कृषि कानूनों के खिलाफ 26 मार्च को सफलतापूर्वक चक्का जाम करने के बाद किसान संगठन अगली रणनीति बनाने में जुट गए हैं। इसके लिए संयुक्त किसान मोर्चे ने दो अप्रैल को बैठक बुलाई है।
किसान संगठनों को इस बात की चिंता है कि आगामी कुछ समय में बड़े आंदोलन का आह्वान नहीं किया जा सकता है। सरसों की कटाई शुरू हो चुकी है, जल्द ही गेहूं की कटाई भी शुरू होने वाली है। उसके बाद किसानों अपनी फसलें बेचने मंडियों में जाना होगा। फिर धान की रोपाई की जाएगी। हालांकि उसमें किसानों को समय मिलेगा। लेकिन अभी किसानों का जल्द गांव लौटना बेहद जरूरी है। ऐसे में किसान संगठन विचार कर रहे हैं कि कम से कम फसलों की कटाई और बिक्री तक कोई बड़ा आंदोलन न करें। इस बात पर भी विचार किया जा रहा है कि धरने पर बैठे किसान ग्रुपों में गांव आएं। एक ग्रुप काम निपटाने के बाद धरनास्थल पर पहुंच जाए, फिर वहां बैठा ग्रुप गांव आकर अपना काम निपटाए। अखिल भारतीय किसान सभा के जिला प्रधान प्रीत सिंह ने कहा कि दो अप्रैल को संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक में अगली रणनीति तय होगी। फिलहाल एक प्रदर्शन पांच अप्रैल का तय है, इस दिन खेती बचाओ, मंडी बचाओ और एफसीआई बचाओ के झंडे तले किसान सभी जिलों में रोष प्रदर्शन करेंगे। क्योंकि सरकार खेती, मंडी के साथ एफसीआई को भी खत्म करने जा रही है। वहीं, राज्य सरकार ने विधानसभा में विधेयक पास किया है। जिसके तहत प्रदर्शन के दौरान किसी जायदाद को होने वाले नुकसान की भरपाई प्रदर्शनकारियों से की जाएगी। इसके विरोध में भी किसान और अन्य संगठन आंदोलन करेंगे। लेकिन किसानों का इस समय फोकस फसल कटाई और बिक्री पर है। उसे ध्यान में रख कर ही कोई भी रणनीति बनाई जाएगी।