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95 फीसदी एटीएम बंद, लोगों की उम्मीदों पर फिरा पानी

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दो दिन की छुट्टी के बाद खुले बैंक में लंबी कतारें, लोगों को नहीं मिली राहत - फोटो : amar ujala
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महीने का आखिरी सप्ताह चल रहा है। जयवीर को अपने बच्चे की स्कूल की फीस जमा करनी है। पिछले सप्ताह शुक्रवार को वह लाइन में लगे थे, लेकिन उनका नंबर आने से पहले ही एटीएम में कैश खत्म हो गया। मन मारकर वह घर चले गए। अगले दिन शनिवार और फिर रविवार को बैंक में छुट्टी रही। एटीएम में ज्यादा भीड़ होने के कारण जयवीर की लाइन में लगने की हिम्मत नहीं हुई। सोमवार को वह काम खत्म करके घर लौटे तो बेटे का उतरा चेहरा देखकर परेशान हो गए। पत्नी ने बताया कि स्कूल ने नोटिस भेजा है कि अगर 30 नवंबर तक फीस नहीं जमा हुई तो नाम काट देंगे। इतना सुनते ही जयवीर एटीएम की ओर लपके। लेकिन जहां भी गए एटीएम बंद मिला। यदि कोई चल भी रहा था तो लंबी लाइन थी। निराश होकर खाली हाथ घर लौट आए। बेटे का नाम कटने से बचाना जयवीर के लिए बड़ी चुनौती हो गई है।
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यह कहानी अकेले जयवीर की नहीं है, बल्कि ऐसे कई लोग हैं जो रोजाना लाइन में लगते हैं और जब तक नंबर आता है एटीएम से पैसे खत्म हो जाते हैं। निराश होकर घर लौटते हैं और अगले दिन फिर लाइन में लग जाते हैं। किसी को पैसे मिल जाते हैं किसी को खाली हाथ लौटना पड़ता है। नोटबंदी के 20वें दिन भी अधिकतर की यही कहानी रही। पैसे नहीं मिलने और लाइन में लगने की वजह से जितना काम का नुकसान होता है उससे कहीं ज्यादा समय का नुकसान होता है। बैंकों में रोजाना लग रही भीड़ को खत्म करने के लिए सरकार ने पुराने नोट बदलना बंद तो कर दिए, लेकिन भीड़ वैसी की वैसी ही है। सोमवार को दो दिन की छुट्टी के बाद बैंक खुले। पैसे जमा कराने और निकालने के लिए लोगों की लंबी कतारें बैंकों के बाहर और अंदर देखी र्गइं। हालांकि, लंबी कतारें टोकन लेने के लिए ज्यादा थीं। अधिकतर बैंकों में दोपहर से पहले ही कैश खत्म हो गया। शाम तक पूरे शहर में 95 फीसदी से ज्यादा एटीएम बंद रहे, लेकिन कैश वैन आने की उम्मीद में लोग एटीएम की कतार से नहीं हटे। दो घंटे तक इंतजार करने के बाद जब उम्मीदें टूटने लगी तो अधिकतर लोग चले गए। पीएनबी ने शाम को अपने कुछ एटीएम में रुपये डाले तो रात तक लोग पैसे निकालने में लगे रहे।
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