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Rohtak News: एमडीयू में रंग बहार कार्यक्रम आज

Wed, 19 Mar 2025 01:26 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
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18सीटीके23-रंग बहार कार्यक्रम के लिए लगाई गई कुर्सी। संवाद
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महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू) में बुधवार को बहुरंगीय रंग महोत्सव के तहत रंग बहार कार्यक्रम का आयोजन एफडीसी लॉन में प्रारंभ होगा। डीन, स्टूडेंट वेलफेयर एवं रंग महोत्सव के संयोजक प्रो. रणदीप राणा ने बताया कि एनसीसी डायरेक्टरेट पीएचएचपी एंड सी चंडीगढ़ के एडीजी मेजर जनरल जगदीप सिंह चीमा बतौर मुख्यातिथि कार्यक्रम का शुभारंभ करेंगे।
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कुलपति प्रो. राजबीर सिंह उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता करेंगे। कुलसचिव डाॅ. कृष्णकांत बतौर गेस्ट ऑफ ऑनर कार्यक्रम में शिरकत करेंगे। यह कार्यक्रम सुबह 10 बजे एफडीसी लॉन से प्रारंभ होगा। रंग बहार कार्यक्रम की संयोजिका प्रो. विनीता हुड्डा ने बताया कि रंग महोत्सव के आयोजित किए जाने वाले फ्लावर फेस्टिवल रंग बहार के आयोजन की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। उन्होंने बताया कि रंग बहार कार्यक्रम के समापन सत्र में भारतीय पुनर्वास परिषद के अध्यक्ष डाॅ. शरणजीत कौर बतौर मुख्यातिथि शिरकत करेंगी। 19 से 29 मार्च तक आयोजित किए जाने वाले रंग महोत्सव का पोस्टर लोकार्पण मंगलवार को कुलपति प्रो. राजबीर सिंह ने किया। उन्होंने कहा कि यह महोत्सव विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों की प्रतिभा प्रदर्शन, अनुभवात्मक शिक्षण, क्षमता संवर्धन का विशिष्ट मंच है।

डॉ. विकास सिवाच अध्यक्ष शिक्षक संघ ने कहा कि टीचिंग व नॉन टीचिंग ने कुलपति से कहा कि था कि रंग महोत्सव कार्यक्रमों के आयोजन से फिजूलखर्ची होती है। उन्होंने कहा कि हम ऐसे कार्यक्रमों के विरोध में है। 11 दिन के कार्यक्रमों से विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित होगी। उन्होंने बताया कि कुलपति से मांग की थी। ऐसे कार्यक्रमों पर रोक लगानी चाहिए। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ वर्षो से होली के पावन त्योहार से पहले विवि में हुड़दंग का अड्डा बना दिया है।
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पिछले साल शिक्षकों और गैर शिक्षक कर्मचारियों ने बड़ी मशक्कत से विवि की बनी बनाई छवि बचाई थी। उन्होंने बताया कि रंग बहार, रंग तरंग, रंग सर्जन इत्यादि नाम के कार्यक्रम विश्वविद्यालय के आर्थिक संसाधनों को खराब करने के अलावा और कुछ नहीं है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में बागवानी अच्छी बात है, लेकिन 50 रुपये के एक-एक पौधे लाकर 2.50 लाख से तीन लाख रुपये व्यर्थ करने की बात है। बागवानी के लिए सारे साल चलने वाले पौधे लगाने के आदेश दें, न कि तीन-चार महीने वाले पौधे।
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