झज्जर। देश की आजादी को जब 11 साल हुए थे और कहीं स्कूल, कॉलेज कम ही हुआ करते थे, तब झज्जर एजुकेशन सोसाइटी ने शहर में नेहरू कॉलेज की स्थापना की थी। हर किसी ने श्रमदान करके इस कॉलेज का निर्माण किया था। जिसके पास जमीन थी, उसने जमीन दान दी। जिनके पास पैसों की कमी थी तो उसने यहां श्रमदान किया। लोगों के जनून को देखते हुए संस्था का कोण शिला देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने 7 दिसंबर 1958 को रखी थी।
इसका उद्घाटन भारत की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने दो जुलाई 1959 को किया था। इसी दिन पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने अपने हाथों से राजकीय स्नातकोत्तर नेहरू महाविद्यालय झज्जर का पहला एडमिशन किया था और कॉलेज का उद्घाटन किया था। पिछले 66 वर्षों से यह कॉलेज उच्च शिक्षा के लिए युवाओं के स्वप्न को साकार कर रहा है।
203 विद्यार्थियों से 2096 तक का सफर
वर्ष 1959 में नेहरू कॉलेज में 203 विद्यार्थी पढ़ते थे, जिनमें से केवल 7 छात्राएं थीं। वर्ष 1960 में 316 विद्यार्थियों ने दाखिला लिया, जिनमें केवल 9 छात्राएं थीं।
तन मन धन से निर्माण
महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. दलबीर सिंह ने बताया कि झज्जर एजुकेशन सोसाइटी ने इस कॉलेज की स्थापना की थी। यहां के किसानों, मजदूरों, व्यापारियों, कर्मचारियों और सेवानिवृत्त सैनिकों ने भूमि और धन देकर पूरी समर्पण भावना से इसका निर्माण किया। कॉलेज का निर्माण झज्जर के तत्कालीन एसडीएम सुखदेव प्रसाद की अध्यक्षता में हुआ था। उस समय गोपीचंद झज्जर शिक्षा समिति के मंत्री व नगर पालिका के प्रबंधक थे। संस्था की कोण शिला तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने 7 दिसंबर 1958 को रखी थी। अक्तूबर 1963 में कॉलेज का संचालन सरकार ने अपने हाथ में ले लिया, पहले यह प्राइवेट था।
उच्च पदों पर आसीन हुए विद्यार्थी
कॉलेज के मीडिया प्रभारी डॉ. अमित भारद्वाज का कहना है कि यहां से शिक्षा ग्रहण करके विद्यार्थी अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक, सशस्त्र सेना और पुलिस सेवा अधिकारी, न्यायिक सेवा अधिकारी, प्रशासनिक सेवा अधिकारी, राजनीतिज्ञ, वकील, गायक, संगीतज्ञ व अन्य उच्च अधिकारी बने हैं। कई विद्यार्थियों ने यहीं से शिक्षा ग्रहण करके इसी कॉलेज में प्राध्यापक और प्राचार्य पद को सुशोभित किया है।