बॉन्ड पॉलिसी का विरोध कर रहे एमबीबीएस विद्यार्थियों में सरकार के प्रति रोष बढ़ता जा रहा है। विद्यार्थियों ने करनाल में आंदोलनकारियों पर पुलिस की ओर से 4 व 11 दिसंबर को बल प्रयोग किए जाने की घटना की निंदा की है। इससे आहत विद्यार्थियों ने इसी कड़ी में करनाल के आईजीपी, एसपी और डीसी को 100 से अधिक ई-मेल भेजी है। इसमें पुलिस अधिकारियों को विद्यार्थियों के प्रति संयम बरतने की अपीली की है। इधर, नागरिक मंच के आह्वान पर रिटायर्ड कर्मचारी संघ ने सोमवार को लघु सचिवालय के बाहर तीन घंटे धरना-प्रदर्शन किया। बाद में उपायुक्त के प्रतिनिधि को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।
पीजीआईएमएस के एमबीबीएस विद्यार्थियों ने कहा कि करनाल में पुलिस ने आंदोलनकारी विद्यार्थियों पर बल प्रयोग किया है। यह निंदनीय है। ऐसा रविवार को दूसरी बार हुआ है। इस संबंध में पुलिस अधीक्षक करनाल को पत्र भेजा गया है। इसमें कल्पना चावला राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय करनाल के एमबीबीएस विद्यार्थियों के साथ पुलिस की ओर से बल प्रयोग किए जाने का विरोध करते हुए आक्रोश प्रकट किया गया है। साथ ही पुलिस प्रशासन की तरफ से शांतिपूर्वक ढंग से बॉन्ड पॉलिसी का विरोध करने वाले विद्यार्थियों के प्रति सहयोग की मांग की गई है। विद्यार्थियों का कहना है कि विरोध प्रदर्शन करना उनका संवैधानिक अधिकार है। पुलिस अधिकारियों को विद्यार्थियों के प्रति संयम बरतना चाहिए। इस मामले को लेकर पीजीआई के विद्यार्थियों ने करनाल के आईजी, एसपी व डीसी को 100 से ज्यादा ई-मेल किए हैं। इसमें विद्यार्थियों ने आंदोलनकारियों के साथ किसी तरह की हिंसा या बुरा व्यवहार नहीं करने की भी अपील की है।
रिटायर्ड कर्मचारियों ने 3 घंटे किया प्रदर्शन
नागरिक मंच के आह्वान पर सोमवार को रिटायर्ड कर्मचारी संघ की रोहतक इकाई ने लघु सचिवालय के बाहर तीन घंटे का धरना-प्रदर्शन किया। एमबीबीएस विद्यार्थियों पर बॉन्ड पॉलिसी थोपे जाने का विरोध करते हुए नागरिक मंच ने विभिन्न संगठनों से पॉलिसी का विरोध करने की अपील की है। नागरिक मंच से प्रो. प्रमोद गौरी ने कहा कि सरकार पुरोहितों को वेतन देकर वोट बैंक बनाना चाहती है। जबकि विज्ञान की सबसे मुश्किल पढ़ाई करने वाले एमबीबीएस के छात्रों को बैंक से भारी भरकम 40 लाख रुपये का ऋण लेने के लिए बाध्य किया जा रहा है। इससे आम परिवारों के होनहार विद्यार्थी चिकित्सक नहीं बन सकेंगे। इसलिए सभी संगठनों को लगातार इस नीति के विरोध में धरना देकर रोष प्रकट करना चाहिए।
लाभ सिंह हुड्डा ने कहा कि सरकार शिक्षा का व्यापारीकरण कर रही है। डॉ. आरएस दहिया ने कहा कि डॉक्टरों की कमी नहीं है, बल्कि डॉक्टर अधिक हैं और नौकरियां कम। सरकार नौकरी नहीं दे रही है। जिन्हें नौकरी मिलेगी उन पर बॉन्ड थोपना नाइंसाफी है। सरकार डॉक्टरों को प्रांत में ही सेवा करने के लिए बेहतर सुविधाएं देकर प्रोत्साहित करे। आजाद सिंह अहलावत ने भी अपने विचार रखे।
आईएमए जनहित में दायर करेगा याचिका
आईएमए गुरुग्राम और रोहतक क्रिकेट टीम ने रविवार देर शाम पीजीआई के आंदोलनकारी विद्यार्थियों से मुलाकात की। आईएमए हरियाणा अध्यक्ष डॉ. पुनिता हसीजा, डॉ. दिव्या सक्सेना, डॉ. शिव रतन, डॉ. परमजीत दहिया, डॉ. प्रशांत त्यागी, डॉ. करण जुनेजा, डॉ. श्रीभगवान समेत अन्य लोगों ने छात्रों का मनोबल बढ़ाने के लिए उन्हें प्रोत्साहित किया। यहां आईएमए मुख्यालय की एक्शन कमेटी की बैठक और आईएमए नेताओं के विचारों से अवगत कराया। साथ ही बॉन्ड पॉलिसी के खिलाफ जनहित याचिका दायर किए जाने की जानकारी दी गई। अनशन स्थल पर सरकार को अंधेरे से रोशनी में लाने के उद्देश्य से मोबाइल फ्लैश लाइट लहराई गई।