प्रदेश में खिलाड़ियों को स्पीड देने के लिए स्पीड योजना बनाई गई, लेकिन इससे खिलाड़ियों को गति नहीं मिल रही है। हालत यह है कि राज्य के पांच हजार खिलाड़ी स्पीड योजना के तहत मिलने वाली स्कालरशिप के लिए पांच महीने से तरस रहे हैं। खिलाड़ियों के लिए जारी ग्रांट को अधिकारी दबाकर बैठ गये हैं। परेशान खिलाड़ी स्कालरशिप नहीं मिलने से प्रेक्टिस भी नहीं कर पा रहे हैं। अधिकारी जल्द ही स्कालरशिप मिलने का दावा तो करते हैं, लेकिन देते नहीं हैं।
प्रदेश में सरकार बदलने के बाद स्पैट योजना का नाम बदलकर स्पीड (स्पोर्ट्स एंड फिजिकल एक्सरसाइज इवेल्यूवेशन एंड डेवलपमेंट) किया गया था। इसके सहारे खिलाड़ियों की प्रतिभा निखरती है, क्योंकि उनको सरकार से हर महीने स्कालरशिप के रूप में मदद मिलती है। इस योजना में टेस्ट पास करने वाले उन खिलाड़ियों को शामिल जाता है जो कॅरियर की शुरूआत करते हैं। योजना के तहत चयनित होने वाले खिलाड़ियों को अंडर-14 में रहने पर 1400 रुपये प्रतिमाह तो इससे ज्यादा उम्र वालों को 2000 रुपये प्रति माह दिये जाते हैं। यह रुपये खिलाड़ियों के खाते में पहुंचते हैं। इससे खिलाड़ी अपनी खुराक व अन्य जरूरत को पूरा करते हैं। स्पीड योजना में प्रदेश के लगभग पांच हजार खिलाड़ी शामिल हैं। लेकिन खिलाड़ियों को पांच महीने से रुपये नहीं मिल रहे हैं। पहले अधिकारी कहते थे कि सरकार की ओर से ग्रांट नहीं मिली है, लेकिन अब ग्रांट जारी होने के बाद भी खिलाड़ियों के खाते में पैसे नहीं पहुंच रहे हैं। खिलाड़ियों के परिवार वाले भी कई बार अधिकारियों से बात कर चुके हैं, लेकिन रुपये जारी नहीं किए जा रहे हैं। इस बारे में भसाना के राहुल शर्मा कहते हैं कि उनके परिवार के कई बच्चे स्पीड योजना के तहत प्रेक्टिस करते हैं। उनको स्कालरशिप नहीं मिलने से खेल पर असर पड़ रहा है। इसलिए जल्द ही स्कालरशिप जारी कराने की मांग की गई है।