रोहतक सीट पर भाजपा की कांग्रेस के जाट वोट बैंक में सेंध लगाने की रणनीति उल्टी पड़ गई। जाट मतदाताओं ने एकजुट होकर कांग्रेस प्रत्याशी दीपेंद्र हुड्डा को वोट दिया, जबकि गैर जाट वोट बैंक बिखर गया। 72 साल के चुनावी इतिहास में दीपेंद्र ने मत प्रतिशत के हिसाब से चौथी बड़ी जीत हासिल की।
हालांकि वे अपने 2009 के 69 प्रतिशत वोट हासिल करने के रिकॉर्ड को तोड़ नहीं सके। पांच साल पहले रोहतक शहर, कलानौर, बहादुरगढ़ व कोसली में कांग्रेस कहार मिली थी, वहीं पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा के परिवार ने जमकर प्रचार किया।
परिणाम स्वरूप नौ हलकों में दीपेंद्र जीतने में कामयाब रहे। रोहतक सीट पर पांच साल पहले भाजपा ने जाट व नॉन जाट के मुद्दे पर चुनाव लड़ा था। परिणाम यह हुआ कि कोसली व रोहतक से भाजपा प्रत्याशी को अच्छी बढ़त मिली।
अबकी बार भाजपा ने रणनीति बदली और जाट वोट बैंक में सेंध लगाने का प्रयास किया। इसके बावजूद हलके से कांग्रेस 77 हजार वोट से लीड लेने में कामयाब हुई है, जबकि कोसली व रोहतक शहर में भी भाजपा जीत नहीं सकी।