पीजीआईएमएस में डिस्चार्ज कार्ड के नाम पर एक और नया फर्जीवाड़ा सामने आया है। संस्थान की ओर से पुलिस को शिकायत दी गई है कि मरीज उपचार के लिए आया ही नहीं और उसका डिस्चार्ज कार्ड तक बन गया। शिकायत के आधार पर पीजीआईएमएस थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। गौरतलब है कि इस मामले में पीजीआई प्रबंधन ने जांच पूरी होने के बाद ही मामला पुलिस को साैंपा है। मामला भी करीब डेढ़ साल पुराना है।
सूत्रों के अनुसार तीन अक्तूबर 2019 को एक 76 साल की महिला को हृदय संबंधी समस्या के लिए मेडिसिन विभाग के वार्ड तीन की यूनिट पांच में दाखिल दिखाया गया और उसे छह अक्तूबर 2019 को डिस्चार्ज कर दिया गया। कार्ड में मरीज की पूरी सूचना के साथ डॉक्टर व बीमारी की डिटेल के साथ दवाओं को लिखा गया है। यही नहीं कार्ड पर मेडिसिन विभाग के यूनिट के प्रोफेसर एवं हेड की मुहर भी लगी है। अब बताया जा रहा है कि डिस्चार्ज कार्ड पूरी तरह फर्जी है, इसमें हस्ताक्षर व मुहर सब कुछ फर्जी है। संस्थान के संज्ञान में मामला उस समय आया जब कार्ड के बारे में जानकारी लेने वार्ड में पुलिस पहुंची। इसके बाद प्रशासन हरकत में आया और कार्ड के आधार पर पुलिस को शिकायत दे दी। गौरतलब है कि प्रदेश में कैंसर मरीजों की दुर्घटना में मौत दिखा कर बिल क्लेम का मामला पहले भी सुर्खियों में रहा है। ऐसे में अंदेशा बना है कि इस तरह के और मामले भी फर्जी हो सकते हैं।
फर्जीवाडे़ की गुंजाइश संस्थान स्वयं छोड़ रहा
पीजीआईएमएस के डॉक्टर व प्रशासन संस्थान में फर्जीवाडे़ की गुंजाइश स्वयं ही छोड़ता है। यहां फर्जी डॉक्टर, फर्जी स्टाफ के मामले अक्सर सामने आते रहते हैं। अब फर्जी डिस्चार्ज कार्ड का मामला भी सामने आ गया है। इसकी मुख्य वजह है कि यहां निर्देशों के बावजूद न तो कोई पहचान पत्र साथ रखता है और न ही अप्रेन डालता है। यही नहीं मरीज के कार्ड पर डॉक्टर सही हस्ताक्षर नाम के साथ नहीं करते। डॉक्टर जानबूझ कर अपनी डिटेल कार्ड पर नहीं डालते, इसका लाभ फर्जीवाड़ा करने वाले अक्सर उठाते हैं। सबसे बड़ी समस्या है कि सीनियर डॉक्टर अपनी जिम्मेदारी लेते नहीं और जूनियर डॉक्टर तय समय बाद लौट जाते हैं और मामला कोर्ट में विचाराधीन रहता है।
दुरुपयोग होने की रहती है आशंका
पीजीआईएमएस के जनसंपर्क अधिकारी डॉ. गजेंद्र ने बताया कि झूठे कागजातों को आधार बनाकर जमानत, ड्यूटी से छुट्टी लेने के अलावा संगीन मामलों में बचाव के लिए इनका प्रयोग किया जा सकता है। इसके साथ ही बिल क्लेम करने जैसा फर्जीवाड़ा हो सकता है। इसलिए ऐसे मामलों की जांच जरूरी है। साथ ही निर्देश दिए जाएंगे कि जो भी कागजात बनाए जाए वह पूरे नाम और हस्ताक्षर के साथ हों। इससे फर्जीवाड़ा पर रोक लगाई जा सकती है।
मामले से जुडे़ सभी दस्तावेज जुटाए जा रहे हैं। अभी कुछ भी स्पष्ट तौर पर कह पाना मुश्किल है। शिकायत के आधार पर जांच की जा रही है। जांच में जो सामने आएगा, उस आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
- राजू सिंधू, पीजीआईएमएस थाना प्रभारी