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एलिवेटेड ट्रैक पर 112 किमी. की रफ्तार से दौड़ी सीआरएस की स्पेशल ट्रेन

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ऐलिवेटेड रेलवे ट्रैक पर चलती ट्रेन। संवाद न्यूज एजेंसी
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अब शहर के अंदर से ट्रेन गुजरेगी मगर न जाम लगेगा और न फाटक बंद होगा। रविवार को सीआरएस (कमिश्नर ऑफ रेलवे सेफ्टी) और एडीआरएम ने ट्रॉली से साढ़े छह घंटे एलिवेटेड ट्रैक का निरीक्षण किया। शाम करीब साढ़े पांच बजे सीआरएस की 9 कोच वाली स्पेशल ट्रेन 112 किलोमीटर की रफ्तार से गुजरने के साथ ही रेल ट्रैक का श्रीगणेश हो गया। वहीं, शहर से गुजर रहे ट्रैक को स्टेशन की लाइन से काट दिया गया। सात सिग्नल में से तीन को उखाड़ भी दिया गया।
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गोहाना-रोहतक रेलवे ट्रैक शहर के अंदर से गुजरता था। जब भी ट्रेन गुजरती थी, तभी बजरंग भवन फाटक, सोनीपत स्टैंड व शीला बाईपास क्रॉसिंग पर जाम लगता था। इससे लोगों को राहत दिलाने के लिए प्रदेश सरकार ने 315 करोड़ रुपये में 4.8 किमी. लंबे एलिवेटेड ट्रैक का निर्माण कराया, जिसे चिन्यौट कॉलोनी से आईटीआई सेक्टर-छह तक 109 पिलर बनाए गए हैं। करीब तीन माह से रेलवे के अलग-अलग विभागों की टीमें ट्रैक की तैयारी के साथ-साथ निरीक्षण कर रही थी। रेलवे के नियमानुसार बिना सीआरएस निरीक्षण के कोई भी नया पुल या ट्रैक चालू नहीं हो सकता है, इसलिए रविवार की सुबह साढ़े दस बजे 9 कोच की स्पेशल ट्रेन से कमिश्नर ऑफ रेलवे सेफ्टी लखनऊ लतीफ खान और एडीआरएम इंफ्रा अश्वनी यादव प्रत्येक विभाग के इंजीनियरों की टीमों के साथ पहुंचे। करीब सुबह 11:10 बजे सीआरएस व एडीआरएम ट्रॉली में सवार होकर निरीक्षण करने निकले। उनके साथ सात ट्रॉली व ओएचई इंजन में इंजीनियरों की टीमें थी। सबसे पहले सीआरएस ने रेलवे स्टेशन के ट्रैक से एलिवेटेड ट्रैक की लाइन जोड़ने के स्थान पर काठ के पुल के पास निरीक्षण किया। इसके बाद चिन्यौट कॉलोनी से लेकर बजरंग भवन फाटक तक साढ़े तीन घंटे में निरीक्षण किया। सीआरएस ने निर्माण के साथ-साथ पटरी, ओएचई, सिग्नल आदि का गहनता से निरीक्षण किया। इसके बाद आईटीआई सेक्टर-छह तक तीन घंटे में निरीक्षण किया। सब कुछ सही मिलने के बाद सीआरएस ने अपनी स्पेशल ट्रेन से स्पीड ट्रायल किया। शाम करीब सवा छह बजे रेलवे स्टेशन से रवाना हुई ट्रेन एलिवेटेड ट्रैक से 112 किमी. की रफ्तार से गुजरने के साथ ही ट्रैक को चालू कर दिया गया। इस दौरान सीआरएस के साथ सीईडीई हेडक्वार्टर राजेश सिंह, डिप्टी सीईई विपिन पाल, सीएसटीई कंस्ट्रक्शन संजीव कुमार, सीनियर डीएसओ मंगल सिंह, राजबीर सिंह आदि अधिकारी मौजूद रहे।
तीन साल में शुरू हुआ एलिवेटेड ट्रैक
एलिवेटेड रेलवे ट्रैक की नींव मार्च 2018 में मुख्यमंत्री ने शहरवासियों को जाम से राहत दिलाने के लिए रखी थी। प्रदेश सरकार ने रेलवे से 315 करोड़ रुपये में एलिवेटेड रेल ट्रैक बनवाया है। दो साल में ट्रैक पर संचालन होना था। विरोध के चलते जमीन अधिग्रहण में देरी और लॉकडाउन की वजह से एक साल देरी से चालू हो सका है।
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पुरानी ट्रैक पर बनाई जाएगी सड़क
एलिवेटेड रेलवे ट्रैक चालू हो गया है। अब रेलवे प्रदेश सरकार को पुराने ट्रैक की जमीन लीज पर देगा और स्टेशन से सेक्टर-छह तक सड़क बनाई जाएगी। इस रास्ते के बनने के बाद शहरवासियों को स्टेशन और बस स्टैंड के लिए आवागमन काफी सुगम हो जाएगा।
चार स्थानों पर बनाई जाएगी वाहन पार्किंग
एलिवेटेड रेलवे ट्रैक के नीचे शहरवासियों की सुविधा के लिए चार स्थानों पर वाहन पार्किंग बनेगी। पार्किंग बनाने का स्थान भी चिह्नित कर दिया गया है। अब पार्किंग काठ मंडी पुल, बजरंग भवन फाटक, सोनीपत स्टैंड रोड व शीला बाईपास रोड पर बनेगी।
एक नजर में एलिवेटेड ट्रैक
- मार्च 2018 में मुख्यमंत्री ने नींव रखी।
- ट्रैक की लागत 315 करोड़ रुपये।
- 4.8 किमी. लंबे ट्रैक पर बनाए 109 पिलर।
निरीक्षण के दौरान मामूली खामियां मिली थी, जिनको तुरंत ठीक करवा दिया गया। चूंकि इतना बड़ा काम होता है, तो मामूली कमी रह जाती है। ट्रैक पूरी तरह से फिट हैं और अब ट्रेन चलेगी।
- अश्वनी यादव, एडीआरएम इंफ्रा
एलिवेटेड ट्रैक की गुणवत्ता के साथ हर पहलू से ट्रैक की जांच कर ली है। कहीं कोई कमी नहीं मिली है, अब ट्रैक पर ट्रेनों का संचालन करने के लिए कह दिया गया है।
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- लतीफ खान, सीआरएस, लखनऊ
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