रोहतक। आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने के लिए स्वावलंबन जरूरी है। इसी स्वावलंबन के लिए रोहतक की रितु ने मिट्टी में स्वरोजगार तलाशा है। स्वदेशी को बढ़ावा देने के लिए रितु ने नौकरी नहीं की। अब मिट्टी के दीये व अन्य उत्पाद बनाकर आत्मनिर्भर हो रही हैं।
शहर के शौरा कोठी क्षेत्र में रहने वाली रितु अब दूसरी महिलाओं को भी जागरूक कर रही हैं। वे पिछले 15 साल से इसी काम में लगी हैं और हर महीने पांच से सात हजार रुपये की आय कर रही हैं। रितु बताती हैं कि दीपावली से तीन महीने पहले ही वे दीये बनाने कार्य शुरू कर देती हैं। दीपावली से पहले यह कार्य और तेज हो जाता है।
इन आकर्षक डिजाइन के हैं दीये
सामान्य छोटे दीयों के अलावा वे डिजाइन वाले दीये भी बनाती हैं। इस कार्य में परिवार के सभी सदस्यों का सहयोग रहता है। वे मिट्टी की दीयों वाली मीनार, पेड़, मंदिर, कलश, नारियल, फूल आदि अनेक आकर्षक डिजाइनों के दीये बनाती हैं। उनके पति चमन ने बताया कि दीये बनाने के लिए मिट्टी शहर में उपलब्ध नहीं है। इसके लिए निडाना, डोभ, मदीना, बालंद व काहनौर आदि अलग अलग गांवों से मिट्टी मंगाते हैं।
नवरात्र, करवाचौथ व दीपावली आदि पर्वों के अवसर पर वह शहर में स्टाल लगाती हैं। चमन का कहना है कि दीये होलसेल में भी बेचते हैं। उनके बनाए हुए दीये रोहतक के अलावा दिल्ली एनसीआर, महम, जींद व गोहाना आदि स्थानों पर घर आंगन को जगमग करेंगे।