रोहतक। इंसान को कुछ करना हो तो लोग क्या कहेंगे? इन शब्दों के कोई मायने नहीं रहते। तभी सपनों को उड़ान दी जा सकती है। ऐसे ही बातों को भूलकर और अपने सपनों को जीने की खातिर उम्र के उस पड़ाव पर कुछ लोग अपने सपनों को उड़ान दे रहे हैं, जिस उम्र में लोग अक्सर आराम करने और बच्चों पर आश्रित होने की सोचने लगते हैं। ये अभिभावक ना सिर्फ अपने बच्चों के लिए बल्कि दूसरे अपने हमउम्रों के लिए भी मिसाल कायम करने की जिद के साथ आगे बढ़ रहे हैं। हम बात कर रहे हैं उन अभिभावकों की जिन्होंने सिनेमा की दुनिया में ना सिर्फ अपने को आगे बढ़ने का मौका दिया बल्कि खुद भी उनके कदम से कदम मिलाकर अपनी किस्मत आजमाने की राह खोज रहे हैं। जज्बा इतना है इनमें की बच्चे जहां सिनेमा की बारीकियों से रूबरू हो रहे हैं तो अभिभावक कैमरे को फेस करना सीख रहे हैं। सुपवा के विद्यार्थी जहां सिनेमा में एक्टिंग व फिल्म प्रोडक्शन में किस्मत आजमा रहे हैं तो उनके अभिभावक बच्चों की ही फिल्मों में एक्टिंग के लिए ऑडिशन दे रहे हैं। आइए हम मिलाते हैं आपको कुछ ऐसे ही यंग डायरेक्टरों, अभिनेताओं व उनके अभिभावकों से....।
55 की उम्र में पूरा किया अदाकारी का शौक
हरियाणवी फिल्म लख्मीचंद से 55 साल की जिंदर देवी ने अपने एक्टिंग करियर की शुरुआत की है। फिल्म में वह न सिर्फ ऑडिशन में सिलेक्ट हुईं बल्कि लख्मी चंद की पड़ोसन का रोल भी अदा कर रही हैं। वह फिल्म में हरियाणवी गीत, डांस और एक्टिंग करती नजर आएंगी। जिंदर ने बताया कि शादी से पहले ही उन्हें एक्टिंग, हरियाणवी डांस और गाने का शौक था, लेकिन कभी ये ना सोचा था कि वह भी फिल्माें में अदाकारी कर पाएंगी। पेशे से अभिनेता बड़े बेटे दीपक मोर ने मां के टैलेंट को परखा और उन्हें एक्टिंग में किस्मत आजमाने की सलाह दी। कभी स्कूल का चारदीवारी ना देखने वाली जिंदर देवी के लिए फिल्म के डायलॉग पढ़ना और कैमरे के आगे उनका संवाद करना लगभग नामुमकिन था, किंतु उन्होंने तो इसका भी अनोखा हल ढूंढ निकाला। डायरेक्टर के एक बार समझाने से ही जिंदर ने उन डायलॉग को याद किया और पूरे विश्वास के साथ कैमरे के सामने हरियाणवी में डायलॉग बोलते हुए अदाकारी की।
सिनेमाई माहौल के चलते अभिभावक भी नहीं रह सके अछूते
हरियाणवी शार्ट फिल्म जिसी की इसी तिसी से 50 साल की सुनीता नेहरा ने अपने एक्टिंग करियर की शुरुआत की। यह फिल्म हरियाणवी थी तो डायरेक्टर बेटे आशीष नेहरा ने अपनी मां को भी फिल्म में अदाकारी दिखाने का मौका दिया। उन दिनों आशीष को पता चला था कि मां को कैंसर है। इसलिए भी वह मां के साथ कुछ यादों को सहेजना चाहते थे। बाद में सुनीता की तबीयत में सुधार आया और उनमें एक्टिंग की चाह जगने लगी। सुनीता ने बताया कि एक्टिंग के माध्यम से ही उनमें आत्मविश्वास बढ़ा और उन्हें खुद के साथ जुड़ाव महसूस हुआ। इसके बाद वह डीजी लॉकर सरकारी एप के लिए भी एक्टिंग कर चुकी हैं। जब घर में सिनेमाई माहौल बनने लगा तो आशीष के पिता भी अछूते नहीं रह सकें। उन्होंने भी सुनीता को देखकर 57 की उम्र में अपनी चाहत पूरी करने की इच्छा बेटे के सामने जाहिर की। इसके बाद आशीष ने एक फिचर फिल्म (रूखसार) में पिता राकेश नेहरा को अहम किरदार अदा करने का मौका दिया।
शार्ट मूवी के जरिये हुए परदे के पीछे की दुनिया से रूबरू
सिनेमेटोग्राफर सुष्मिता वत्स फिलहाल सुपवा एफटीवी विभाग में पांचवें सेमेस्टर की छात्रा हैं। चौथे सेमेस्टर के प्रोजेक्ट वर्क के दौरान बनाई गई शार्ट फिल्म ऑल वी निड इज लव में उन्होंने अपने पापा-मम्मी को कास्ट किया। पापा जगबीर शर्मा व मां सुनीता शर्मा को शुरू से ही बेटी के काम में रुचि रहती थी। इस प्रोजेक्ट वर्क में विद्यार्थियों को अपनी स्टोरी खुद ही लिखनी होती है। इसलिए सुष्मिता ने कोई ओर कहानी चुनने की बजाए अपने घर का ही एक छोटा सा वाक्या शार्ट मूवी के रूप में पेश किया। परेशानी यह थी कि वह अपने मम्मी-पापा को भी इसमें शामिल करना चाहती थी। ऐसे में उसने अभिभावकों के साथ इस शार्ट मूवी को शेयर किया तो वह खुशी-खुशी इसके लिए तैयार हो गए। 49 वर्षीय जगबीर शर्मा ने बताया कि बेटी के इस प्रोजेक्ट वर्क में माध्यम से वह भी सिनेेमाई लाइन से रूबरू होना चाहते थे। उनके मन में भी जिज्ञासा थी की परदे के पीछे की दुनिया कैसी है और कैसे उनकी बेटी काम करती है। उन्हाेंने बताया कि वह आगे भी अपनी बेटी के साथ उसकी सिनेमाई लाइन से जुड़े रहना चाहते हैं।