नगर निगम की ऑनलाइन बनाई गई अस्थायी प्रॉपर्टी आईडी पर पहले निगम जांच पड़ताल करेगा कि सही ढंग से विकास शुल्क व प्रॉपर्टी टैक्स भरा गया या नहीं। इसके बाद ही तहसील में अस्थायी आईडी पर रजिस्ट्री हो सकेगी। खुद निगम आयुक्त प्रदीप गोदारा ने तहसीलदार को पत्र लिखकर अवगत करवाया है। साथ ही जांच में 33 से बढ़कर 48 हुई अस्थायी प्रॉपर्टी आईडी का नंबर व ब्योरा भेजकर पूछा है कि किस-किस आईडी पर अब तक रजिस्ट्री हुई है। क्योंकि पता चला है कि एक 500 गज के प्लॉट मालिक ने चार से पांच प्रॉपर्टी आईडी बना ली हैं, जिसमें एक आईडी तो मात्र 7 वर्ग गज की बनाई गई है। अमर उजाला में मामला उजागर होने के बाद डीसी कैप्टन मनोज कुमार ने भी निगम आयुक्त से इस संबंध में ब्योरा मांगा है।
प्रदेश सरकार ने तहसीलों के अंदर भ्रष्टाचार रोकने व रजिस्ट्री की प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए 22 जुलाई से 15 अगस्त तक रजिस्ट्री पर रोक लगा दी है। 17 अगस्त से नया सिस्टम चालू किया गया। इसमें रजिस्ट्री के लिए नगर निगम से एनओसी अनिवार्य की गई। पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन रखा गया। अब उसी प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री होती है, जिसकी एनओसी निगम टैक्स व विकास शुल्क जमा कराने के बाद जारी करता है। इसके अलावा सॉफ्टवेयर के अंदर प्रावधान है कि प्रॉपर्टी मालिक खुद भी अस्थायी आईडी बना सकता है। इसके लिए प्रॉपर्टी मालिक को तय विकास शुल्क व प्रॉपर्टी टैक्स निगम के अकाउंट में जमा करवाना होता है। राशि जमा होने पर ऑनलाइन ही एनओसी मिल जाती है। इसके बाद तहसील का टोकन मिल जाता है।
चार नवंबर तक बनी थी 33 अस्थायी प्रॉपर्टी आईडी
चार नवंबर के अंक में अमर उजाला ने खुलासा किया कि 33 अस्थायी प्रॉपर्टी आईडी बनाई थी। मामले का खुलासा होने पर निगम ने गहराई से रिकॉर्ड की जांच पड़ताल की तो पता चला कि अस्थायी प्रॉपर्टी आईडी की संख्या 48 पहुंच गई है। इसमें कई आईडी तो सेक्टर व निजी कॉलोनाइजर द्वारा बसाई गई कालोनियों की प्रॉपर्टी की है। एक आईडी की जांच पड़ताल की तो पता चला कि 500 वर्ग गज के प्लॉट में से अलग-अलग चार से पांच आईडी बनाई गई हैं। एक आईडी तो मात्र 7 वर्ग गज की है। ऐसे में निगम अब यह जांच कर रहा है कि उक्त प्रॉपर्टी का कितना विकाश शुल्क व प्रॉपर्टी टैक्स बनता है।
गलत ब्योरा देने पर निगम करवाएगा एफआईआर
एक अधिकारी ने बताया कि सॉफ्टवेयर के अंदर ऑनलाइन अस्थाई प्रॉपर्टी आईडी बनाने का प्रॉवधान है, लेकिन उसमें यह भी लिखा हुआ है कि अगर गलत ब्योरा दिया गया तो प्रॉपर्टी मालिक के खिलाफ केस दर्ज भी हो सकता है। ऐसे में निगम अब गहराई से पड़ताल कर पता लगा रहा है कि अस्थायी प्रॉपर्टी आईडी सही बनाई गई हैं या नहीं। साथ ही तहसील प्रशासन से पूछा है कि उक्त आईडी पर रजिस्ट्री तो नहीं की गई हैं।
नियमों के तहत ऑनलाइन अस्थायी प्रॉपर्टी आईडी बनाई जा सकती है, लेकिन यह भी प्रावधान है कि अगर प्रॉपर्टी मालिक गलत जानकारी देगा तो उसके खिलाफ केस दर्ज तक हो सकता है। प्रॉपर्टी टैक्स ब्रांच को सभी आईडी की रिपोर्ट मांगी है। साथ ही तहसील प्रशासन से पूछा है कि उक्त आईडी पर किस-किस प्रॉपर्टी से जुड़ी रजिस्ट्री हुई या नहीं।
-प्रदीप गोदारा, आयुक्त, नगर निगम।