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पंजीकृत डॉक्टर, नर्स व स्टाफ को ही पहले लगाई जाएगी वैक्सीन

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कोरोना वैक्सीन के टीकाकरण को लेकर स्वास्थ्य विभाग जिले में डॉक्टरों, नर्सों व अन्य स्टाफ की सूची बना रहा है। वैक्सीन के आने पर सूची के आधार पर ही स्वास्थ्य से जुड़े लोगों को वैक्सीन लगाई जाएगी। इस अभियान में समस्या यह आ रहा है कि विभाग केवल पंजीकृत लोगों की ही लिस्ट बना पा रहा है, जबकि बगैर पंजीकृत अस्पताल व डॉक्टरों व अन्य स्टाफ का इसमें नामों निशान नहीं है। विभाग सरकारी, गैर सरकार अस्पताल में मान्यता प्राप्त स्टाफ को ही वैक्सीन लगने वालों की सूची में शामिल कर रहा है।
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स्वास्थ्य विभाग नीति आयोग के निर्देशों पर जिले में कार्यरत एलोपैथी, होम्योपैथी, आयुष के डॉक्टरों की लिस्ट बना रहा है। इसमें पंजीकृत डॉक्टरों को ही शामिल किया जा रहा है। इसी तरह जिले में तैनात स्टाफ नर्स, एएनएम, जीएनएम, हेल्थ वर्कर, एमपीएचडब्ल्यू, आशा वर्कर, गैर चिकित्सा स्टाफ, बीयरर, स्वीपर, लैब तकनीशियन आदि को भी लिस्ट में शामिल किया जा रहा है। इसमें सरकारी अस्पतालों के अलावा निजी अस्पतालों को भी शामिल किया जा रहा है। ऐसे में उन निजी अस्पतालों के लिए समस्या खड़ी हो गई है जो प्रदेश सरकार की गाइड लाइन में फिट नहीं बैठ रहे हैं। ऐसे निजी अस्पतालों, डॉक्टरों व स्टाफ को विभाग लिस्ट में शामिल नहीं कर रहा है। विभाग का कहना है कि जब कोई पंजीकृत ही नहीं है तो उसे लिस्ट में कैसे शामिल कर सकते हैं।
झोलाछाप डॉक्टरों व अवैध क्लीनिकों की कैसे होगी सुरक्षा
कोरोना संक्रमण के चक्र से चिकित्सा से जुड़े लोगों को बचाने की मुहिम में झोलाछाप डॉक्टर, अवैध क्लीनिक रोड़ा बन गए हैं। नियमानुसार इनका नाम लिस्ट में शामिल नहीं हो सकता और इनके पास भी मरीजों की खासी संख्या उपचार करवाने को पहुंचती है। हकीकत में प्रदेश में इनकी संख्या में खासी है, जोकि वैक्सीन से महरूम रह सकती है।
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हम पंजीकृत डॉक्टर, नर्स व स्टाफ के अलावा अस्पतालों को ही अपनी लिस्ट में शामिल कर सकते हैं। जो अवैध है वह नियमानुसार कार्य ही नहीं कर सकते। यदि कोई वैध है तो वह अपना पंजीकरण करवा कर विभाग की नियम व शर्तों को पूरा करे। सूची के हिसाब से वैक्सीन आने पर डोज लगाई जाएगी। जिले में 13 हजार के करीब नाम सूची में दर्ज किए जा चुके हैं। इसके अलावा टीकाकरण के लिए हमारे पास पर्याप्त अनुभवी स्टाफ उपलब्ध है।
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- डॉ. अनिल बिरला, सिविल सर्जन।
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