चार दिन से चल रही रोडवेज कर्मियों की हड़ताल वीरवार देर शाम खत्म हो गई। सरकार ने नई निजी बसों के परमिट देने के फैसले को वापस लेने के साथ निलंबित किए गए कर्मियों को भी बहाल करने का फैसला लिया। फैसले के बाद रात को जीएम राहुल जैन ने नए बस स्टैंड स्थित रोडवेज बस डिपो से सभी बसों का रवाना किया। हालांकि इस दौरान कुछ यात्रियों में गुस्सा भी देखने को मिला। सोनीपत जाने वाले यात्रियों का कहना था चार दिन से सोनीपत से रोहतक आने जाने में काफी समस्या का सामना करना पड़ा। जब प्रदेश सरकार को मांगे माननी ही थी तो चार दिन तक इंतजार क्यों किया? यात्रियों की परेशानी से सरकार को कोई लेना देना नहीं था।
नई निजी बसों को परमिट दिए जाने के फैसले के खिलाफ रोडवेज कर्मियों ने चार दिन पहले हड़ताल शुरू कर दी थी। हड़ताल में शामिल पांच कर्मियों को मंगलवार को सस्पेंड किए जाने से अन्य कर्मियों में रोष था। वहीं रोडवेज से संबंधित यूनियन सहित अन्य विभागों की यूनियन ने इसके विरोध सड़क पर उतर आए। पैदल मार्च निकालते हुए नए बस स्टैंड पहुंचे कर्मियों ने रोडवेज में शामिल किए जाने वाली नई निजी बसों के परमिट रद्द करने की मांग की। साथ ही सस्पेंड किए गए कर्मियों को भी बहाल करने की मांग रखते हुए हड़ताल जारी रखी। देर शाम रोहतक रोडवेज डिपो के जीएम परिसर में कर्मियों के बीच आए और सरकार की ओर से मांगों को मान लेने की जानकारी दी। हरियाणा रोडवेज वर्कर्स यूनियन संबंधित सर्व कर्मचारी संघ के कार्यालय सचिव जय कंवार ने बताया कि सरकार ने यूनियन की मांगों को मान लिया है। उन्होंने बताया कि सरकार की ओर से 273 रूटों के लिए 835 निजी बसों को दिए गए परमिटों को रद्द कर दिया जाएगा और वहीं निलंबित कर्मचारियों को भी बहाल कर दिया जाएगा। उन्होेंने बताया कि मांगों को मानने के बाद चालक, परिचालक और अन्य कर्मचारी अपने काम पर लौटेंगे।
सभी बसों को किया रवाना
रोडवेज में रोहतक डिपो के मुख्य यातायात निरीक्षक प्रेम चंद ने बताया कि देर शाम सभी लोकल रूटों की बसों को रवाना कर दिया ताकि सुबह कालेज, स्कूल और काम पर आने वाले कर्मियों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। उन्होंने बताया कि पानीपत, सोनीपत, सिरसा, पानीपत, जींद, चरखी दादरी, भिवानी, दिल्ली और गुरुग्राम समेत फरीदाबाद रूट की भी गाड़ी रवाना कर दी है।
सरकार ने जनता के हित मेें लिया फैसला
डिपो के महाप्रबंधक राहुल जैन ने बताया कि सरकार की ओर से जनता के हित में फैसला लिया गया है। अब बसों को संचालन सुचारु रूप से करवाया जाएगा।
चार दिन में 50 लाख से अधिक का नुकसान
हड़ताल और सरकार की बेरुखी के आगे यात्रियों को जहां चार दिन परेशानी का सामना करना पड़ा, वहीं रोडवेज को 50 लाख से ज्यादा का नुकसान हुआ। रोडवेज अधिकारियों की मानें तो चार दिन से बसें डिपो में खड़ी रहीं। इससे यात्रियों को काफी समस्या हुई और रोडवेज को आर्थिक रूप से काफी नुकसान हुआ है।
