रोहतक। अशोका चौक से झज्जर चुंगी तक सवा करोड़ में बनी 2.2 किलोमीटर लंबी सड़क की गुणवत्ता की जांच होगी। मुख्यमंत्री उड़नदस्ते व खुफिया विभाग की टीम ने मंगलवार को पीडब्ल्यूडी व नगर निगम की संयुक्त टीम तैयार कर सड़क के चार जगह से सैंपल भरे। अब लैब से सैंपल रिपोर्ट के आधार पर मामले में कार्रवाई होगी। तब तक नगर निगम को ठेकेदार की राशि का भुगतान न करने की हिदायत दी गई है।
नवंबर में नगर निगम की तरफ से टेंडर जारी करके अशोका चौक से ओल्ड आईटीआई होते हुए झज्जर चुंगी तक सड़क का निर्माण कराया गया। निर्माण के कुछ समय बाद ही सड़क से रोड़ी निकलने लगी। तत्कालीन मेयर मनमोहन गोयल मौके पर पहुंचीं और सड़क की जांच की। जांच के बाद तत्काल आयुक्त जितेंद्र दहिया को अवगत कराया। आयुक्त ने इंजीनियरिंग ब्रांच को जांच के आदेश दिए। इसके बावजूद सड़क के सैंपल नहीं भरे जा सके। बाद में ठेकेदार ने दोबारा सड़क बना दी। जब निगम के कार्यकारी अभियंता मनदीप धनखड़ से बात की तो उन्हाेंने कहा था कि सड़क के सैंपल भरने थे, लेकिन कभी ठेकेदार नहीं आया तो कभी वार्ड का पार्षद राधेश्याम ढल वाराणसी चला गया। फिर उनको समय नहीं मिला। इसके बाद मामला फाइलों में दब गया। इसी बीच लोकसभा चुनाव आ गए, जिसमें दो माह के करीब का समय निकल गया।
मुख्यमंत्री उड़नदस्ते ने लिया संज्ञान, चार जगह से भरे गए सैंपल
मंगलवार को मुख्यमंत्री उड़नदस्ता मौके पर पहुंचा और सड़क का औचक निरीक्षण किया। इसके बाद पीडब्ल्यूडी के एसडीई कृष्ण कुमार, जेई विनोद दहिया, नगर निगम के एसडीई सुनील चुघ व जेई विक्रम की संयुक्त टीम बनाई। साथ में खुफिया इकाई की टीम भी रही। संयुक्त टीम ने 2.2 किलोमीटर लंबी सड़क का पहला सैंपल लेबर चौक, दूसरा सैंपल ओल्ड आईटीआई के पास पुल से पहले, तीसरा पुल से नीचे उतरने व चौथा झज्जर चुंगी से पहले लिया। मुख्यमंत्री उड़नदस्ते को शक है कि सड़क निर्माण में निम्न स्तर की सामग्री का इस्तेमाल किया गया है। जांच के दौरान सड़क का निर्माण करने वाला ठेकेदार भी मौजूद रहा, जिसके सामने सैंपलिंग की गई है। चारों सैंपल अब जांच के लिए लैब में भेजे जाएंगे। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।
वर्जन
ठेकेदार की पेमेंट रोकी हुई है। मंगलवार को सड़क के चार जगह से सैंपल लिए गए, जिसमें निगम की टीम भी शामिल रही। लैब की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।
- मनदीप धनखड़, कार्यकारी अभियंता नगर निगम
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जब सड़क बनी, उसी समय सैंपल के लिए निगम अधिकारियों को कहा था, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। कार्यकाल खत्म होने के बाद डीसी से बात की। डीसी ने सख्ती दिखाई तो दोबारा सड़क बनी। अब सैंपलिंग का क्या औचित्य है।
- मनमोहन गोयल, पूर्व मेयर नगर निगम