एमडीयू में करीब ढाई माह पूर्व हुई डाटा एंट्री ऑपरेटर (डीईओ) की भर्ती में आरटीआई से चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। भर्ती के लिए न केवल यूनिवर्सिटी का कंप्यूटर सेंटर इस्तेमाल किया गया था, बल्कि मौके पर यूनिवर्सिटी के कर्मचारी भी मौजूद थे, लेकिन अब यूनिवर्सिटी के प्रशासनिक अधिकारियों ने इससे सीधा पल्ला झाड़ लिया। उनका कहना है कि विवि ने भर्ती के संबंध में लिखित में कोई आदेश ही नहीं दिए थे।
अब प्रश्न यह है कि यदि लिखित में कोई आदेश ही नहीं दिए गए तो कंप्यूटर सेंटर का इस्तेमाल किसकी अनुमति से किया गया और विश्वविद्यालय के कर्मचारियों की ड्यूटी किसके कहने पर लगाई गई। यही नहीं, मौके पर रजिस्ट्रार स्वयं मौजूद थे।
यह है मामला
एमडीयू के कंप्यूटर सेंटर में जून माह में डाटा एंट्री ऑपरेटर की भर्ती कराई जा रही थी। छुट्टी के दिन हो रही इस भर्ती को लेकर काफी हंगामा हुआ था। इनसो ने आरोप लगाया था कि भर्ती के लिए न कोई विज्ञापन जारी किया गया और न ही कोई सूचना दी गई। गुपचुप तरीके से अपने चहेतों को नियुक्त किया जा रहा है। हंगामे के बाद भर्ती पूरी नहीं हो सकी थी और मामला राज्यपाल तक भी पहुंच गया था, तभी से इस भर्ती पर रोक लगी हुई है।
आरटीआई में मिले जवाब खुद उठा रहे सवाल
एमडीयू के एक प्रोफेसर ने आरटीआई के तहत यूनिवर्सिटी प्रशासन से डीईओ भर्ती संबंधी सूचना मांगी थी। इसमें अब चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। पहला सवाल था कि जब टीएफएस कंपनी भर्ती कर रही थी तो यूनिवर्सिटी के कर्मचारियों की ड्यूटी किसने लगाई। दूसरा सवाल था कि कंप्यूटर सेंटर में भर्ती कराने के लिए क्या कंपनी को लिखित में अनुमति दी गई थी।
इसके अलावा ऑपरेटर किस ऑफिस ने मांगे थे और टेस्ट देने आए अभ्यर्थियों को किसने बुलाया था। इन सभी सवालों के जवाब में यूनिवर्सिटी ने जवाब दिया कि उन्होंने इस भर्ती के मामले में लिखित में किसी को कोई आदेश नहीं दिया था। हालांकि मौखिक रूप से दिशा-निर्देश दिए जा रहे थे। आरटीआई में दिए गए जवाब के बाद अब कई सवाल उठ रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह कि बिना यूनिवर्सिटी की अनुमति के कंप्यूटर सेंटर में टेस्ट किस आधार पर लिया जा रहा था। इसके अलावा बिना ड्यूटी लगाए कर्मचारियों को वहां किसने भेजा।
बिना योग्यता ही दे रहे थे टेस्ट
आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार जो अभ्यर्थी टेस्ट दे रहे थे वह तो इसकी योग्यता ही नहीं रखते। किसी अभ्यर्थी की योग्यता बीकॉम है तो किसी की बीए, लेकिन कंप्यूटर दक्षता संबंधी डिप्लोमा ही नहीं था।