अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक । करौंथा आश्रम के बाहर 13 साल पहले हुई झज्जर के युवक सोनू की हत्या के मामले में वीरवार को तीन लोगों की गवाही होनी थी। जिनमें दो पीजीआई के डॉक्टर और जम्मू का क्लर्क सुनील हैं। लेकिन इन तीनों की गवाही नहीं हो सकी। क्योंकि पुलिस ने पीजीआई के जिन दो डॉक्टर को गवाह बना रखा है, उनमें एक ऑस्ट्रेलिया गया हुआ है, जबकि दूसरे का नाम नहीं दिया गया है। इतना ही नहीं, क्लर्क के बारे में जम्मू प्रशासन की तरफ से अदालत को बताया गया है कि सुनील नाम का कोई क्लर्क उनके यहां नहीं है। अब मामले की अगली सुनवाई 16 जनवरी को होगी।
तीसरे आरोपी की मौत, अदालत में दिया मृत्यु प्रमाण पत्र
बचाव पक्ष के वकील सुनील कुमार ने बताया कि 2006 में सदर थाना पुलिस ने करौंथा आश्रम के बाहर हुई हिंसा के मामले में रामपाल सहित 39 आरोपियों के खिलाफ हत्या व हत्या प्रयास सहित गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज किया था। तभी से जिला अदालत में मामले की सुनवाई चल रही है। तीन आरोपियों हवा सिंह, कृष्ण व महेंद्र सिंह की मौत हो चुकी है। जबकि पांच आरोपी हिसार जेल में बरवाला कांड के चलते बंद हैं, जिनमें रामपाल व उनके बेटे वीरेंद्र के अलावा राजेंद्र, प्रीतम व मनोज शामिल हैं। वहीं, आठ आरोपी केस के अंदर पीओ हो चुके हैं, जिनमें मुकेश, जगबीर, महेंद्र, रवींद्र, आजाद, प्रेम सिंह, सुरेंद्र व सतीश कुमार शामिल हैं। इसके अलावा 23 आरोपी जमानत पर चल रहे हैं, जो अदालत में हर सुनवाई पर आते हैं। इनमें धर्मेंद्र, सूरजमल, रामफल, बसंत, जगदीश, पुरुषोत्तम, हरजीत, अमित, विनय, सतीश चंद्र, सतपाल, कृष्ण, बिजेंद्र, जगबीर, जितेंद्र, अनिल कुमार, देवेंद्र, विजय, कृष्णकांत, बिजेंद्र, अशोक, रवींद्र व सुनील शामिल हैं। बात दें कि बिजेंद्र व जगबीर हरियाणा पुलिस के जवान हैं, जिन्हें रामपाल की सुरक्षा में लगाया गया था। दोनों केस में जमानत पर हैं।
यह था मामला
सोनीपत जिले के गांव धनाना निवासी रामपाल सिंचाई विभाग में जेई थे, लेकिन बाद में जेई की नौकरी छोड़कर उन्होंने करौंथा के पास सतलोक आश्रम बना लिया। स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा लिखित पुस्तक सत्यार्थ प्रकाश पर कथित टिप्पणी के चलते आर्य समाज के लोग रामपाल से नाराज हो गए । 2003 के बाद रामपाल करौंथा आश्रम में सत्संग करने लगे, जहां हजारों रामपाल समर्थक सत्संग में आने लगे। कथित टिप्पणी से आहत आर्य समाजियों और आसपास के ग्रामीणों में रोष फैल गया। 2006 में आश्रम के बाहर भीड़ जमा हो गई। जबकि अंदर हजारों रामपाल समर्थक सत्संग में आए हुए थे। माहौल तनावपूर्ण हो गया। इसी बीच झज्जर जिले के युवक सोनू की गोली लगने से मौत हो गई। मामला बढ़ता देखकर तत्कालीन हुड्डा सरकार ने केंद्र से सीआरपीएफ की टीम बुलाई। रातों-रात आश्रम को खाली करवाया गया था। साथ ही रामपाल सहित 39 लोगों के खिलाफ हत्या का केस दर्ज किया गया था, जिसकी सुनवाई तब से अदालत में चल रही है। केस के अंदर पुलिस ने 100 से ज्यादा गवाह बनाए थे, जिनमें 65 लोगों की गवाही हो चुकी है।