फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बैंक कैशलेस: घर में गैस खत्म जेब में नोट, रोड पर बैठे लोग

Wed, 07 Dec 2016 02:02 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
विज्ञापन
50 फीसदी बैंक बांट रहे कैश, उनमें भी डेढ़ घंटे में ही कैश खत्म होने पर लोगों में रोष - फोटो : amar ujala
विज्ञापन
500 और 1000 के पुराने नोटबंदी के 29वें दिन भी हालात जस के तस है। पेंशन, वेतन निकालने के अलावा अन्य लोगों को दिन भर बैंकों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। जिले के ज्यादातर बैंक कैशलेस है और जिन बैंकों में पैसा है भी, वह एक से दो घंटे में खत्म हो जा रहा है। मंगलवार को बैंकों में कैश न होने से कई जगह लोगों में रोष देखने को मिला। कहीं लोगों ने गार्ड से गुस्सा जाहिर किया तो कहीं नोट के लिए रोड पर बैठ गए। लोगों का कहना था कि कैश न होने की वजह से घरों में हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। न गैस है और न कैश। हालांकि जाम लगाने के बाद भी लोगों को महज आश्वासन से ही काम चलाना पड़ा।
विज्ञापन


 मंगलवार को भी शहर के 50 फीसदी बैंक डेढ़ घंटे में ही कैशलेस हो गए। वहीं कुछ बैंकों में एक हफ्ते से कैश नहीं पहुंचा है। एटीएम में भी कैश न होने से लोगों की भीड़ बैंकों की तरफ बढ़ रही है। पेंशन लेने के लिए बुजुर्ग की कतार भी अब बैंकों में बढ़ रही है। दिन भर बैंकों में कतार में लगे रहने के बावजूद बुजुर्गों को खाली हाथ ही लौटने पड़ रहे हैं। ऐसे में बैंक अधिकारियों को भी गुस्साए लोगों का सामना करना पड़ रहा है।

भालौठ पीएनबी ने नहीं दिया कैश तो ग्रामीण सड़क पर

भालौठ गांव स्थित पीएनबी बैंक के प्रबंधक ने जब ग्रामीणों को कैश खत्म होने की जानकारी दी ग्रामीणों सड़क पर उतर आए। सुबह से कतार में लगे लोगों को जब बैंक प्रबंधक ने दोपहर तीन बजे कैश खत्म होने की जानकारी दी तो लोग गुस्सा गए। लोगों ने सड़क पर बैठ कर जाम लगा दिया। करीब 20 मिनट तक यातायात बाधित रहा। सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचे सदर थाने के एसएचओ विजय दहिया ने ग्रामीणों को समझाया। इस दौरान ग्रामीणों ने अपनी पीड़ा बताई और एसएचओ ने बुधवार को कैश दिए जाने का आश्वासन दिया।
विज्ञापन

 
पांच दिन से टोकन का इंतजार, कैश दूर की बात

वे पिछले पांच दिनों से ओबीसी से पैसे निकलवाने के लिए लगातार आ रही है। यहां से कैश मिलना तो दूर की बात है, टोकन का इंतजार ही खत्म नहीं हो रहा है। बच्चों की 15 दिसंबर से पहले फीस भरनी है। स्कूल संचालक पुराने नोट नहीं ले रहे हैं। इस वजह से ज्यादा टेंशन है।
- ललित प्रिया, गोहाना अड्डा।

बेटी के साथ रोजाना आना मुश्किल

ओबीसी में पिछले सप्ताह से कैश ही नहीं आया है। वे लगातार बैंक में आ रही हैं। पहले तो कभी एटीएम कार्ड और चैक बुक की जरूरत नहीं पड़ी, लेकिन अब चाहिए। इसके लिए भी छह दिन से बैंक के चक्कर काट रही हूं। रोजाना दो साल की बेटी के साथ आना मुश्किल होता है, लेकिन बैंक कर्मी उनकी इस परेशानी को नहीं समझते हैं।
- अर्चना, दुर्गा कालोनी।

आंख में दिक्कत, चाहिए दवाई पर पैसे नहीं
मेरी आंख में दिक्कत है। इसकी दवाई खरीदने के लिए ही मेरे पास पैसे नहीं हैं। पिछले चार दिनों से बैंक में आ रहे हैं। हर बार बैंक कैश नहीं होने की बात कहता है। अगर यह बात बैंक प्रबंधक पहले बता दे तो उन्हें तीन घंटे लाइन मेें इंतजार ही न करना पड़े। लेकिन ऐसा कभी नहीं होता है। वे इंतजार करते हैं और चले जाते हैं।
- सोमनाथ, प्रेम नगर।

नंबर आते ही कैश हो जाता है खत्म
हर रोज उम्मीद लेकर आते हैं कि पैसे लेकर ही घर जाएंगे। पर जब तक मेरा नंबर आता है, बैंक में कैश ही खत्म हो जाता है। मंगलवार को भी दोपहर एक बजे तक टोकन नहीं मिला। पिछले ढाई घंटे से इंतजार कर रहा हूं। ऐसा मैं रोज करता हूं और खाली हाथ घर चला जाता हूं।
- जोगेंद्र, विशाल नगर।

देंगे 4 हजार, कर्मचारियों को कैसे दूं वेतन
कर्मचारियों को करीब 25 हजार वेतन देना है। इसके लिए तीन दिन से लगातार बैंक आ रहा हूं। कभी बैंक में कैश नहीं होता है तो कभी चार व छह हजार रुपये मिलते हैं। अब मैं अपना व्यापार संभालूं या वेतन का इंतजाम करने के लिए रोजाना लाइन में खड़ा रहूं। इसकी सबसे ज्यादा परेशानी है।
- सूरज चिन्योट कॉलोनी।

रोटी खाने के पड़े लाले, गैस लेने के पैसे नहीं
मेरे पैरों में काफी दर्द रहता है। कुछ कदम भी चलना मुश्किल है, लेकिन अब रोटी खाने के लाले पड़ गए हैं। घर में रसोई गैस खत्म है। जिसे खरीदने के लिए पैसे नहीं है। इसलिए पिछले तीन दिन से बैंक में आ रही हूं। बैंक कर्मी पैसा खत्म होने की बात कहते हैं। घर में कोई कमाने वाला भी नहीं है। ऐसे में उधार लेकर ही काम चल रहा है।
विज्ञापन

- शकुंतला, रामलीला पड़ाव।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें