रोहतक। संघर्ष, मेहनत और आत्मविश्वास की मिसाल बनीं कीर्ति चुघ आज न केवल बच्चों के मानसिक विकास पर काम कर रही हैं बल्कि 500 से अधिक महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाकर समाज में नई पहचान दे रही हैं। कहा, उन्होंने अपने सपने को पूरा करने के लिए अपनी सोने की चेन तक बेचनी पड़ी जिससे उन्होंने पहली किस्त भरी। प्रशिक्षण लेकर 35 महिलाएं घर से फ्रेंचाइजी चला रही हैं।
कीर्ति चुघ ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2015-16 में अबैकस और वैदिक मैथ्स की ट्रेनिंग ली और शुरुआत में एक फ्रेंचाइजी मॉडल के तहत काम किया। करीब छह साल तक उन्होंने इस क्षेत्र में काम करते हुए अनुभव हासिल किया लेकिन कड़ी मेहनत के बावजूद उन्हें अपेक्षित पहचान नहीं मिल पाई।
उन्होंने करीब 1.75 लाख रुपये तक निवेश किया जिसे किस्तों में चुकाया। उन्होंने अपनी नवकीर्ति कंपनी शुरू की। उनके संस्थान की शाखाएं झज्जर, द्वारका, रोहतक और करनाल में संचालित हो रही हैं। अबैकस विषय पर उनकी एक पुस्तक भी लॉन्च की जाएगी।
मार्च 2020 में कोविड के दौरान उन्होंने देखा कि कई महिलाएं घरेलू परिस्थितियों के कारण पीछे रह रही हैं। इसी समय उन्होंने ठान लिया कि अब वे खुद का प्लेटफॉर्म बनाकर महिलाओं को आगे बढ़ने का मौका देंगी। संवाद
फ्री ट्रेनिंग और फ्रेंचाइजी की सुविधा
कीर्ति चुघ ने बताया कि उनका उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा महिलाओं को आगे बढ़ाना है इसलिए जो महिलाएं फीस देने में सक्षम होती हैं, उनसे 15 से 20 हजार रुपये तक लिए जाते हैं और जरूरतमंद महिलाओं को फ्री ट्रेनिंग और फ्रेंचाइजी दी जाती है। कीर्ति चुघ ने अपने बेटे अर्नव, तृप्ति बहन और नरेश कुमार पापा का विशेष आभार जताते हुए कहा कि उनके सहयोग से ही वह इस मुकाम तक पहुंच सकीं।
हर साल 2000 बच्चों को प्रशिक्षण
वे हर साल करीब 1500 से 2000 बच्चों को प्रशिक्षण देती हैं। अबैकस, वैदिक मैथ्स, हैंडराइटिंग और कैलीग्राफी के माध्यम से बच्चों की कंसंट्रेशन, मेमोरी पावर और कैलकुलेशन स्किल्स को विकसित किया जाता है।