विजेंद्र कौशिक
रोहतक। सरकार ने तहसीलों में नए साफ्टवेयर क्या लागू किए हैं इसने आम लोगों की नींद उड़ा दी है। खासकर पारिवारिक प्रॉपर्टी का हस्तांतरण रुक गया है। क्योंकि निगम बिना रजिस्ट्री प्रॉपर्टी आईडी नहीं बना रहा है। जबतक प्रॉपर्टी आईडी नहीं बनेगी, तब तक तहसील में रजिस्ट्री के लिए ई-टोकन नहीं बनेेगा। इन हालात में परेशान होकर शहर व आसपास के ग्रामीण घर वापस लौट रहे हैं।
जिला मुख्यालय स्थित रोहतक तहसील 5 लाख 12 हजार से ज्यादा आबादी वाली है, वहीं साथ में आसपास के 60 से 70 गांव भी आते हैं। 22 जुलाई से पहले रोहतक तहसील में 70 से 80 रजिस्ट्री होती थीं, लेकिन सरकार ने 17 अगस्त से नया साफ्टवेयर लागू किया है। नए नियमों के तहत नगर निगम व जिला नगर योजनाकार विभाग से एनओसी लेना अनिवार्य है। अगर एनओसी नहीं ली गई तो ऑनलाइन ई-टोकन नहीं मिलेगा। बिना ई-टोकन रजिस्ट्री नहीं हो सकती। इस नियम के तहत सबसे ज्यादा पारिवारिक प्रॉपर्टी हस्तांतरण के मामले अटक गए हैं।
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बिना रजिस्ट्री निगम नहीं बना रहा प्रॉपर्टी आईडी
नगर निगम पहले सेल्फ असेस्टमेंट व पूछताछ के आधार पर प्रॉपर्टी टैक्स तय करता था, लेकिन नए नियमों के तहत निगम ने संपत्ति की रजिस्ट्री अनिवार्य कर दी है। इसके तहत अगर एक पिता को अपना मकान, प्लाट, दुकान, फैक्टरी या दूसरी संपत्ति का परिवार के सदस्यों जैसे पत्नी, बेटा, बेटी या अन्य में बंटवारा करना है तो सीधी वसीयत तो हो सकती है, लेकिन अलग-अलग रजिस्ट्री नहीं हो पा रही है। क्योंकि रजिस्ट्री के लिए अलग-अलग प्रॉपर्टी आईडी चाहिए। निगम रजिस्ट्री के बिना प्रॉपर्टी आईडी नहीं बना रहा है।
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अब वसीयत में जिनके नाम संपत्ति हो रही उनके भी चाहिए आधार कार्ड
पहले वसीयत के कार्य को गुप्त रखा जाता था। जब तहसील में वसीयतनामा तैयार करवाया जाता था, उस समय वसीयत करवाने वाले व्यक्ति का ही आधार कार्ड मांगा जाता था। जिनके नाम वसीयत हो रही है उनकी पहचान ज्यादा उजागर नहीं होती थी, लेकिन अब सभी के लिए आधार कार्ड अनिवार्य किया गया है।
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आधार कार्ड का विकल्प नहीं, राशन कार्ड, वोटर कार्ड या पासपोर्ट नहीं मान्य
तहसील में पहले आधार कार्ड के अलावा वोटर कार्ड, राशन कार्ड या पासपोर्ट चल जाता था, लेकिन नए साफ्टवेयर में आधार कार्ड नंबर भरना अनिवार्य है। साथ में आधार कार्ड मोबाइल नंबर से अटैच होना चाहिए, ताकि ई-टोकन के लिए ओटीपी आ सके। इसमें सबसे ज्यादा परेशानी उन लोगों को हो रही है, जिन्होंने आधार कार्ड नहीं बनवा रखा।
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नहीं खा रहा निगम व तहसील का रिकार्ड मेल
नगर निगम के पास प्रॉपर्टी टैक्स का रिकार्ड 2011 के सर्वे पर आधारित है। उस समय सर्वे मौखिक जानकारी व सेल्फ असेस्टमेंट से किया गया। जबकि तहसील के रिकार्ड में एक-एक इंच लिखा हुआ है। ऐसे में लोगों को पहले निगम में रिकार्ड ठीक कराना पड़ रहा है। इसके बाद एनओसी लेनी पड़ रही है। सरकार को पूरा रिकार्ड अपडेट करके नई व्यवस्था को लागू करना चाहिए था।
