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निजी स्कूलों ने पुरानी फीस के लिए रोके विद्यार्थियों के रोल नंबर

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सोनीपत रोड स्थित एक निजी स्कूल के बाहर फीस को लेकर हंगामें के दोरान बाहर खड़े अभिभावक। अमर उजाला - फोटो : RohtakCity
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रोहतक। कोरोना का दर्द कम होने का नाम नहीं ले रहा है। सत्र पूरा होने व परीक्षा से पहले निजी स्कूलों में एक बार फिर फीस के नाम पर वसूली खेल का शुरू हो गया है। यह हम नहीं, स्कूल संचालकों के चंगुल में फंसे अभिभावकों का कहना है। अपने बच्चों के भविष्य को लेकर आहत अभिभावकों ने शनिवार को स्कूल संचालक से मुलाकात की। यहां उन्हें फीस जमा कराने पर ही बच्चों के रोल नंबर दिए जाने का दो टूक जवाब मिला। इधर, स्कूल संचालक ने रोल नंबर रोके जाने की बात से साफ इनकार किया है।
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शनिवार को शहर के विभिन्न हिस्सों से अभिभावक सोनीपत रोड स्थित एक निजी स्कूल पहुंचे। उन्हें स्कूल की ओर से फीस जमा कराने के लिए कहा गया था। यह फीस करीब 16 हजार रुपये बताई गई है। अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल ने इसे बकाया फीस बताया है। यही नहीं इसमें ट्यूशन फीस, परिवहन, स्मार्ट क्लास व अन्य तरह के शुल्क भी जोड़े हुए हैं। जबकि जनवरी व फरवरी में स्कूल लगे ही नहीं। इसके बावजूद परिवहन शुल्क लिया जा रहा है। कोरोना काल में सरकार ने खुद ट्यूशन फीस नहीं लेने की बात कही थी। अब स्कूल प्रबंधन बच्चों के रोल नंबर रोक कर अभिभावकों पर शुल्क जमा कराने का दबाव बना रहा है। बच्चों की 26 अप्रैल से कक्षा 10वीं की परीक्षाएं शुरू हो रही है। रोल नंबर नहीं मिले तो बच्चे परीक्षा में नहीं बैठ पाएंगे। इसलिए शनिवार सुबह अभिभावक स्कूल पहुंचे। इसके बावजूद उनकी सुनवाई नहीं हो रही है। कभी कहीं भेजा जा रहा है तो कभी कहीं। स्कूल निदेशक मिलने नहीं आ रहे हैं। ऐसे में किसे अपनी बात कहें। रोल नंबर लेने के लिए जाने वाले अभिभावकों को बकाया शुल्क की पर्ची थमा दी जाती है। इसे जमा कराने के अलावा और कोई बात नहीं कर रहा है। बच्चों का भविष्य देखते हुए कुछ ने तो शुल्क जमा करा दिया है। जबकि कुछ की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। इस कारण परेशानी बनी हुई है। जिला प्रशासन व शिक्षा विभाग समस्या का समाधान कराते हुए अभिभावकों को राहत पहुंचाए।
वर्जन:
स्कूल ने अपनी बकाया फीस मांगी है। किसी भी बच्चे का रोल नंबर नहीं रोका गया है। बकाया फीस जमा कराने के लिए उन्हें सूचित किया गया था।
- डॉ. रवि गुगनानी, निदेशक, स्कॉलर्स रोजरी स्कूल।
फीस के लिए रोल नंबर रोकने के संबंध में किसी तरह की शिकायत नहीं मिली है। विद्यार्थियों का साल खराब कर भविष्य से खिलवाड़ नहीं किया जा सकता है। यदि स्कूल को फीस नहीं मिली तो वह परिणाम रोक सकता है। परीक्षा देने से नहीं रोक सकता। एसएलसी भी स्कूल से ही ली जाती है। स्कूल जायज फीस ले सकते हैं। शिकायत मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।
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- डॉ. विजय लक्ष्मी नांदल, जिला शिक्षा अधिकारी।
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