ताबड़तोड़ छापामारी और डॉक्टरों को फटकार लगाने के लिए पहचाने जाने वाले स्वास्थ्य मंत्री हेल्थ विवि के 8वें स्थापना दिवस पर बृहस्पतिवार को यहां पहुंचे तो बदले-बदले नजर आए। कड़ी सुरक्षा घेरे में पीजीआई पहुंचे मंत्री ने इस बार न तो मरीजों का दर्द जाना और न ही व्यवस्थाओं की पड़ताल की। हां, इस बार उन्होंने डॉक्टरों का मर्ज जरूर समझा और दिल खोलकर कहा कि सरकारी अस्पतालों में सुविधाओं की भारी कमी है। ऐसे माहौल में डॉक्टरों के लिए इलाज करना भी मुश्किल है।
नए ऑडिटोरियम में मंत्री अनिल विज ने पहली बार मंच से पीजीआई के अफसरों और डॉक्टरों की तारीफ भी की। कहा कि सरकार का प्रयास है कि प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर मशीनरी से लैस हों। इसके लिए 64 करोड़ रुपये का बजट भी पास किया गया है। उन्होंने कहा कि पीजीआई पिछले 50-52 सालों से डॉक्टर तैयार कर रहा है। इसका लाभ प्रदेश व आसपास के राज्यों को मिल रहा है। वीसी डॉ. ओ. पी. कालरा की ओर से पहली बार वार्षिक रिपोर्ट पेश की गई है। अब से पहले संस्थान भ्रष्टाचार के मकड़जाल में फंसा हुआ था। अभी संस्थान देश के बेहतरीन 25 संस्थानों में आया है, जल्द ही इसे टॉपर में शुमार कराया जाएगा।
बगैर सुविधा कैसे काम करें डॉक्टर
मंत्री ने कहा कि गर्मी में डॉक्टर 7000 की ओपीडी कैसे निपटते होंगे, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है। प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में शिकायतें मिलती हैं कि उनके यहां मूल संसाधनों की कमी है। इसके लिए सभी जिलों के सिविल सर्जनों से उनकी जरूरतों की लिस्ट मांगी। लिस्ट में आया कि सभी को 64 करोड़ रुपये का सामान चाहिए। इसे हमने मंजूर कर दिया। मरीजों का पंजीकरण ऑनलाइन होगा, इससे मरीज का रिकार्ड हरियाणा के सभी सरकारी अस्पतालों में देखा जा सकेगा। हमारा प्रयास है कि 100 फीसदी डिलीवरी सरकारी व निजी अस्पताल में हो, जबकि अभी आंकड़ा 87 फीसदी पर पहुंचा है।
एसएमएस से मिलेगी जांच रिपोर्ट
अब नवजातों केे टीकाकरण संबंधी जानकारी और मरीजों की जांच रिपोर्ट उनके मोबाइल पर एसएमएस के जरिए मिलेगी। एमएलआर व पोस्टमार्टम रिपोर्ट को ऑनलाइन कर दिया गया है। अब टेंडर ऑनलाइन होते हैं। मंत्री ने कहा कि हमारा दुर्भाग्य है कि आजादी के 68 साल में शिक्षा और स्वास्थ्य पर खरबों रुपया खर्च हुआ। इसके बावजूद कोई गरीब आदमी भी सरकारी स्कूल में अपने बच्चे को शिक्षा और सरकारी अस्पताल में इलाज नहीं कराना चाहता। । पिछली सरकार ने इन दोनों बातों की ओर ध्यान नहीं दिया। अभी बहुत कुछ सुधारना है।
मंत्री ने बताया सरकारी अस्पतालों का हाल
मंत्री ने बताया कि प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में ये हालात हैं कि यदि कोई मरीज का हाल जानने जाए तो वह भी बीमार हो जाए। कई सरकारी अस्पतालों में टूटा पंखा, टूटी मेज, हिलती कुर्सी, 30 साल पुराना बीपी आपरेटर और डॉक्टर के गले में लटका एक स्टेथोस्कोप ही मिलता है। इसको लेकर कोई डॉक्टर कैसे काम कर सकता है। सीटी स्कैन, एमआरआई तो दूर सही से एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड भी नहीं हो पाता। हम हर जिला अस्पताल में इनकी व्यवस्था करवा रहे हैं। सरकारी अस्पताल में जब एक डॉक्टर से पूछा कि बगैर सुविधा यहां क्या करते हो, तो उन्होंने बताया कि वे रेफर करते हैं। उनके पास कुछ दवा और सिरिंज ही हैं। मंत्री ने दावा किया कि मेरे पास स्वास्थ्य मंत्रालय आते ही 15 फीसदी ओपीडी और 13.8 इनडोर मरीज बढे़ हैं। लेकिन अभी अस्पतालों में मरीजों की संख्या में बेड काफी कम हैं। 100 बेड पर 250 मरीज दाखिल हो रहे हैं। हम सुधार का प्रयास कर रहे हैं।
रोहतक में बगैर एसी का रिवाज है क्या
एचएम ने कहा कि रोहतक में बगैर एसी भवन बनाने का रिवाज है क्या? पहले सीआरएस ओपीडी को बगैर एसी बना दिया, इसे भाजपा सरकार ने सेंट्रल एसी कराया। ट्रामा सेंटर, मदर चाइल्ड अस्पताल आदि सब बगैर सेंट्रल एसी हैं। ऐसे में क्या मरीज ठीक होगा और क्या डॉक्टर उपचार करेगा।