-अशोक खुराना, पूर्व पार्षद नगर निगम
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यूं भी फंसा हुआ आम नागरिक
10 लाख 56 हजार रुपये दे चुका, फिर भी रजिस्ट्री नहीं हो रही
न्यू विजय नगर में 504 गज प्लाट में से 82 गज प्लाट 18 लाख 56 हजार रुपये में खरीदा था, जिसके पूरे पैसे प्लाट मालिक को दे चुका हूं। नगर निगम की तरफ से मुझसे 350 रुपये प्रति गज के हिसाब से पूरे प्लाट का विकास शुल्क 1 लाख 76 हजार रुपये मांगा जा रहा है। जबकि जितनी जमीन मैंने खरीदी थी, उसका विकास शुल्क मात्र 23 हजार रुपये बनता है। निगम के अधिकारी कहते हैं कि जब तक पूरे प्लाट का विकास शुल्क जमा नहीं होगा, तब तक 82 गज की भी रजिस्ट्री नहीं होगी। प्लाट मालिक पूरे प्लाट का विकास शुल्क भरने से इंकार कर रहा है। अब मैं कहां जाऊं।
-सुरेंद्र कुमार, निवासी विजय नगर
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फाइल ही लापता हो गई ऑनलाइन
250 वर्ग गज का प्लाट खरीदने के लिए प्रॉपर्टी आईडी बनवानी है। इसके लिए एक सप्ताह पहले नगर निगम के काउंटर पर पूरे रिकार्ड सहित फाइल जमा करवाई थी। अब मंगलवार को जाकर पता किया कि अंदर कमरे में बताया गया कि आपकी फाइल उनके पास नहीं पहुंची है। काउंटर पर मौजूद कर्मचारी कह रहा है कि उसने ऑनलाइन फाइल आगे भेज दी थी। इसके बाद निगम के आला अधिकारियों से मिला। आश्वासन मिला है कि दो दिन में फाइल की जांच करके प्रॉपर्टी आईडी बना दी जाएगी।
-सुनील कुमार, निवासी जनता कॉलोनी
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बंटवारे में प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री नए नियमों के तहत नहीं हो पा रही है। क्योंकि निगम बिना रजिस्ट्री आईडी नहीं बना रहा है और बिना आईडी रजिस्ट्री के लिए एनओसी नहीं मिल रही है। जब तक एनओसी नहीं मिलेगी, तब तक तहसील में रजिस्ट्री नहीं होगी। सबसे ज्यादा पारिवारिक संपत्ति स्थानांतरण के केस प्रभावित हुए हैं। सरकार को चाहिए कि जितने एरिया की रजिस्ट्री होनी है, उतना की विकास शुल्क व प्रॉपर्टी टैक्स अनिवार्य करे। तभी आम लोगों को कुछ राहत मिल सकती है।
-विनोद कुमार, प्रॉपर्टी राइटर तहसील
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निगम अपने स्तर पर बिना रजिस्ट्री के प्रॉपर्टी आईडी नहीं बना सकता। क्योंकि निगम को क्या पता कि किसको कितना हिस्सा मिलेगा। किसके नाम संपत्ति जाएगी। बाकि सरकार साफ्टवेयर में कोई परिवर्तन करती है तो निगम आगे विचार कर सकता है।
-जगदीश चंद्र, जोनल टैक्स आफिसर नगर निगम
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तहसील में जितने टोकन लगते हैं, सभी रजिस्ट्री करवाई जा रही हैं। मंगलवार को भी 70 से ज्यादा रजिस्ट्री हुई हैं। प्रॉपर्टी आईडी बनाना व एनओसी देना नगर निगम का कार्य है। तहसील का इससे कोई संबंध नहीं है।
-राजेश कुमार, तहसीलदार रोहतक तहसील