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शरीर, बुद्धि, मन और आत्मा की शुद्धि ही वास्तविक स्वास्थ्य है : रणवीर शास्त्री

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23सीटीके03..आर्य पारिवारिक सत्संग सभा की ओर से शिवाजी कॉलोनी में चतुर्वेद शतकम विशिष्ट यज्ञ करत
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रोहतक। आदान-प्रदान से जीवन चलता है। हम समाज से लेते हैं तो समाज को देना भी हमारा कर्तव्य है। इसके लिए हमें जीवन को यज्ञमय बना होगा। यह विचार आचार्य रणवीर शास्त्री के। वे शनिवार को आर्य पारिवारिक सत्संग सभा की ओर से शिवाजी कॉलोनी में आयोजित तीन दिवसीय चतुर्वेद शतकम विशिष्ट यज्ञ के दूसरे दिन श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे।
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उन्होंने कहा कि हमें द्वेष त्यागकर परस्पर मित्र-भाव से व्यवहार करना चाहिए। साधना करते हुए जीवन का सदुपयोग करना चाहिए। शरीर, बुद्धि, मन और आत्मा की शुद्धि ही वास्तविक स्वास्थ्य है। इससे पूर्व जयपुर से आए आचार्य अवनीश मैत्रि के ब्रह्मत्व में यजुर्वेद व सामवेद के मंत्रों के साथ यज्ञ संपन्न हुआ। मुख्य यजमान राज दुआ, कोषाध्यक्ष वरिंदर सहगल, मधु विरमानी, रोहित जुनेजा, आशु दुआ, अनिल दुआ, यशिका, चंचल एवं संदीप काहनी, सुहासिनी और अंकुर अरोड़ा रहे।
आचार्य ने कहा कि यज्ञ की क्रियाएं आध्यात्मिक संदेश देती हैं। अनिल ने ईश्वर की महिमा बताते हुए, भगवान जैसा कोई नहीं, भजन सुनाया। भजन उपदेशक पंडित सुमित्र देव ने कहा कि ईश्वर भक्ति से दुःख सहने की शक्ति प्राप्त होती है। सभा के प्रधान पवनजीत ने बताया कि यज्ञ की पूर्णाहुति रविवार 24 नवंबर को होगी। मंच संचालन मंत्री सचिन दुआ ने किया। कार्यक्रम में संजीव सचदेवा, सतीश आर्य, हितेश मदान, संजय कथूरिया, मनीष, सतीश आर्य, बलबीर मोई हुड्डा, आनंद शास्त्री उपस्थित रहे।
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