मंत्री ने गिनवाए ये प्रयास
- हम अपने सभी अस्पतालों को अपग्रेड करने की ओर अग्रसर हैं। प्रयास है कि अस्पतालों को एनएबीएच से मान्यता मिले।
- हर जिले में स्पेशलिस्ट की कमी है। इसलिए फिलहाल पंचकूला, भिवानी और जींद में सरकारी मेडिकल कॉलेज खोलने की योजना है। झज्जर और बहादुरगढ़ में निजी मेडिकल कॉलेज खोलने की ओर अग्रसर हैं। सिरसा में डेरा सच्चा सौदा के संचालक गुरमीत राम रहीम से भी हमने बात की है कि वे समाज सेवा के लिए मेडिकल कॉलेज खोलें। उनकी जो मदद सरकार की ओर से होगी हम करेंगे।
- डब्ल्यूएचओ के अनुसार 1000 लोगों पर एक डॉक्टर होना चाहिए, जबकि हमारे यहां 1800 पर एक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डॉक्टरों की सेवानिवृत्ति की उम्र 65 करने की घोषणा की तो मैने अपने अधिकारियों को इसे लागू करने की दिशा में कार्य करने के निर्देश दे दिए हैं। इससे युवा डॉक्टरों को घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि प्रदेश में डॉक्टरों की बहुत कमी है।
पीजीआई को मिली ये सौगात
- पीपीपी मोड के तहत लगी सीटी स्कैन, एमआरआई मशीन का उद्घाटन
- ओपीडी कार्ड को ऑनलाइन कर बार कोड की सुविधा का उद्घाटन
- ओपीडी के पीछे वाला रोड धनवंतरी मार्ग को 1.85 करोड़ की लागत से चार लेन बनाने की नींव रखी।
- 33 केवी इलेक्ट्रिक सब स्टेशन का उद्घाटन।
ये रहा खास
वीसी डॉ. ओ. पी. कालरा ने बताया कि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के सहयोग से लगाए गए रक्तदान शिविर के रक्तदाताओं को मंत्री ने सम्मानित किया। इसमें 200 यूनिट रक्त एकत्र हुआ। कुलपति ने गैर शिक्षक कर्मचारियों के मेडिकल अलाउंस भत्ते को केंद्र की तर्ज पर 2100 रुपये करने की मांग भी रखी। मंत्री ने बेहतरीन कार्य करने वाले अधिकारियों को भी सम्मानित किया। नैक के लिए तैयार की गई पिछले पांच साल की सेल्फ स्टडी रिपोर्ट का भी विमोचन किया। विद्यार्थियों ने कई रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में विधायक मनीष ग्रोवर और अतिरिक्त मुख्य सचिव चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान आईएएस धनपत सिंह उपस्थित रहे। विधायक ने कहा कि स्वास्थ्य सुधार के लिए मंत्री ने 27 प्रतिशत स्वास्थ्य बजट दिलवाया है। पश्चिमी बंगाल स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. भाभातोष बिश्वास के साथ मिलकर मेहमानों ने ओपीडी में लगे हेल्थ मेले का उद्घाटन भी किया।
पीजीआई में खुलेगी एकेडमी, दिए 21 लाख
मंत्री ने घोषणा की कि बहुत जल्द पीजीआई में एक एकेडमी खुलवाई जाएगी ताकि बच्चे अपने हुनर मे निखार ला सकें। इसके लिए वे 21 लाख रुपये दे रहे हैं। वीसी ने उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि ईसी की मीटिंग में डिजिटल विश्वविद्यालय सॉफ्टवेयर को स्वीकृति मिली है। डीएम व एमसीएच कोर्स को भी मंजूरी मिल गई है। संस्थान में किडनी ट्रांसप्लांट और मल्टी डिसीप्लेनरी यूनिट भी जल्द शुरू हो जाएगी।
मंच से झलका एचएम का डर
एक वक्ता ने मंच से कहा कि खुद वीसी रात साढे़ बारह बजे दौरा करके गए हैं। अधिकारी ने सभी को कहा था कि कार्यक्रम में किसी प्रकार की कमी नहीं होनी चाहिए। लेकिन स्वास्थ्य मंत्री का सकारात्मक रुख देखकर सभी को हौसला मिला है।
मंत्री ने इनको किया सम्मानित
- 91 बार रक्तदान करने के लिए डॉ. हेमंत कमल कंसलटेंट यूरोलॉजी डिपार्टमेंट।
- डॉ. गजेंद्र सिंह प्रिंसिपल कॉलेज ऑफ फार्मेसी को 2015 में डेंगू फीवर के ऐपीडैमिक के समय चार रक्तदान शिविर लगवाने व 187 ब्लड यूनिट जुटाने पर।
- डॉ. विद्या देशवाल, प्राचार्य कालेज ऑफ नर्सिंग को 9 रक्तदान शिविर लगवाने और 1017 ब्लड यूनिट एकत्र करने और खुद 9 बार रक्तदान करने पर।
- क्लर्क सुरेंद्र बरेजा को 53 बार रक्तदान करने पर।