बिजली निगम ने अपने आंदोलनकारी कर्मचारियों पर बड़ी कार्रवाई की है। प्रदेश में बिजली निगम की सब डिवीजनों के निजीकरण के विरोध में सामूहिक अवकाश पर जाने के कारण 38100 कर्मचारियों पर कार्रवाई की गई है। निगम में आउटसोर्स पर काम कर रहे कर्मचारियों को हटा दिया है। जबकि स्थाई कर्मचारियों को सस्पेंड किया गया है। 11 मई को अवकाश पर रहने वाले सभी कर्मचारियों का एक दिन का वेतन काटा गया है। कार्रवाई के विरोध में बिजली निगम के कर्मचारी नेताओं ने फिर से काम ठप करने और हरियाणा बंद की चेतावनी दी है।
सरकार ने प्रदेश की 23 सब डिवीजनों को ठेके पर देने का फैसला लिया है। इनकी सूची भी जारी कर दी गई है। इसके विरोध में प्रदेश में 11 मई को 34 हजार में से लगभग 28 हजार बिजली कर्मी सामूहिक अवकाश पर रहे थे। इसके लिए 18 अप्रैल को सभी सर्कल ऑफिस में छुट्टी का आवेदन कर दिया गया था। हालांकि कर्मचारियों के एक साथ अवकाश पर जाने के कारण बिजली व्यवस्था काफी जगह चरमरा गई थी। अब निगम ने सामूहिक अवकाश पर जाने वाले कर्मचारियों पर बड़ी कार्रवाई की है। बिजली निगम में इस समय स्थाई, कांट्रेक्ट अस्थाई व आउटसोर्स पर कर्मचारी तैनात हैं। इनमें से रोहतक, पानीपत, सोनीपत, अंबाला, यमुनानगर, करनाल आदि जिलों के 100 से ज्यादा स्थाई कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया गया है। लगभग 10 हजार आउटसोर्स कर्मचारियों को हटा दिया गया है और उनको कार्यालयों में नहीं जाने दिया जा रहा है। वहीं, अवकाश पर रहने वाले सभी 28 हजार कर्मचारियों का एक दिन का वेतन काट दिया गया है।
बिजली निगम में आउटसोर्स पर लगे कर्मचारियों को बदलने के लिए ठेकेदारों से कहा गया है। क्योंकि वे निगम विरोधी गतिविधियों में शामिल रहे हैं। वहीं कुछ स्थाई कर्मचारियों को सस्पेंड किया गया है और सामूहिक अवकाश पर रहने के कारण सभी का एक दिन का वेतन काटा जा रहा है।
ज्ञानचंद, एसई बिजली निगम, रोहतक।
कर्मचारियों पर जिस तरह की कार्रवाई की गई है, उसे किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जब तक कर्मचारियों को काम पर नहीं लिया जाता और कार्रवाई वापस नहीं होती है तब तक आंदोलन किया जाएगा। सर्कल बंद करने के साथ ही हरियाणा भी बंद किया जाएगा।
देवेंद्र हुड्डा, बिजली कर्मचारी नेता।