फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पीजीआईएमएस के वीसी डॉ. ओपी कालरा व चीफ विजिलेंस ऑफिसर डॉ. कुंदन मित्तल को राहत, सेशन कोर्ट ने खारिज की एफआईआर दर्ज करने की याचिका, इस्तगासा पर होगी सुनवाई

विज्ञापन
session court cancel fir
विज्ञापन
रोहतक। पीजीआईएमएस के वीसी डॉ. ओपी कालरा व विवि के चीफ विजिलेंस आफिसर डॉ कुंदन मित्तल को शुक्रवार को सेशन जज एएस नारंग की अदालत से भी राहत मिली है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता संस्थान के सीनियर प्रोफेसर डॉ. बिजेंद्र ढिल्लो की वीसी व चीफ विजिलेंस आफिसर के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के लिए दाखिल याचिका को खारिज कर दिया है। हालांकि निचली अदालत में वीसी व चीफ विजिलेंस आफिसर के खिलाफ दाखिल इस्तगासा पर सुनवाई जारी रहेगी।
विज्ञापन

डॉ. बिजेंद्र ढिल्लो के वकील पवन जांगड़ा ने बताया था कि डॉ. ढिल्लो ने निचली अदालत में याचिका दायर की थी कि उन्होंने आरटीआई के तहत विवि के फंड के प्रयोग के बारे में जानकारी मांगी थी, जिसके आधार पर उन्होंने स्टेट विजिलेंस से जांच कर कार्रवाई की मांग की थी। स्टेट विजिलेंस ने विवि के चीफ विजिलेंस आफिसर डॉ. कुंदन मित्तल को जांच के आदेश दिए थे। इसी बीच वीसी डॉ. ओपी कालरा ने नेशनल मेडिकल कमीशन के लिए आवेदन किया था, जिसके लिए शर्त है कि आवेदक के खिलाफ कोई जांच नहीं बकाया न हो। डॉ. ढिल्लो का आरोप था कि डॉ. कुंदन मित्तल ने विजिलेंस के आदेश पर जांच जारी रहने के बावजूद वीसी को अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) दे दी। डॉ. ढिल्लो ने जब पीजीआईएमएस पुलिस थाना प्रभारी को शिकायत दी तो थाना प्रभारी ने कार्रवाई नहीं की। ऐसे में ढिल्लो ने जिला अदालत में सीआरपीसी की धारा 156(3) के तहत इस्तगासा दायर किया। अदालत ने इस्तगासा तो स्वीकार कर लिया, लेकिन एफआईआर दर्ज की मांग खारिज कर दी। इस पर ढिल्लो ने सेशन कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल की। इस पर सेशन कोर्ट ने विवि के वीसी, विवि के चीफ विजिलेंस आफिसर व पीजीआईएमस के थाना प्रभारी से जवाब मांगा था। वीसी की तरफ से बार के वरिष्ठ वकील जेके गक्खड़ व डॉ. कुंदन मित्तल की तरफ से पीयूष गक्खड़ पेश हुए। बहस के बाद शुक्रवार को अदालत ने एफआईआर दर्ज करने की पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी।
वीसी के वकील बोले, ढिल्लो रखते हैं व्यक्तिगत दुर्भावना
अदालत में बहस के दौरान कोर्ट को बताया गया कि याचिकाकर्ता के खिलाफ विभागीय जांच करवाई गई थी। इस कारण याचिकाकर्ता डॉ. बिजेंद्र ढिल्लो वीसी डॉ. ओपी कालरा से व्यक्तिगत दुर्भावना रखते हैं। इस कारण इस तरह के आरोप लगाए गए हैं। अदालत ने बचाव पक्ष के तर्क को माना और एफआईआर की डिमांड खारिज कर दी।
विज्ञापन

-जेके गक्खड़, वकील वीसी डॉ. ओपी कालरा, पीजीआईएमएस
विजिलेंस ने तथ्य जुुटाने के लिए कहा था, शिकायत या एफआईआर दर्ज नहीं की
याचिकाकर्ता का आरोप था कि जब वीसी डॉ ओपी कालरा ने नेशनल मेडिकल कमीशन के लिए आवेदन किया तो चीफ विजिलेंस आफिसर डॉ कुंदन मित्तल ने उनको एनओसी दे दी। जबकि नियमों के तहत अगर किसी के खिलाफ जांच चल रही हो तो एनओसी नहीं दी जा सकती। इस पर कोर्ट को बताया गया कि स्टेट विजिलेंस ने केवल विवि के चीफ विजिलेंस आफिसर को आरोपों को लेकर तथ्य जुटाने के लिए कहा था। किसी तरह की एफआईआर या शिकायत दर्ज नहीं हुई थी। कोर्ट ने बचाव पक्ष के तर्क को मानकर याचिका खारिज की है।
-पीयूष गक्खड़, वकील चीफ विजिलेंस आफिसर डॉ. कुंदन मित्तल, पीजीआईएमएस
अदालत ने पीजीआईएमएस के वीसी व चीफ विजिलेंस आफिसर के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की याचिका खारिज कर दी है, लेकिन निचली अदालत में इस्तगासा पर सुनवाई जारी रहेगी। अभी याचिका खारिज होने की सूचना मिली है, लेकिन सेशन कोर्ट का विस्तृत आदेश नहीं मिला है।
विज्ञापन

-पवन जांगड़ा, वकील याचिकाकर्ता डॉ. बिजेंद्र ढिल्लो, पीजीआईएमएस
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें