‘धीया दा सत्कार करो, पुत्रा वांगू प्यार करो...’। लोहड़ी का त्योहार और
उस पर घर में नए मेहमान का स्वागत। कहीं नई नवेली दुल्हन तो कहीं घर में नए
मेहमान की पहली लोहड़ी मनाई गई। शाम होते ही पूरा शहर लोहड़ी के रंग में
रंगा नजर आया। किसी ने घर तो किसी ने लॉन और धर्मशाला में लोहड़ी का जश्न
मनाया।
खासतौर से पंजाबी समुदाय ने लोहड़ी के दिन को यादगार बनाने के लिए
विशेष व्यवस्थाएं की। लोहड़ी के दिन बरसों पुरानी परंपराओं का बदला स्वरूप
भी देखने को मिला। ढोल और डीजे की धुन पर शहर में जगह-जगह धीया दी लोहड़ी
भी मनाई गई।
मंदिरों, गुरुद्वारों और गुरु घरों में बुधवार को सुबह ही
संतों का आशीर्वाद लेने का दौर शुरू हो गया। शहर में चारों तरफ लोहड़ी पर्व
की धूम रही। फिर, शाम होते ही लोहड़ी का जश्न शुरू हुआ। सुंदरिए-मुंदरिए
होय... जैसे लोकगीतों गाकर लोगों ने बेटियों के साथ बेटों और नवविवाहित
जोड़ों की पहली लोहड़ी मनाई। यह सिलसिला देर रात तक चला। रात के समय लोगों
ने आग जलाकर मूंगफली, रेवड़ी, फूलों के साथ पूजा की और पंजाबी लोकगीतों पर
गिद्दा और भंगड़ा किया।
प्रशासन और सामाजिक संस्थाओं ने मनाई धीया दी लोहड़ी
गांधी
नगर स्थित महिला आश्रम में बने सीडीपीओ कार्यालय में जिला महिला एवं बाल
कल्याण विभाग ने धीया दी पहली लोहड़ी मनाई। वहीं, सामाजिक संस्थाओं ने
भिवानी चुंगी पर बेटी की पहली लोहड़ी मनाई। महिला आश्रम में बेटियों के लिए
मनाए गए लोहड़ी उत्सव में बतौर मुख्यातिथि सीएमओ शिवकुमार पहुंचे।
उन्होंने न केवल बेटियों के परिजनों को प्रेरित करते हुए लोहड़ी मनाई,
बल्कि ढोलक की थाप पर जश्न भी मनाया।
इस दौरान गांधी नगर की कीर्तन मंडली
ने बल्ले-बल्ले लोहड़ी का दिन आया, सब नूं बधाई और आज लोहड़ी है ओ सावरे...
गीतों से पूरा परिसर गूंज उठा। इस मौके पर जिला महिला एवं बाल कल्याण
अधिकारी स्नेहलता और सीएमओ शिवकुमार ने एक और दो लड़कियों के बाद नसबंदी
कराने वाली महिलाओं को सम्मानित किया।
इन्होंने मनाई बेटियों की पहली लोहड़ी
मेरी
20 अक्तूबर को दूसरी बेटी हुई है। इससे पहले भी एक लड़की है। मेरी ससुराल
में बेटियों और बेटों में फर्क नहीं समझते हैं। पहली बेटी की भी लोहड़ी
धूमधाम से मनाई गई थी। दूसरी बेटी की लोहड़ी भी पूरी तैयारी के साथ मनाई
है।
- मीनू और दयावती (सास)।