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ऑटो पर लटककर स्कूल जाने को मजबूर हैं विद्यार्थी

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ऑटो पर लटक कर स्कूल जाते बच्चे। - फोटो : Rewari
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बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान के तहत सरकार लड़कियों की शिक्षा के लिए जागरूक करने में जुटी हुई है। इसके विपरीत पिछले कई वर्षों से रोडवेज बस न चलते ने से बीस गांवों की छात्राओं को टेंपो व निजी बसों में लटककर पढ़ाई के सपने को पूरा करना पड़ रहा है। इसको लेकर ग्रामीणों में नाराजगी है जबकि रोडवेज अधिकारियों का कहना है कि ये समस्या उनके संज्ञान में नहीं है। ग्रामीणों की मांग पर इन मार्गों पर बस चलवा दी जाएगी।
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बावल क्षेत्र के गांव प्राणपुरा, पावटी, पनवाड़, नांगल तेजू, शाहपुर, टीकला, धरचाना, खेड़ा मुरार, मंगलेश्वर, माजरी, इब्राहिमपुर, भगवानपुर व खुरमपुर, दुल्हेड़ा आदि गांवों की ओर जाने वाली सड़कों पर लंबे समय से रोडवेज की बसों का अभाव है। इस कारण बेटियों का प्राथमिक शिक्षा के बाद उच्च शिक्षा के लिए गांव से बाहर जाना पड़ता है। राजस्थान सीमा से सटे इन गांवों की छात्राओं को हर रोज 10-25 किमी. स्कूल आने में समस्याओं का सामाना करना पड़ता है। छात्र ही नहीं इन गांव से हर रोज हजारों की संख्या में आने वाले ग्रामीण भी शामिल हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि बार-बार शिकायत करने पर प्राणपुरा रोड पर कभी-कभी रोडवेज की बसें चला दी जाती हैं, लेकिन कुछ समय बाद इन्हें बंद कर दिया जाता है। वहीं, रोडवेज के महाप्रबंधक नवीन भारद्वाज ने बताया कि यह समस्या मेरे संज्ञान में नहीं है। ग्रामीणों की मांग पर संबंधित रूट पर बस चलाने की व्यवस्था की जाएगी।
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