मुश्किलों के अखाड़े में हौसलों का दंगल लड़ने वाली बेड़वा की कुश्ती क्वीन को अब मदद की आस जगी है।
नेशनल पहलवान नीतू को रेलवे से नौकरी का न्यौता मिला है। जबकि पूरे देश में सबसे बेहतरीन खेल नीति का दावा करने वाली हरियाणा सरकार अब भी उदासीन बनी हुई है।
नीतू नेशनल स्तर पर मेडल जीतकर प्रदेश का नाम रोशन कर रही है तो इंटरनेशनल स्तर पर भी हरियाणा का प्रतिनिधित्व कर चुकी है।
बावजूद इसके पहलवान को सरकार की अनदेखी का शिकार होना पड़ रहा है। लेकिन अब रेलवे के अधिकारियों का फोन आने पर कुछ आस जगी है, क्योंकि मंत्रालय में उसके प्रमाण पत्र व अन्य कागजात मांगे गए हैं।
भिवानी की बेटी और बेड़वा की बहू नीतू (21) की कहानी नारी सशक्तिकरण की बड़ी मिसाल पेश करती है। 13 साल की उम्र में अधेड़ से शादी। एक माह बाद ही शादी टूट जाना और दूसरे युवक से शादी होना।
14 की उम्र में जुड़वां बच्चों की मां। बचपन में देखा पहलवान बनने का सपना। 2011 में सपने को पूरा करने की शुरुआत। गरीबी दूर करने के लिए घर पर सिलाई और सुबह-शाम प्रैक्टिस के लिए रोजाना 200 किलोमीटर का सफर। अब नेशनल स्तर पर मेडल का अंबार और इंटरनेशनल स्तर पर भागीदारी।
नीतू के ओलंपिक के सपने को 12 अक्तूबर के अंक में अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित किया। उसकी हिम्मत और कामयाबी को देखते हुए रेलवे ने नौकरी का न्यौता दिया है। नीतू ने बताया कि मेरे पास दिल्ली से रेलवे अधिकारी का फोन आया और उसे रेलवे भवन में प्रमाण पत्र व अन्य कागजात के साथ बुलाया गया है। नौकरी मिलने से नीतू का ओलंपिक में खेलने का सपना भी पूरा हो सकता है।
वर्जन
जिला खेल अधिकारी ओमपति मल्हान ने बताया कि वर्ष 2014-15 में मेडल जीतने व भागीदारी करने वालों को अवार्ड के लिए अप्रैल 2016 में आवेदन करना होगा। उसके बाद ही उनको खेल नीति के तहत सरकार से अवार्ड की राशि मिल सकेगी।