हरियाणा रोडवेज तालमेल कमेटी के आह्वान पर दो दिवसीय प्रदेशव्यापी हड़ताल के दूसरे दिन भी वीरवार शाम तक कोई बस नहीं चली।
इस
वजह से बस यात्री वाहन के लिए भटकते नजर आए। बसें न चलने से दैनिक यात्री
खासे परेशान रहे। सोनीपत से लगभग पचास हजार दैनिक यात्री काम के लिए दिल्ली
व अन्य शहरों में जाते हैं। इनमें से लगभग दस हजार यात्री बसों से अपना
सफर तय करते हैं। इस वजह से उन्हें भारी दिक्कत रही।
ट्रेनों में
भी इसी वजह से पैर रखने को जगह नहीं थी। कई स्थानों पर तो मैक्सी कैब और
वैन चालकों ने यात्रियों से अधिक किराया भी वसूल किया। गोहाना निवासी संतरो
देवी ने कहा कि वह आधे घंटे से यहां बस के इंतजार में बैठी है, लेकिन जो
भी वाहन जा रहा है वह ठसाठस भरा हुआ है। इस वजह से उसे जगह नहीं मिल रही।
वहीं, खरखौदा निवासी रामभगत ने रोष जाहिर कर कहा कि पूर्व घोषित हड़ताल के
बावजूद न तो सरकार ने लोगों को वैकल्पिक सुविधा देने का प्रयास किया और न
ही प्रशासन ने।
कर्मचारी दस हजार बसें बेड़े में शामिल करने, 3519
रूटों पर निजी बस परमिट रद्द करने, कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने,
कर्मशाला में सुविधाएं बढ़ाने आदि मांगें कर रहे हैं।
हड़ताल में शामिल कर्मियों की रिपोर्ट दें : डीसी
नारनौल।
उपायुक्त ने हरियाणा सर्व कर्मचारी संघ के आह्वान पर आयोजित हड़ताल के
मद्देनजर वीरवार को अफसरों की बैठक ली। इस अवसर पर उन्होंने अधिकारियों को
स्वयं कार्यालय का निरीक्षण करने के आदेश दिए। उन्होंने हाजिरी रजिस्टर को
अच्छी तरह चेक करने के निर्देश दिए। उन्होंने हड़ताल में शामिल कर्मचारियों
की रिपोर्ट भी मांगी।
रोडवेज को लाखों का नुकसान
रोडवेज
कर्मचारियों की हड़ताल की वजह से फतेहाबाद डिपो को करीब 7 लाख रुपये का
नुकसान वीरवार को हुआ। वहीं, झज्जर डिपो को 17 लाख रुपये का नुकसान हुआ।
भिवानी डिपो में दो दिन में करीब 25 लाख का घाटा हुआ है। रोडवेज की हड़ताल
के कारण रोहतक डिपो को बीस लाख रुपये का नुकसान हुआ है।
अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी
रोहतक।
हरियाणा रोडवेज तालमेल कमेटी ने सरकार को 22 नवंबर तक अल्टीमेटम देते हुए
कहा कि मांगें नहीं मानी तो प्रदेश भर में आंदोलन तेज किया जाएगा। कर्मचारी
अनिश्चितकालीन हड़ताल करने का फैसला भी ले सकते हैं। इस बारे में निर्णय
लेने के लिए 23 नवंबर को कमेटी की बैठक बुलाई गई है।
हरियाणा
रोडवेज तालमेल कमेटी की बस अड्डा परिसर में हुई बैठक में कमेटी के सदस्य
जोगिंद्र बल्हारा ने कहा कि अब आर-पार की लड़ाई लड़ी जाएगी। दो दिवसीय सफल
हड़ताल से सरकार को चेतावनी दी गई है। बल्हारा ने कहा कि सरकार रोडवेज को
निजी हाथों में सौंप रही है। इससे जहां आम जनता को प्राइवेट बस मालिकों की
तानाशाही से परेशान होना पड़ेगा, वहीं कर्मचारियों का भी शोषण होगा।
प्राइवेट बसों पर कर्मचारियों को मात्र छह-सात हजार रुपये वेतन मिलता है।
उन्हें कोई सुविधा नहीं दी जाती। बुधवार की हड़ताल की बाद रोडवेज को छोड़कर
अन्य विभागों के कर्मचारी वीरवार को काम पर लौट आए। वहीं, रोडवेज
कर्मचारियों ने दूसरे दिन भी चक्का जाम रखा।