी निकाला गया। पुलिस ने ज्यादातर जगह पहले ही ट्रैफिक डाइवर्ट कर दिया था या रास्ता बंद कर दिया था, इसलिए ट्रैफिक जाम की स्थिति नहीं बनी। आढ़तियों, व्यापारियों और मजदूर संगठनों ने शहर में मार्च निकालना था, लेकिन तालमेल की कमी के चलते ज्यादातर लोग पहुंचे ही नहीं। मजदूरों ने सीटू के झंडे तले रेलवे स्टेशन से आंबेडकर चौक तक मार्च निकाला। किसान सभा के समर्थन में कलाकारों ने कई जगह धरनास्थल पर नुक्कड़ नाटक का मंचन कर पीएम नरेंद्र मोदी और उनकी नीतियों पर कटाक्ष किए।
ब्राह्मणवास - लोकल हो तो हमारे साथ बैठो
रोहतक-पानीपत रोड पर किसानों ने ब्राह्मणवास पर ट्रैक्टर ट्रॉलियां लगा कर रास्ता बंद कर दिया। पुलिस ने मकड़ौली खुर्द फ्लाई ओवर से ही चार पहिया वाहनों को गोहाना रोड की तरफ डाइवर्ट कर दिया था। बाइक वालों को भी बताया जा रहा था कि आगे सड़क बंद है। लेकिन फिर भी लोग जाते रहे। धरनास्थल पर पहुंच कर एक बाइक सवार ने किसानों से कहा कि वह तो लोकल है, उसे जाने दें। किसानों ने जवाब दिया कि अगर लोकल हैं तो हमारे साथ धरने पर बैठो। धरने में शुरुआत में लोग थे, इनेलो नेता धर्मेंद्र और कुछ और किसानों ने विडियो बना कर फेसबुक और वट्सएप पर डाले। आसपास के गांवों के किसानों से अपील की कि धरने पर पहुंचे। जिसके बाद भीड़ काफी बढ़ गई। यहां दो एंबुलेंस आईं, दोनों को देखते ही रास्ता बना दिया गया। एक कोविड ड्यूटी वाहन था, जिसमें मरीज था, उसके लिए भी रास्ता खोला गया। एक क्रूजर में कुछ लोग अंतिम संस्कार में जा रहे थे, उन्हें भी जाने दिया गया। लेकिन किसी दो पहिया वाहन को जाने की इजाजत नहीं दी गई। किसानों ने खुद उन्हें गांवों से होकर जाने का रास्ता भी समझाया। कुछ बाइक सवार दूसरी साइड से जाने की कोशिश कर रहे थे तो दोनों पक्षों के बीच बहस हो गई। वहां खड़े पुलिसकर्मियों ने बाइक सवारों को समझाया। यहां किसानों ब्राह्मणवास-चमारिया लिंक सड़क भी बंद की।
मायना में झज्जर से आ रहे वाहन फंसे
किसान सभा ने झज्जर रोड पर मायना में पुलिस के बैरिकेड और ट्रैक्टर लगा कर सड़क बंद की। रोहतक से जाते समय पुलिस ने मायना चौक से ट्रैफिक सुनारिया की तरफ डाइवर्ट कर दिया था। मायना चौक से किसी भी वाहन को आगे जाने की इजाजत नहीं दी गई थी। जिस कारण इस साइड जाम नहीं लगा। लेकिन झज्जर की तरफ से आने वाले वाहनों को पहले डाइवर्ट नहीं किया गया। जिसके चलते कई वाहन जाम में फंस गए। जिनमें जयपुर से आ रहे लोग भी शामिल थे। यहां भी कई बार एंबुलेंस आई, फौरन रास्ता बना कर उन्हें निकाल दिया गया। किसान सभा के प्रदेश उप प्रधान इंद्रप्रीत सिंह, जिला प्रधान प्रीत सिंह ने किसानों को संबोधित किया। संगठन से जुड़े कलाकारों ने नुक्कड़ नाटक के जरिए पीएम नरेंद्र मोदी पर व्यंग्य किए, जिससे किसानों ने काफी सराहा। मायना में धरना सुबह 11 बजे शुरू हुआ था, तीन बजे खत्म हो गया।
