नगर निगम के सीनियर डिप्टी मेयर व डिप्टी मेयर के चुनाव दो साल की देरी से हुई, फिर भी भाजपा डिप्टी मेयर के चुनाव में हार से नहीं बच सकी। भाजपा में अपनी पकड़ से राजकमल सहगल सीनियर डिप्टी मेयर बनने में कामयाब रहे, जबकि पार्टी से टिकट न मिलने के बावजूद अनिल कुमार ने पार्षदों में पकड़ के दम पर शानदार जीत हासिल की। भाजपा प्रत्याशी धर्मेंद्र गुलिया ने चुनाव अधिकारी को वोटिंग में कॉलम को लेकर आपत्ति भी जताई, लेकिन बाद में आपत्ति वापस ले ली। वहीं, हाशिये पर गई भाजपा पार्षद कंचन खुराना के पति अशोक खुराना ने पूर्व मंत्री मनीष ग्रोवर के इशारे पर राजनीति हत्या करने का आरोप लगाया। हालांकि पूर्व मंत्री ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया, केवल इतना कहा कि प्रत्याशी पार्टी ने तय किए हैं।
सहगल ने दिखाई संगठन में पकड़, शहर में भाजपा के दूसरे पंजाबी नेता बनकर उभरे
नगर निगम के सर्वसम्मति से सीनियर डिप्टी मेयर बने राजकुमार सहगल पुराने सियासी परिवार ताल्लुक रखते हैं। उनके दादा सुंदर सिंह सहगल 1987 में नगर परिषद में पार्षद रहे, जबकि चाचा रमेश सहगल 1991 में न केवल पार्षद बने, बल्कि कुछ समय अध्यक्ष भी रहे। इसके अलावा सुंदर सिंह सहगल 1997 व रमेश सहगल 2011 में हिंदू संस्था के प्रधान रह चुके हैं। अब सहगल परिवार की तीसरी पीढ़ी ने कामयाबी हासिल की है। दिल्ली में कारोबार करने वाले राजकमल उर्फ राजू सहगल की पार्टी संगठन में अच्छी पकड़ है। सूझबूझ के तहत वे सीनियर डिप्टी मेयर की कुर्सी तक पहुंचे। जब भी चुनाव लड़ने की बात हुई तो उन्होंने कहा कि अगर पार्टी संगठन कहेगा तो वे मैदान में उतरेंगे। अब पार्टी ने ही उनको मैदान में उतारा। हालांकि भाजपा के बागी व कांग्रेसी पार्षदों ने सीनियर डिप्टी मेयर के लिए भी रणनीति तैयार कर रखी थी। चुनाव से ठीक पहले पार्टी से बगावत कर दो दावेदारों ने चुुनाव लड़ने से इनकार कर दिया। इस तरह भाजपा में शहर के अंदर राजकमल सहगल पूर्व मंत्री मनीष ग्रोवर के बाद दूसरे दमदार पंजाबी नेता बनकर उभरे हैं।
जीत के कारण : पार्टी संगठन में मजबूत पकड़। प्रदेश अध्यक्ष तक का मिला आशीर्वाद।
- पुराना सियासी परिवार, दादा व चाचा पार्षद के साथ-साथ हिंदू संस्था के प्रधान रह चुके।
- पार्टी से हरी झंडी मिलने के बाद पूर्व मंत्री मनीष ग्रोवर का भी लिया आशीर्वाद।
- भाजपा के बागी व कांग्रेसी पार्षदों का आखिरी क्षण में बिगड़ा खेल, जिन दो पार्षदों को लड़वाना चाहते थे चुनाव, वे मैदान से हटे।
- बिना प्लानिंग के एकदम हाउस में राजकमल सहगल के खिलाफ नहीं लड़ा किसी पार्षद ने सीनियर डिप्टी मेयर का चुनाव।
पूर्व कांग्रेसी पार्षद अनिल ने दो साल में दूसरी बार भाजपा को दी मात, फिर भी भाजपाई
वार्ड नंबर 21 से लगातार दूसरी बार जीतकर आए पार्षद अनिल कुमार ने दो साल के अंदर दूसरी बार भाजपा को हराया है। दिसंबर 2018 में अनिल ने वार्ड से भाजपा प्रत्याशी प्रवीण कौशिक को शिकस्त दी थी। अब डिप्टी मेयर के चुनाव में अनिल ने भाजपा प्रत्याशी धर्मेंद्र गुलिया को पांच वोटों से हराकर जीत हासिल की। हालांकि अब भी अनिल कुमार का कहना है कि चाहे पार्टी ने उनको डिप्टी मेयर का टिकट नहीं दिया, लेकिन अब भी वे भाजपा में ही रहेंगे। उनका मुख्य उद्देश्य पार्षदों व शहर के आम आदमी का काम करवाना है।
