रबी की फसलों की आधिकारिक खरीद एक अप्रैल 2021 से शुरू होनी है, लेकिन अब तक मंडी में मजदूर नहीं आए हैं। कोरोना संक्रमित भी लगातार बढ़ रहे हैं। लॉकडाउन को लेकर असमंजस में फंसे मजदूरों ने अब तक मंडियों का रुख नहीं किया है। उन्हें आशंका है कि यदि लॉकडाउन लग गया तो वे फिर फंस जाएंगे।
जानकारी के मुताबिक रोहतक की नई अनाज मंडी में 80 आढ़ती हैं, जिनके पास हर साल रबी और खरीफ फसलों के मौसम में उत्तर प्रदेश और बिहार से करीब दो हजार मजदूर आते हैं। इसमें सभी आढ़तियों के अपने मजदूर तय हैं, वे उन्हीं के पास जाते हैं। खरीद शुरू होने से पहले आढ़ती उन्हें फोन करके बुलाते हैं। चार दिन बाद खरीद शुरू होने वाली है, ऐसे में स्थानीय आढ़ती अपने मजदूरों को फोन कर रहे हैं, लेकिन वे स्थिति स्पष्ट नहीं कर रहा है। उसे आशंका है कि कहीं गत वर्ष की तरह वह इस बार भी लॉकडाउन में फंस न जाय।
गत वर्ष भी आई थी ऐसी स्थिति
गत वर्ष लॉकडाउन के दौरान भी मजदूरों की कमी हो गई थी। इस दौरान सब्जी मंडी और अन्य जगहों से कुछ मजदूर बुलाकर काम चलाया गया था। इसके बाद भी खरीद की रफ्तार काफी कम रही थी।
पं. बंगाल से नहीं आ रहे सिलाई के कारीगर
हर खरीद सीजन में बोरियों की सिलाई के लिए पश्चिम बंगाल से यहां 50-60 कारीगर आते हैं। इस बार कोरोना के कारण वे भी नहीं आए हैं। हालांकि पश्चिम बंगाल में इस समय विधानसभा चुनाव भी चल रहा है। उनके नहीं आने का यह भी एक कारण हो सकता है। पिछले खरीफ सीजन में भी सिलाई के कारीगर नहीं आए थे, जिससे काफी दिक्कत हुई थी।
पर्याप्त बारदाना उपलब्ध नहीं
गेहूं और सरसों की खरीद के लिए पर्याप्त बारदाना भी उपलब्ध नहीं है। ये बारदाने कोलकाता से मंगाए जाते हैं। रोहतक की नई अनाज मंडी में इस बार पचास किलो की करीब 15 लाख बारदानों की जरूरत पड़ेगी। जिले भर की मंडियों के लिए पचास लाख बारदाने चाहिए, लेकिन पर अभी तक पर्याप्त बारदाना उपलब्ध नहीं है।
बैठक में भी उठा मुद्दा
उपायुक्त कैप्टन मनोज कुमार ने शुक्रवार को बैठक कर रबी की फसलों की खरीद के प्रबंधों का जायजा लिया था। उस बैठक में भी यह मुद्दा उठा था कि पिछले खरीफ सीजन में मजदूरों की किल्लत से काफी परेशानी आई थी। इस बार भी हालात वैसे ही बन रहे हैं। दूसरे राज्यों से मजदूरों के न आने की स्थिति में वैकल्पिक इंतजाम करने पड़ सकते हैं।
रोहतक मंडी में उत्तर प्रदेश और बिहार से हर खरीद सीजन में करीब दो हजार मजदूर आते हैं। इसके अलावा बारदानों की सिलाई के लिए 50-60 कारीगर पश्चिम बंगाल से आते हैं। कोरोना के चलते अभी कोई मजदूर नहीं आया है। आढ़ती मजदूरों को फोन कर रहे हैं, लेकिन वे अभी तक असमंजस में हैं। उन्हें लग रहा है कि लॉकडाउन लगा तो वे यहीं फंस जाएंगे।
-हर्ष गिरधर, जिला प्रधान, आढ़ती एसोसिएशन
खरीद सीजन में करीब पचास लाख बारदानों की जरूरत पड़ने की उम्मीद है। इसमें से लगभग साठ प्रतिशत बारदाना आ चुका है। बाकी भी खरीद शुरू होने तक आ जाएगा, कोई दिक्कत नहीं आएगी। मजदूरों की समस्या है, लेकिन आढ़ती अपने स्तर पर कोई समाधान निकालेंगे। मनरेगा वाले मजदूर उपयुक्त नहीं होंगे, वे सिर्फ हेल्पर का काम कर सकते हैं।
- वरिंदर सिंह, जिला खाद्य व आपूर्ति नियंत्रक