रोहतक। तिलक नगर में स्पंदन संस्था की ओर से प्रो. विकास बुधवार की अध्यक्षता में काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस दौरान कार्यक्रम में पवन गहलोत ने मंच संचालन किया। काव्यगोष्ठी में उपस्थित कवियों ने अपनी कविताओं के माध्यम से प्रकृति, समाज, गांव, वैश्विक शांति, नारी विमर्श, व्यवस्था, विचारों को साझा किया।
कार्यक्रम कवियों ने हिंदी और अंग्रेजी भाषा के साथ ही हरियाणवी बोली में भी अपनी कविताएंं सुनाई। कृष्ण लाल ने युद्ध से प्रभावित आम जनमानस की मनोदशा का कविता ''''''''वर्ल्ड वरीज वार'''''''' के माध्यम से वर्णन किया। इसके साथ ही पर्यावरण के संरक्षण का संदेश देते हुए अपनी प्यारी धारा को बचा लीजिए गीत के माध्यम से जागरूक किया। कवयित्री आशा ने मोबाइल की दुनिया में आपसी मेलजोल का अंत होने के प्रति कविता के माध्यम से चिंता व्यक्त की साथ ही बेजुबान पक्षियों की अनुभूति को स्वर देते हुए कहा हे मानव ! समझो हमारी मजबूरी, खुले गगन की हम वासी, पिंजरे हमें नहीं भाते। कवि अविनाश सैनी ने गांवों के प्रति अपनी अनुभूति को कुछ इस प्रकार व्यक्त किया वह मेरे गांव की माटी, भुला दूं किस तरह आखिर, वह बूढ़े बाप की लाठी, भूला दूं किस तरह आखिर। कवि पवन गहलोत ने अपनी कविताओं के माध्यम से आधुनिकता की अंधी दौड़ के कारण बदलते जा रहे सामाजिक परिवेश का वर्णन किया। प्रो. विकास बुधवार ने अपनी कविता ''''''''चाय ठंडी केतली गरम'''''''' के माध्यम से व्यवस्था पर कटाक्ष किया। इसके साथ ही हरियाणवी कविता के माध्यम से कन्या भ्रूणहत्या पर भी अपने विचार प्रस्तुत किए। कार्यक्रम के अंत में अपनी अध्यक्षीय वक्तव्य में प्रो. विकास बुधवार ने हिंदी साहित्य में विभिन्न कवियों के योगदान को याद किया।