विधायक ने लोगों की समस्याएं सुनने के लिए जनता दरबार लगाया। लेकिन दरबार
जंग का अखाड़ा बन गया और जमकर लात-घूंसे चले। वैश्य संस्था से निकाले गए
कर्मचारी विधायक से मिलने पहुंचे, जिनको एक कार्यकर्ता ने रोक लिया। महिला
कर्मी ने जबरन विधायक से मिलने का प्रयास किया तो उसके साथ धक्कामुक्की की
गई।
महिला ने विधायक के साथ आए एक कार्यकर्ता पर थप्पड़ मारने का आरोप
लगाया तो हंगामा हाथापाई में बदल गया। कर्मचारी कार्यकर्ताओं से भिड़ गए और
थप्पड़ जड़ने के आरोपी की पिटाई कर दी। दोनों ओर से जमकर लात-घूंसे चले।
बीच बचाव करने आई पुलिस के साथ भी हाथापाई की गई। घंटे भर हंगामा चला और
टेंट भी फाड़ दिया गया। बवाल होने पर विधायक दरबार बीच में छोड़कर ही निकल
लिए।
शहर की सबसे बड़ी कॉलोनियों में से एक जनता कालोनी में शुक्रवार
दोपहर को विधायक मनीष ग्रोवर अफसराें और कार्यकर्ताओं के दलबल के साथ
समस्या सुनने पहुंचे। भाजपा जिलाध्यक्ष रमेश भाटिया भी साथ थे। विधायक ने
लोगों की समस्याएं सुननी शुरू की तो वैश्य संस्था से निकाला गया एक
कर्मचारी वहां पहुंचा और विधायक से नोकझोंक करने लगा। उसे पुलिस ने वापस
लौटा दिया।
इसके कुछ देर बाद संस्था से निकाले गए करीब 40 कर्मचारी दरबार
में पहुंच गए। सभी सरकार और विधायक के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। उनमें से
एक महिला सीता देवी ने मंच तक पहुंचने का प्रयास किया तो विधायक के साथ आए
एक कार्यकर्ता ने धक्कामुक्की शुरू कर दी।
सीता देवी का आरोप है कि
कार्यकर्ता जसवीर उर्फ जस्सू ने उसे थप्पड़ मारा। जिससे कर्मचारी भड़क गए
और कार्यकर्ता को पीटना शुरू कर दिया। साथी को पिटता देख अन्य कार्यकर्ता
भी कर्मचारियो से भिड़ गए और दोनों ओर से जमकर लात-घूंसे चले। लात-घूंसे
चलते रहे और विधायक व जिलाध्यक्ष आराम से बैठकर सब कुछ देखते रहे। काफी देर
बाद भी मारपीट नहीं रुकी तो पुलिस बीच में आई।
लेकिन पुलिस के साथ भी
हाथापाई शुरू हो गई और पुलिस कर्मियों को धक्का देकर पीछे कर दिया गया।
हालांकि बाद में पुलिस ने सख्ती दिखाई और दोनों पक्षों को अलग-अलग किया।
इसके बाद भी मामला शांत नहीं हुआ और गुस्साई भीड़ ने टेंट फाड़ दिया।
एकबारगी तो पूरा टेंट गिरने को हो गया, जिसे विधायक के सुरक्षा कर्मियों ने
थाम लिया। मारपीट में वैश्य संस्था की कर्मचारी सीता देवी और कार्यकर्ता
जसवीर घायल हुए हैं।
कई लोगों को मामूली चोट भी आई। बवाल होता देखकर विधायक
दरबार बीच में ही छोड़कर निकल गए। विधायक के जाने के बाद भी लोग समस्या
बताने के लिए खड़े रहे, लेकिन अमला नहीं रुका। विभागों के अधिकारी भी आराम
से चुपचाप निकल लिए।
विधायक से सीधी बात
सवाल: विधायक जी, आपके जनता दरबार में मारपीट की नौबत क्यों आई?
जवाब:
जनता दरबार लोगों की समस्या सुनने के लिए लगाया जाता है और लोगों की
समस्याएं आराम से सुनी जा रही थी। लेकिन कुछ लोगों को हीरो बनने की आदत है,
जिन्होंने यहां आकर हंगामा किया।
सवाल: आपके कार्यकर्ता पर महिला ने पहले थप्पड़ मारने का आरोप लगाया है
जवाब:
हमारे किसी कार्यकर्ता ने महिला को थप्पड़ नहीं मारा है। हमारे कार्यकर्ता
जनसमर्पित हैं, जो जनता के लिए काम करते हैं। वह किसी को ऐसे थप्पड़ नहीं
मार सकते हैं।
सवाल: आपके सामने पूरा हंगामा हुआ, मारपीट हुई।
जवाब:
यहां पूरी तरह से शांति थी। लेकिन राजनीतिक रंजिश के तहत लोगों को हंगामा
करने के लिए ही यहां भेजा गया। यहां मारपीट जैसी कोई बात नहीं हुई है।
सवाल: राजनीति के तहत किसने भेजा था?
जवाब:
यह मुझे पता है किसने भेजा है। क्योंकि कुछ लोगों को शराब पिलाकर भेजा गया
था और जिसने पहले आकर हंगामा किया था, वह शराब के नशे में था। वह केवल
व्यवस्था बिगाड़ने के लिए ही आए थे।
सवाल: वैश्य संस्था के कर्मचारी कह रहे हैं कि आप कुछ नहीं कर रहे हैं और केवल आश्वासन दे रहे हैं।
जवाब:
मेरी इस बारे में डीसी से लगातार बात हो रही है और जैसी भी बात हुई है,
उसके बारे में रेस्ट हाउस में वैश्य संस्था के पदाधिकारियों के साथ बैठक
में सब कुछ बता दिया गया था। उनको आश्वासन भी दिया गया था कि जल्द ही
समाधान होगा।