लोकतंत्र का गला घोंट रही है सरकार : कर्मबीर
हड़ताल के समर्थन में सर्व कर्मचारी संघ के पदाधिकारी और कार्यकर्ता सुखपुरा चौक स्थित कर्मचारी भवन में जुटे। वहां से बाइक जुलूस निकाल कर रोडवेज कर्मियों को समर्थन दिया। जिला प्रधान कर्मबीर सिवाच और जिला सचिव प्रदीप कुमार ने बताया कि दमनकारी नीतियों को अपनाकर सरकार लोकतंत्र का गला घोंट रही है। इस मौके पर मैकेनिक यूनियन के प्रधान शिवकुमार, बिजली यूनियन के नेता प्रभुदयाल, हुडा विभाग के नेता प्रकाश, अध्यापक की नेता मधु, टूरिज्म के नेता जोगेंद्र दलाल, वन विभाग के नेता जोगेंद्र करोंथा और सर्व कर्मचारी संघ के कैशियर जसवंत सिंह भी मौजूद रहे।
कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष तंवर भी पहुंचे समर्थन में
कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर भी रोडवेज कर्मियों के समर्थन में नए बस स्टैंड परिसर पहुंचे थे। उन्होंने कहा, वर्तमान सरकार निजीकरण को बढ़ावा देकर आरक्षण को खत्म करना चाहती है। सरकार रोडवेज कर्मियों की मांगों को मानने के बजाय सस्पेंड कर उनका उत्पीड़न कर रही है। निजी बसों को परमिट देने के बाद निजी बसों के संचालकों की मनमानी बढ़ जाएगी और इससे जनता का हित नहीं होगा। कहा, कर्मियों के हक में लड़ाई लडे़ंगे और उनकी इन मांगों को सदन में भी उठाएंगे।
सीटू यूनियन भी पहुंची बस स्टैंड
सीटू के नेतृत्व में सभी जनसंगठनों ने प्रभात भवन से बस अड्डे तक पर यात्रा निकाल कर प्रदर्शन किया। नया बस स्टैंड पहुंचे सीटू के पदाधिकारी प्रकाश चंद्र ने बताया कि आंदोलन के दबाव सरकार बातचीत तो कर लेती है लेकिन बाद में अपने वादों से मुकर जाती है। इसके अलावा किसान सभा के पदाधिकारी बलवान सिंह और जनवादी महिला समिति की सदस्या अंजू ने भी विरोध प्रदर्शन के दौरान सरकार की नीतियों की निंदा की। भवन निर्माण कामगार यूनियन की ओर से राम भगत, सुरेश, मिड डे मील वर्कर्स यूनियन से कमलेश लाहली, एसएफ आई के प्रवीण जयवाल, अर्जुन और सतबीर पाक्समा ने भी समर्थन दिया।
जब सरकार को अपना फैसला वापस लेना ही था तो पहले फैसला लिया ही क्यों? हड़ताल से यात्रियों को चार दिन तक परेशानी हुई, उसके बावजूद कोई कदम नहीं उठाया। जब कर्मचारी सड़क पर उतरे तो ही ये फैसला वापस लिया है। सरकार गलत फैसले लेकर लोगों पर थोपना चाहती है। इसका खामियाजा हमें उठाना पड़ा।
तरुण देशवाल, सोनीपत
पिता के पैर में जख्म है और पीजीआई में भर्ती है। गेहूं की कटाई भी चल रही है। ऐसे में सोनीपत और रोहतक आना जाना पड़ रहा है। निजी वाहन से जाने में समय और पैसों की बर्बादी होती है। हड़ताल से काफी परेशानी हुई। अगर कर्मी गलत थे तो कार्रवाई करते। फैसला वापस लेना था तो चार दिन तक इंतजार क्यों किया?
आकाश घनघस, सोनीपत