पशुओं के आसपास रहने वाले लोगों के लिए यह खबर बेहद जरूरी है। पशुओं से इंसानों में फैलने वाली बीमारियों पर छह माह पूर्व शुरू हुई रिसर्च के शुरुआती संकेत ठीक नहीं पाए गए।
प्रदेश के वेटरनरी डाक्टरों में पशुओं की खतरनाक बीमारी ब्रुसोलोसिस के लक्षण मिले हैं। हिसार की लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (लुवास) में चल रही रिसर्च के दौरान यह तथ्य सामने आया है। इसके लिए रोहतक समेत पूरे प्रदेश से सैंपल लिए गए हैं।
इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चर रिसर्च की तरफ से लुवास को इसी वर्ष ‘आउटरीच प्रोग्राम ऑन जुनेटिक डिजीज’ प्रोजेक्ट मिला था। 2017 तक के इस प्रोजेक्ट के तहत वैज्ञानिकों की टीम को पूरे प्रदेश की जिम्मेदारी दी गई थी। रिसर्च के दौरान वैज्ञानिकों की टीम को पशुओं के संक्रमण से इंसानों में होने वाली ब्रुसोलोसिस और साल्मोनेला बीमारियों पर रिसर्च करनी थी। मार्च माह में शुरू हुई रिसर्च के दौरान अभी जो केस सामने आए हैं वह बेहद चौंकाने वाले हैं और उनके परिणाम सही नहीं कहे जा सकते।
अभी तक प्रदेश के 40 वेटरनरी डाक्टरों और उनके स्टाफ पर रिसर्च की गई, जिसमें ज्यादातर में पशुओं में होने वाली खतरनाक बीमारी ब्रुसोलोसिस के लक्षण पाए गए। इसके अलावा पशुपालकों को भी इस बीमारी के संक्रमित होने की संभावना जताई गई है।
ऐसे फैलती है बीमारी
गाय-भैंस से ब्रुसेला अवोरट्स, बकरी-भेड़ से ब्रुसेला मिलिटेंसी और सुअर से ब्रुसेला सुइस नामक कीटाणु इंसानों को सबसे ज्यादा संक्रमित करते हैं। यह कीटाणु इतने खतरनाक है कि हवा, सांस या फिर दूध के माध्यम से भी इंसान के शरीर में पहुंच जाते हैं। इस बीमारी से संक्रमिक मादा पशु का बार-बार गर्भपात होता है और बीमार पशुओं का दूध पीने से भी व्यक्ति इनकी चपेट में आ जाता है।
यह है लक्षण
बीमारी से संक्रमित व्यक्ति के शरीर के जोड़ों में दर्द रहने लगता है। इसके अलावा व्यक्ति को बुखार की शिकायत रहने लगती है। शरीर के जिस अंग पर यह कीटाणु वार करता है वह समय पर उपचार नहीं होने के कारण काम करना बंद कर देता है।
इन संस्थानों में चल रही रिसर्च
इस प्रोजेक्ट पर महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, केरल, उत्तरप्रदेश और पश्चिम बंगाल समेत 17 स्थानों पर रिसर्च चल रही थी। इसी वर्ष इसमें हरियाणा के लिए हिसार, पंजाब के लिए लुधियाना, असम और जम्मू समेत पांच नए संस्थानों को भी शामिल कर लिया गया था।
रिसर्च के दौरान कुछ डाक्टरों में ब्रुसोलोसिस के लक्षण मिले हैं। पशुओं से फैलने वाली इस बीमारी को शुरुआती दौर में कंट्रोल किया जा सकता है। इसके अलावा रोहतक सेंटर पर गांवों के तालाबों के पानी की भी जांच की जा रही है।
- डॉ. एन.के. महाजन, प्रोजेक्ट इंचार्ज और विभागाध्यक्ष, वेटरनरी पब्लिक हेल्थ लुवास।