भाली में महिलाएं भी पहुंचीं
भिवानी रोड पर किसानों ने भाली आनंदपुर में चक्का जाम किया। यहां खास बात यह थी कि धरने में बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल थीं। यहां भी किसान सभा का नियंत्रण था, इसलिए एंबुलेंस और इमरजेंसी वाहनों को कोई दिक्कत नहीं आई। बाकी किसी वाहन को नहीं जाने दिया गया। यहां धरना 11 बजे शुरू हुआ और पौने तीन बजे खत्म हो गया। बहु अकबरपुर, लाखनमाजरा और टिटौली में भी धरने पूरी तरह शांतिपूर्ण रहे। सभी जगह सुबह करीब 11 बजे सड़क बंद हुई और तीन से चार बजे के बीच आवाजाही बहाल हो गई।
तालमेल की कमी से बिखरा रोष मार्च
शहर के बाहरी इलाकों में चक्का जाम के साथ शहर में एक रोष मार्च निकालने की भी योजना बनाई गई थी। जिसमें भारतीय किसान यूनियन (अंबावता), आढ़ती एसोसिएशन और व्यापार संगठन के अलावा सीटू से संबंधित मजदूर व अन्य संगठनों ने हिस्सा लेना था। लेकिन भाकियू के प्रदेश प्रधान अनिल नांदल बीमार हो गए। किसान, आढ़ती और व्यापारी नेताओं के बीच तालमेल नहीं बन पाया। जिसके चलते तीनों ही वर्ग रेलवे स्टेशन नहीं पहुंचे, जहां से मार्च शुरू होना था। नांदल ने कहा कि वह किसानों के धरने में लाखनमाजरा चले गए। आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान डिंपल बुधवार ने माना कि रोष मार्च का कार्यक्रम बना था। लेकिन उन्हें किसानों के धरने पर मायना, भाली आनंदपुर और बहु अकबरपुर जाना पड़ा। वहीं, व्यापारी नेता हेमंत बख्शी ने कहा कि रोष मार्च जैसा कोई कार्यक्रम ही नहीं बना था। सीटू के झंडे तले मजदूरों ने स्टेशन से लेकर अंबेदकर चौक तक मार्च निकाला। स्टेशन के बाहर नुक्कड़ नाटक का मंचन भी किया गया।
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करीब चालीस हजार वाहनों का आवागमन थमा
सामान्य दिनों में मकड़ौली टोल से प्रतिदिन औसतन 9 से 11 हजार वाहन गुजरते हैं। वहीं मदीना टोल से प्रतिदिन औसतन 8 से 10 हजार के करीब वाहन गुजरते हैं। इसी तरह झज्जर, जींद और हिसार रोड पर हजारों वाहन गुजरते हैं। ऐसे में करीब चालीस हजार वाहनों का आवागमन थमा रहने का अनुमान है। टोल सीजीएम कर्नल वीरेंद्र शेखावत का कहना है कि किसानों के रोड जाम करने के दौरान टोल से वाहन नहीं गुजरे, लेकिन उससे पहले और बाद में गुजरने वाले वाहनाें की संख्या सामान्य दिनों की तरह ही रही।
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किसान और अन्य संगठनों का चक्का जाम पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा है, कहीं से भी टकराव की कोई खबर नहीं है। जिला प्रशासन ने कानून व्यवस्था की स्थिति बनाए रखने को 19 ड्यूटी मजिस्ट्रेट नियुक्त किए थे। उनके साथ डीएसपी, एसएचओ और पुलिस फोर्स थी। लेकिन प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा।
- राकेश सैनी, एसडीएम रोहतक