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Rohtak News: डॉक्टरों की कमी से दम तोड़ रहा रेडियोलॉजी विभाग, विभागाध्यक्ष ने बाहरी रिपोर्ट मान्य करने को कहा

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14 : पीजीआई के रेडियोलॉजी विभाग में उप​स्थित मरीज। संवाद
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रोहतक। प्रदेश के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थान पीजीआई के रेडियोलॉजी विभाग का दम टूटने लगा है। विभाग में फैकल्टी और अन्य स्टाफ की कमी गले की फांस बनी हुई है। इसका सीधा असर मरीजों के इलाज पर पड़ रहा है। हालात ऐसे हो चुके हैं कि विभागाध्यक्ष डॉ. ज्योत्सना को स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय और संस्थान से बाहर की जांच रिपोर्ट को मान्य मानते हुए इलाज करने की अपील करनी पड़ रही है। उन्होंने गंभीर स्थिति वाले मरीजों के लिए ही संस्थान के अंदर रेडियोलॉजी जांच लिखने की बात कही है।
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इतना ही नहीं, संस्थान में रेडियोलॉजी सेवाओं का लाभ लेने के लिए कंसल्टेंट डॉक्टर के हस्ताक्षर भी अनिवार्य करने को कहा है। फिलहाल रेजिडेंट या पीजी डॉक्टरों की ओर से अंदर ही जांच लिखी जा रही है। ऐसे में सवाल यह है कि अस्पताल में ज्यादातर मरीजों का इलाज रेजिडेंट या अन्य जूनियर डॉक्टरों की ओर से होता है। हर समय कंसल्टेंट कैसे उपलब्ध रहेगा? विभागाध्यक्ष ने कार्यकारी परिषद में कहा कि स्टाफ की कमी के कारण विभाग पर रूटीन जांच का बोझ बढ़ रहा है।

तीन फैकल्टी के सहारे विभाग, जनवरी 2027 में सेवानिवृत्त होंगी विभागाध्यक्ष
विभाग में फैकल्टी के करीब 11 पद हैं। इनमें से केवल तीन पद ही भरे हुए हैं। इनमें विभागाध्यक्ष डॉ. ज्योत्सना भी शामिल हैं। सूत्रों के मुताबिक, हाल ही में एक फैकल्टी सदस्य ने त्यागपत्र दे दिया था, हालांकि बाद में वापस ले लिया गया। आगामी वर्ष जनवरी में विभागाध्यक्ष डॉ. ज्योत्सना भी सेवानिवृत्त होने वाली हैं। इसके बाद विभाग कैसे चलेगा, यह बड़ा सवाल बना हुआ है।
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पीजी सीटों की संख्या घटकर छह हुई
विभाग में फैकल्टी की कमी के कारण पीजी विद्यार्थियों की सीटों की संख्या घटकर छह रह गई है। पहले यह संख्या 15 तक थी, लेकिन फैकल्टी सदस्यों की संख्या घटने के साथ ही सीटें भी कम होती गईं। जनवरी में विभागाध्यक्ष के सेवानिवृत्त होने के बाद सीटों की संख्या घटकर तीन होने की आशंका भी बनी हुई है।

प्रतिदिन अल्ट्रासाउंड की संख्या 50 करने पर हो चुका विरोध
पीजीआई में सुबह छह बजे पहुंचने के बाद भी अल्ट्रासाउंड नहीं होने से नाराज मरीज कुलपति डॉ. एचके अग्रवाल के कार्यालय का घेराव भी कर चुके हैं। विभाग में रोजाना अल्ट्रासाउंड की संख्या घटाकर 50 कर दी गई है, जबकि करीब 500 मरीज प्रतिदिन पहुंचते हैं।

कॉन्ट्रैक्ट पर भर्ती और कम छुट्टियों के कारण नहीं आ रहे विशेषज्ञ
सूत्रों के अनुसार, नियमित भर्ती नहीं होने और कॉन्ट्रैक्ट पर मिलने वाली कम सैलरी व छुट्टियों के कारण विशेषज्ञ यहां नहीं आना चाहते। रेडियोलॉजी को हर मरीज के इलाज की रीढ़ माना जाता है। बीमारी की पहचान से लेकर इलाज की पुष्टि तक में इसकी भूमिका अहम रहती है।

वर्जन
पीजीआई में जल्द ही स्थायी भर्तियों की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इससे कम फैकल्टी वाले विभागों में डॉक्टरों की कमी पूरी हो जाएगी। संस्थान मरीजों के हित में कदम उठा रहा है।
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— डॉ. उमेश यादव, जनसंपर्क अधिकारी, पीजीआई
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