बरसों बाद भाई को देख जेल में राखी बांधने पहुंची बहनों के आंसू निकल पड़े। बहन के स्नेह को देखकर कैदी भाइयों के आंखों भी नम हो गईं। बहनों ने राखी बांधने के बाद भाइयों को भविष्य में अपराध नहीं करने की शपथ दिलाई। उन्होंने कहा कि भगवान करे अगला रक्षाबंधन घर पर मनाया जाए। हमें कभी जेल की तरफ न आना पड़े। इस पर कैदियों ने बहन के आंसू पोंछते हुए वचन दिया कि अब वह कभी भूलकर भी अपराध नहीं करेंगे। यह नजारा शनिवार को जिला जेल परिसर में देखने को मिला। जेल का बाहरी परिसर बहनों से भरा पड़ा था। मुख्य मार्ग से जेल तक बहनें ही सड़क पर नजर आ रही थी।
आंखें निहारती रही बहनों की राह
सालभर बाद बहन से मिलने की आस में बंदी भाइयों की आंखें इंतजार में निहारती रहीं। जैसे ही बहन पर उनकी नजर पड़ी, मायूस चेहरे खिल उठे। वहीं दूसरी ओर, बहनें सुबह से ही जेल पहुंच गईं और गेट पर लाइन लगाकर घंटों अपनी बारी का इंतजार करती रहीं। भूखे-प्यासे घंटों लाइन में लगे रहने के बाद भी उनके चेहरों पर खुशी झलकती रही।
कड़ी जांच से गुजरना पड़ा
भाइयों को रक्षा सूत्र बांधने पहुंची बहनों को कड़ी सुरक्षा जांच के दायरे से होकर गुजरना पड़ा। वे अपने भाइयों की पसंद का पकवान लेकर गईं थीं, लेकिन जेल गेट से उन्हें पकवान अंदर नहीं ले जाने दिया गया। केवल कुछ मिठाइयां ही कैदी भाइयों को अंदर ले जाने की अनुमति दी गई। वह भी पूरी जांच पड़ताल के बाद। मगर बहनों को पकवान नहीं ले जाने का कोई अफ सोस नहीं था। उनका कहना था कि हमारे भाई को राखी बांधने दिया जा रहा है, यही काफ ी है।
सुरक्षा संभालने उतरा अतिरिक्त अमला
जेल अधीक्षक दयानंद मंडोला ने बताया कि सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जिला पुलिस की ओर से 50 अतिरिक्त पुलिस कर्मचारी जेल परिसर में तैनात किए गए थे। इतना ही नहीं, करीब 50 एकड़ में फैले जेल परिसर में बैरकों से कैदियों को लाने के लिए दो बाइक और चार साइकिलों का प्रबंध भी किया था। ताकि कैदी भाइयों को जल्दी गेट तक लाया जा सके। वर्तमान में जिला जेल में करीब 1472 बंदी हैं।
नौ घंटे लंबा चला रक्षाबंधन
जेल परिसर में अपने भाइयों को राखी बांधने के लिए बहनों की आवाजाही नौ घंटे तक रही। बहनों ने सुबह आठ से शाम करीब पांच बजे तक बंदी भाइयों को राखियां बांधी। जेल प्रशासन की ओर से एक बार में 15 से 20 कैदियों के समूह को राखी बांधने के लिए भेजा जाता था।, ताकि व्यवस्था बनी रहे।
बहनों से बातचीत-
कई साल लगे यहां तक आने में : धर्मों
पंजाब के संगरूर की रहने वाली 50 वर्षीय धर्मों ने बताया कि उसे पांच-छह साल लग गए अपने भाई धर्मबीर की कलाई पर राखी बांधने में। रोहतक आने के लिए किराये के रुपये नहीं होने के कारण धर्मों कई साल से भाई से मिलने नहीं आ सक ी। इस बार जैसे-तैसे करके वह भाई को राखी बांधने पहुंची। धर्मबीर हत्या के मामले में रोहतक जेल में बंद है।
दो साल से लगातार जेल में मन रहा रक्षाबंधन : अंग्रेजो
गोहाना निवासी अंग्रेेजो रोहतक में बंद भाई को राखी बांधने के लिए पहुंची। उसने बताया कि पिछले दो साल से लगातार उसे अपने भाई की कलाई पर राखी बांधने के लिए जेल आना पड़ता है। कई बार तो ससुराल पक्ष की नाराजगी भी झेलनी पड़ती है।