जीत के कारण : जाट पार्षदों के साथ गैर जाट पार्षदों में अच्छी पकड़।
- भाजपा के 12 पार्षदों के अलावा कांग्रेस के दो पार्षदों ने भी दिया साथ।
- समय रहते भाजपा से टिकट न मिलने पर पार्षदों के दम पर तैयारी कर दी थी शुरू।
- हर पार्षद से व्यक्तिगत तौर पर मिले और मांगा समर्थन।
- मिलनसार व्यवहार और सियासी सूझबूझ।
पूर्व मंत्री मनीष ग्रोवर के इशारे पर हुई मेरी राजनैतिक हत्या : खुराना
सीएम मनोहर लाल को पत्र लिखकर सीनियर डिप्टी मेयर का टिकट मांगने वाली महिला पार्षद कंचन खुराना को पार्टी ने टिकट नहीं दिया। उनके पति एवं पूर्व पार्षद अशोक खुराना का कहना है कि पार्टी व संगठन ने मेरे साथ अन्याय किया है। उन्होंने पार्टी नेतृत्व से चुनाव में प्रत्याशी बनाए जाने की मांग की थी, लेकिन पूर्व मंत्री ने अपनी हठधर्मिता के चलते यह नहीं होने दिया। एक तरह से पूर्व मंत्री ने उनकी राजनीति हत्या की है।
सीनियर डिप्टी मेयर व डिप्टी मेयर के चुनाव में टिकट मैंने नहीं, पार्टी ने तय किया है। पूर्व पार्षद मेरे ऊपर आरोप लगाने के बजाय संगठन में बात रखें। डिप्टी मेयर का चुनाव दोनों भाजपा पार्षदों ने लड़ा है। अनिल कुमार की जीत एक तरह से भाजपा की जीत है।
- मनीष ग्रोवर, पूर्व सहकारिता मंत्री।
यह मेरी नहीं, मेरे साथी पार्षदों की जीत है। मुश्किल घड़ी में पार्षदों ने खुलकर मेरा साथ दिया। उनका अहसान नहीं चुका पाऊंगा। मेरी पहली प्राथमिकता नगर निगम हाउस की कमेटियां का गठन करवाने की रहेगी। ताकि सभी पार्षदों को उनमें जगह मिल सके और आम जनता के काम हो सकें।
- अनिल कुमार, नवनिर्वाचित डिप्टी मेयर, नगर निगम।
भाजपा संगठन ने मेरे ऊपर जो भरोसा दिखाया है, उसके लिए पार्टी प्रदेश अध्यक्ष सहित पूर्व संगठन मंत्री सुरेश भट्ट, जिला अध्यक्ष, मेयर व पूर्व मंत्री मनीष ग्रोवर का आभारी रहूंगा। मेरी पहली प्राथमिकता लंबे समय से शहर के ठप पड़े विकास कार्यों को करवाने की रहेगी। इसके लिए मेयर मनमोहन गोयल व डिप्टी मेयर अनिल कुमार के साथ मिलकर काम करेंगे।
- राजकमल सहगल, नवनिर्वाचित सीनियर डिप्टी मेयर, नगर निगम।
मैंने पहले ही कह दिया था कि उनके साथ 13 पार्षद हैं। अब डिप्टी मेयर के चुनाव में अनिल कुमार को 14 वोट मिलने से बात साबित भी हो गई है। भाजपा प्रत्याशी को मात्र 9 वोट मिले हैं। सीनियर डिप्टी मेयर का चुनाव लड़ने के लिए दो पार्षदों ने हामी भरी थी। इनमें एक महिला पार्षद थी। एक दिन पहले दावेदार जयभगवान ठेकेदार ने चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया। जबकि बुधवार सुबह महिला पार्षद के पति ने इनकार कर दिया। इस तरह योजना गड़बड़ा गई। जबकि डिप्टी मेयर के लिए प्लान तैयार था। अनिल ने भी हिम्मत दिखाई और चुनाव मैदान में उतकर जीत हासिल की।
- कदम सिंह अहलावत, कांग्रेस समर्थक पार्षद, वार्ड 11
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निगम की तीनों कुर्सियां पुराने भाजपाइयों से दूर
नगर निगम हाउस में चाहे भाजपा का दबदबा है, लेकिन पुराने भाजपाई हाशिये पर हैं। मेयर मनमोहन गोयल के पिता सेठ किशनदास पूर्व कांग्रेसी मंत्री रहे। जबकि सीनियर डिप्टी मेयर बने राजकमल सहगल भाजपा में आने से पहले इनेलो में थे। जबकि डिप्टी मेयर बने अनिल कुमार पुराने कांग्रेस समर्थक हैं। हालांकि मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर फिलहाल भाजपा में हैं।