निजी स्कूल संचालकों को अब स्कूल की मान्यता लेना खासा महंगा पड़ेगा। शिक्षा विभाग ने स्कूलों की मान्यता लेने के लिए ली जाने वाली धरोहर राशि में 6 गुना तक की बढ़ोतरी कर दी है। इस कारण जहां निजी स्कूल संचालकों में रोष है, वहीं इसकी मार घूम फिर कर अभिभावकों पर ही पड़ने वाली है। स्कूल संचालकों का कहना है कि यदि वह अधिक धरोहर राशि देकर मान्यता हासिल करेंगे तो उसकी भरपाई स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को ही करनी होगी।
पहले से ही प्रापर्टी टैक्स, स्कूल बस परमिट टैक्स, अस्थायी असंबद्धता फीस और नियम 134ए की मार झेल रहे निजी स्कूल संचालकों पर अब एक और बोझ बढ़ गया है। शिक्षा विभाग ने आठ साल बाद स्कूलों की मान्यता से पहले जमा होने वाली धरोहर राशि में 6 गुना तक बढ़ोतरी करके प्रदेश के 10 हजार अस्थायी मान्यता प्राप्त स्कूलों को करारा झटका दिया है। इस वजह से निजी स्कूल संचालकों को अब मान्यता लेने के लिए अपनी जेब ज्यादा ढीली करनी पड़ेगी। इस आर्थिक बोझ का असर विद्यार्थियों पर भी पड़ेगा। वहीं, निजी स्कूलों के संचालकों का कहना है कि धरोहर राशि बढ़ाने के पीछे सरकार की मंशा छोटे स्कूलोें को बंद करना है। वह कहते हैं कि जब केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने धरोहर राशि के लिए इतने कड़े नियम नहीं बनाए हैं तो हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड (एचबीएसई) निजी स्कूलों पर आर्थिक बोझ क्यों डालना चाहता है?
नए नियमों के मुताबिक 5वीं, 8वीं और 10वीं तक की मान्यता लेने के लिए स्कूल संचालक को स्कूल स्टाफ के एक माह के वेतन का 6 गुना धरोहर राशि के रूप में जमा कराना होगा। इस हिसाब से अगर एक प्राइमरी स्कूल में प्राचार्य, शिक्षक, क्लर्क, चौकीदार सहित 12 सदस्यों का स्टाफ है और डीसी रेट 9500 और अन्य खर्च के आधार पर इनका एक लाख, 20 हजार एक माह का वेतन बनता है तो 6 गुना धरोहर राशि के अनुसार प्राइमरी स्कूल की मान्यता लेने के लए 7 लाख, 20 हजार रुपये जमा कराने होंगे। जबकि इससे पहले वर्ष 2007 से प्राइमरी की मान्यता लेने के लिए 50 हजार रुपये, मिडिल तक के लिए एक लाख और हाई स्कूल तक के लिए दो लाख रुपये धरोहर राशि के रूप में जमा कराने का प्रावधान है।
आरटीई के तहत 8वीं तक धरोहर राशि लेनी निषेध
आरटीई (शिक्षा का अधिकार) के तहत पहली से आठवीं तक के स्कूल खोलने के लिए धरोहर राशि लेना निषेध है। इसलिए निजी स्कूल संचालकों का संघ शिक्षा विभाग के एडिशनल चीफ सेक्रेट्री पीके दास से मिला। इस दौरान प्राइमरी और मिडिल स्कूलाें पर धरोहर राशि हटाने और 9वीं से 12वीं तक के स्कूलाें के लिए धरोहर राशि केवल तीन गुना करने की मांग की गई। मुलाकात के दौरान प्रतिनिधिमंडल मौलिक शिक्षा विभाग के डायरेक्टर आरएस खरब से भी मिला। खरब ने कहा कि वे 8वीं तक के स्कूलों के लिए धरोहर राशि को हटाने की मांग को लेकर एक फाइल तैयार करेंगे और जल्द सरकार को सौंपेंगे।
एचबीएसई के स्कूलाें को बंद करने की साजिश : कुंडू
हरियाणा प्राइवेट स्कूल संघ के प्रदेशाध्यक्ष सत्यवान कुंडू ने कहा कि सरकार की ओर से एचबीएसई के स्कूलों को बंद करने की साजिश की जा रही है। इसी वजह से प्राइमरी, मिडिल और हाईस्कूलों की मान्यता लेने के लिए धरोहर राशि को बढ़ा दिया गया है। पहले ही निजी स्कूल संचालकों पर अस्थायी संबद्ध फीस का बोझ है। जिसे दो हजार से बढ़ाकर 10 हजार रुपये कर दिया गया है। साथ ही, प्रति स्कूल बस की परमिट फीस 850 रुपये से बढ़ाकर 25 हजार रुपये कर दिया गया है। अब मान्यता के लिए धरोहर राशि को बढ़ा दिया गया है। उन्होंने कहा कि करीब 10 हजार स्कूल पिछले कई वर्षों से मान्यता की बाट जोह रहे हैं। सरकार नियमों में सरलीकरण करने के बजाय और जटिल बना रही है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने फैसला वापस नहीं लिया तो प्रदेश भर में आंदोलन किया जाएगा।
दोनों बोर्ड में देनी पड़ती है धरोहर राशि
फेडरेशन ऑफ प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष कुलभूषण शर्मा ने कहा कि अगर सीबीएसई बोर्ड से मान्यता लेनी है तो एचबीएसई बोर्ड में भी धरोहर राशि जमा करानी होती है। दोनों बोर्ड में धरोहर राशि जमा कराने के बाद ही मान्यता मिलती है। अब सरकार ने धरोहर राशि में छह गुना तक इजाफा कर दिया है, जिससे दिक्कतें और बढ़ जाएंगी। सीबीएसई से मान्यता लेने के लिए इतनी धरोहर राशि देने का प्रावधान नहीं है। सीबीएसई से 10वीं तक की मान्यता लेने के लिए 500 से कम विद्यार्थियों पर 60 हजार रुपये, एक हजार विद्यार्थियों पर 80 हजार तो इससे अधिक संख्या होने पर एक लाख रुपये धरोहर राशि देने का प्रावधान है। शर्मा ने कहा कि वे जल्द ही इस मामले में शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों से मिलेंगे। अगर धरोहर राशि कम नहीं की गई तो प्रदेश भर में संघर्ष का रास्ता अपनाया जाएगा।