रोहतक। एएसजे संदीप दुग्गल की अदालत ने पाकस्मा निवासी जयदीप को छह साल बाद दुष्कर्म के आरोप से बरी कर दिया है। कोर्ट में निर्णायक गवाही आरोपी संग मुस्कुराती सेल्फी और फिर सब्जी मंगाने के संदेशों की रही। इन साक्ष्यों से वे आरोप धम्म से गिर गए कि धमकी देकर दुष्कर्म किया गया था।
जयदीप पर यह आरोप छह साल पहले लगा था। महिला ने दिसंबर 2019 में कहा था कि जयदीप से मुलाकात के बाद उसकी दोस्ती हो गई थी। उसने घर आना-जाना शुरू कर दिया। फिर, मर्जी के खिलाफ शारीरिक संबंध बना लिए। धमकी देकर उन्हें हरिद्वार के एक होटल में ले गया।
हरिद्वार में भी उसने शोषण किया। इसकी तस्वीरें बनाईं और किसी को बताने पर वायरल करने की धमकी भी दी। पुलिस ने जयदीप को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। जिला अदालत ने 25 मार्च को साक्ष्यों के अभाव में जयदीप को बरी कर दिया।
बचाव पक्ष ने कोर्ट में दलील दी कि शिकायत करने वाली महिला के साथ जयदीप की बिस्तर पर बैठे-मुस्कुराते सेल्फी भी है। यही नहीं, कथित दुष्कर्म की घटना के बाद शिकायतकर्ता ने आरोपी से सब्जी भी मंगाई थी। इसका मैसेज भी मौजूद है। लिहाजा, धमकी देकर दुष्कर्म और मुस्कुराती सेल्फी लेने के लिए मजबूर करने का आरोप सही नहीं है।
वकील ने दलील दी कि पीड़िता ने धमकी के कारण सेल्फी खींची होती तो उसी को सब्जी ले आने का मैसेज क्यों भेजती। कोर्ट में यही दलील निर्णायक साबित हुई। बचाव पक्ष ने होटल मैनेजर की गवाही भी कराई जिसमें उन्होंने कहा कि माहौल से ऐसा नहीं लगा कि होटल आई महिला किसी दबाव में थी।
फॉरेंसिक सबूत नहीं जुटाने से बच रहे अपराधी
अपराध मामलों के वरिष्ठ अधिवक्ता चांद सिंह राणा बताते हैं कि दुष्कर्म के अधिकांश मामलों में पुलिस फॉरेंसिक सबूत नहीं जुटाती। इसी कारण अपराधी बच निकलते हैं। पुलिस वैज्ञानिक तरीके से सबूत जुुटाए तो दोषियों को सजा मिलेगी, निर्दोष भी नहीं फंसेंगे।